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वाराणसी को दहला रही बाहर के बदमाशों की नई पौध
Varanasi
Updated Mon, 28 Jul 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। जरायम की दुनिया में भी बदलाव नजर आ रहा है। वाराणसी और आसपास के इलाकों में बाहर से बुलाए गए बदमाशों की नई पौध अपनी धमक सुना रही है। जेल की सलाखों के पीछे पड़े या अन्य धंधों में लग चुके बड़े माफिया और सफेदपोशों अपना काम करने के लिए इन अपराधियों को ऐसे टॉस्क दे रहे हैं। अभी तक पुलिस के हत्थे चढ़े बदमाशों में अधिकांश गोरखपुर के रहने वाले ही हैं। सभी कम उम्र के हैं और उनकी अपराध की दुनिया में या पुलिस में कोई रिकार्ड भी नहीं है। इस कारण अपराध करने के बच निकलना आसान साबित हो रहा है। आकाओं की पहचान भी छुपी रह पाती है। खुलासे के बाद पुलिस अब उन इलाकों में खुफिया निगरानी बढ़ा रही है।
गोरखपुर कनेक्शन का खुलासा
केस एक
मुंबई का अंडरवर्ल्ड बंजाराजा उर्फ राजा शेट्टी गैंग का कुख्यात शूटर जावेद उर्फ अजय निवासी आहोपुर वाराणसी ने कर्नाटक जेल में बंद गोरखपुर के शातिर बदमाश नीरज श्रीवास्तव को वाराणसी के तीन कारोबारियों की गोली मारकर दहशत फैलाने की सुपारी दिया था। गोरखपुर के तीन शूटर वाराणसी घटना को अंजाम देने पहुंचते उससे पहले सुपारी देने वाले जावेद का भाई सलमान उर्फ बाबू एवं उसके साथी सहुेल एवं प्रशांत सिंह उर्फ सोनल को एटीएफ ने सात जुलाई को गिरफ्तार कर लिया।
केस दो
माफिया गैंग के मुखिया बृजेश सिंह का विरोधी इन्द्रदेव सिंह उर्फ बीकेडी गिरोह ने गोरखपुर के विवेक सिंह यह अपराधी को चंदौली के एक विधायक की हत्या की सुपारी दी थी। गोरखपुर से आए शूटर पुलिस वर्दी में घटना को अंजाम देने वाले थे। इसका खुलासा एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार गाजीपुर के 25 हजार रुपये के इनामी बदमाश नामवर यादव ने किया। इस घटना को अंजाम वाराणसी में ही दिया जाना था।
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पुराना है वाराणसी-गोरखपुर का आपराधिक कनेक्शन
पूर्वांचल में गोरखपुर से वाराणसी का आपराधिक कनेक्शन काफी पुराना है। अस्सी के दशक में हरिशंकर तिवारी एवं वीरेंद्र प्रताप शाही के बीच छिड़ी वर्चस्व की जंग में वाराणसी के बदमाशों का दोनों इस्तेमाल करते थे। वर्ष 1996 में गोरखपुर के चर्चित बदमाश श्रीप्रकाश शुक्ला व उसके गैंग को प्रश्रय वाराणसी में एक माफिया ने दिया था। 1997 में इस गैंग के ह्दय सिंह कौशिक को पुलिस ने वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र में मार गिराया था। उसके पास से एक 47 बरामद हुई थी। इसके बाद जो भी बदमाश चर्चा में आया मुठभेड़ में मारा गया। अब सफेदपोश माफिया कम उम्र के लड़कों को अपराध में उतार रहे हैं ताकि वे पुलिस की निगाह में न आ सके। आजमगढ़, वाराणसी, जौनपुर में हुई कुछ चर्चित घटनाओं में कम उम्र के लड़के भी शामिल थे लेकिन उनका नाम इन घटनाओं में सामने नहीं आ सका। वाराणसी के तीन व्यापारियों पर बम से हमला करने आने वाले जिन शूटरों के नाम सामने आए हैं उनमें दो की उम्र 18 वर्ष के करीब है।
इन पर शूटर मुहैया कराने का शक
गोरखपुर इलाके में शूटरों की पौध खड़ा करने में एक बाहुबली विधायक, देवरिया जिले के एक ब्लाक प्रमुख, विधान सभा का चुनाव लड़ चुका एक नेता, सहजनवां के एक पूर्व ब्लाक प्रमुख का बेटा, एक पूर्व मंत्री, एक एमएलसी तथा जेल में बंद कुछ नामी अपराधियों का हाथ है। गोरखपुर से शूटरों की सेवा लेने में यहां भी हत्या किए है। शूटर को यह नहीं बताया जाता कि सुपारी किसने दी है। तीसरे माध्यम से उसे काम सौंपा जाता है। पकड़े जाने पर वह सिर्फ यह बता सकता है कि उसे काम क्या करना था।
कोट:
एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार बदमाशों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले है। दूसरे इलाकों से आने वाले बदमाशों की निगरानी की जा रही है। ऐसे बदमाशों की सूची तैयार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसके भगत, डीआईजी, वाराणसी रेंज
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गोरखपुर कनेक्शन का खुलासा
केस एक
मुंबई का अंडरवर्ल्ड बंजाराजा उर्फ राजा शेट्टी गैंग का कुख्यात शूटर जावेद उर्फ अजय निवासी आहोपुर वाराणसी ने कर्नाटक जेल में बंद गोरखपुर के शातिर बदमाश नीरज श्रीवास्तव को वाराणसी के तीन कारोबारियों की गोली मारकर दहशत फैलाने की सुपारी दिया था। गोरखपुर के तीन शूटर वाराणसी घटना को अंजाम देने पहुंचते उससे पहले सुपारी देने वाले जावेद का भाई सलमान उर्फ बाबू एवं उसके साथी सहुेल एवं प्रशांत सिंह उर्फ सोनल को एटीएफ ने सात जुलाई को गिरफ्तार कर लिया।
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केस दो
माफिया गैंग के मुखिया बृजेश सिंह का विरोधी इन्द्रदेव सिंह उर्फ बीकेडी गिरोह ने गोरखपुर के विवेक सिंह यह अपराधी को चंदौली के एक विधायक की हत्या की सुपारी दी थी। गोरखपुर से आए शूटर पुलिस वर्दी में घटना को अंजाम देने वाले थे। इसका खुलासा एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार गाजीपुर के 25 हजार रुपये के इनामी बदमाश नामवर यादव ने किया। इस घटना को अंजाम वाराणसी में ही दिया जाना था।
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पुराना है वाराणसी-गोरखपुर का आपराधिक कनेक्शन
पूर्वांचल में गोरखपुर से वाराणसी का आपराधिक कनेक्शन काफी पुराना है। अस्सी के दशक में हरिशंकर तिवारी एवं वीरेंद्र प्रताप शाही के बीच छिड़ी वर्चस्व की जंग में वाराणसी के बदमाशों का दोनों इस्तेमाल करते थे। वर्ष 1996 में गोरखपुर के चर्चित बदमाश श्रीप्रकाश शुक्ला व उसके गैंग को प्रश्रय वाराणसी में एक माफिया ने दिया था। 1997 में इस गैंग के ह्दय सिंह कौशिक को पुलिस ने वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र में मार गिराया था। उसके पास से एक 47 बरामद हुई थी। इसके बाद जो भी बदमाश चर्चा में आया मुठभेड़ में मारा गया। अब सफेदपोश माफिया कम उम्र के लड़कों को अपराध में उतार रहे हैं ताकि वे पुलिस की निगाह में न आ सके। आजमगढ़, वाराणसी, जौनपुर में हुई कुछ चर्चित घटनाओं में कम उम्र के लड़के भी शामिल थे लेकिन उनका नाम इन घटनाओं में सामने नहीं आ सका। वाराणसी के तीन व्यापारियों पर बम से हमला करने आने वाले जिन शूटरों के नाम सामने आए हैं उनमें दो की उम्र 18 वर्ष के करीब है।
इन पर शूटर मुहैया कराने का शक
गोरखपुर इलाके में शूटरों की पौध खड़ा करने में एक बाहुबली विधायक, देवरिया जिले के एक ब्लाक प्रमुख, विधान सभा का चुनाव लड़ चुका एक नेता, सहजनवां के एक पूर्व ब्लाक प्रमुख का बेटा, एक पूर्व मंत्री, एक एमएलसी तथा जेल में बंद कुछ नामी अपराधियों का हाथ है। गोरखपुर से शूटरों की सेवा लेने में यहां भी हत्या किए है। शूटर को यह नहीं बताया जाता कि सुपारी किसने दी है। तीसरे माध्यम से उसे काम सौंपा जाता है। पकड़े जाने पर वह सिर्फ यह बता सकता है कि उसे काम क्या करना था।
कोट:
एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार बदमाशों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले है। दूसरे इलाकों से आने वाले बदमाशों की निगरानी की जा रही है। ऐसे बदमाशों की सूची तैयार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसके भगत, डीआईजी, वाराणसी रेंज