{"_id":"140-133445","slug":"Varanasi-133445-140","type":"story","status":"publish","title_hn":"करसड़ा प्लांट : अब प्रदूषण का संकट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करसड़ा प्लांट : अब प्रदूषण का संकट
Varanasi
Updated Thu, 26 Jun 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। शहर के कूड़ा निस्तारण के लिए बने करसड़ा प्लांट के चालू न होने से अब एक और समस्या खड़ी हो गई है। यहां डंप कूड़े का निस्तारण्ा न होने से गंगा के अलावा प्लांट के आसपास के इलाके का भू-जल प्रदूषित होने का संकट मंडराने लगा है। इस बारे में नगर आयुक्त ने निजी एजेंसी एटूजेड को पत्र भेजकर अवगत कराया है। साथ ही, इस ओर तत्काल ध्यान न दिए जाने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
करसड़ा प्लांट से कूड़े की प्रोसेसिंग कर उससे खाद, ईंट और बिजली बनाने की योजना प्रस्तावित है। लेकिन, लंबे समय बाद भी प्लांट अब तक चालू नहीं हो पाया है। एक करार के तहत निजी एजेंसी एटूजेड को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन अब तक न तो कूड़ा निस्तारण संयंत्र का निर्माण पूरा हो पाया है न ही प्लांट परिसर में कूड़ा डंप करने के वैज्ञानिक तौर-तरीके अपनाए जा रहे हैं। इसके चलते जहां एक ओर शहर के कूड़ा निस्तारण की समस्या गहराती जा रही है, वहीं दूसरी ओर करसड़ा में गंगा के अलावा आसपास के इलाके का भू-जल प्रदूषित होने का खतरा मंडराने लगा है। लंबे समय से डंप कूड़े की प्रोसेसिंग न होने और प्लांट परिसर का गंदा पानी गंगा में बहने से स्थिति गंभीर होती जा रही है। इसे लेकर स्थानीय नागरिक कई बार धरना-प्रदर्शन कर अपना विरोध जता चुके हैं। निगम सूत्रों के मुताबिक 11 सितंबर 2013 हुई बैठक में तय अनुबंध शर्तों के तहत निजी एजेंसी ने 31 जनवरी 2014 तक प्लांट चालू करने का आश्वासन दिया था। लेकिन, लगभग साढ़े चार माह का समय बीत चुका है और अब तक इंच भर भी काम नहीं हुआ है। इस बारे में नगर आयुक्त ने एटूजेड के मुख्य प्रबंधक को भेजे गए पत्र में स्थिति को गंभीर बताया है। कहा है कि कूड़ा प्रोसेसिंग का कार्य जल्द शुरू कराया जाए। साथ ही, कूड़ा डंपिंग के लिए प्लांट परिसर की जमीन वैज्ञानिक पद्धति से तैयार कराई जाए ताकि डंप कूड़े का जमीन में रिसाव न होने पाए। प्रदूषण रोकने के उपायों पर ध्यान न दिए जाने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
विज्ञापन
करसड़ा प्लांट से कूड़े की प्रोसेसिंग कर उससे खाद, ईंट और बिजली बनाने की योजना प्रस्तावित है। लेकिन, लंबे समय बाद भी प्लांट अब तक चालू नहीं हो पाया है। एक करार के तहत निजी एजेंसी एटूजेड को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन अब तक न तो कूड़ा निस्तारण संयंत्र का निर्माण पूरा हो पाया है न ही प्लांट परिसर में कूड़ा डंप करने के वैज्ञानिक तौर-तरीके अपनाए जा रहे हैं। इसके चलते जहां एक ओर शहर के कूड़ा निस्तारण की समस्या गहराती जा रही है, वहीं दूसरी ओर करसड़ा में गंगा के अलावा आसपास के इलाके का भू-जल प्रदूषित होने का खतरा मंडराने लगा है। लंबे समय से डंप कूड़े की प्रोसेसिंग न होने और प्लांट परिसर का गंदा पानी गंगा में बहने से स्थिति गंभीर होती जा रही है। इसे लेकर स्थानीय नागरिक कई बार धरना-प्रदर्शन कर अपना विरोध जता चुके हैं। निगम सूत्रों के मुताबिक 11 सितंबर 2013 हुई बैठक में तय अनुबंध शर्तों के तहत निजी एजेंसी ने 31 जनवरी 2014 तक प्लांट चालू करने का आश्वासन दिया था। लेकिन, लगभग साढ़े चार माह का समय बीत चुका है और अब तक इंच भर भी काम नहीं हुआ है। इस बारे में नगर आयुक्त ने एटूजेड के मुख्य प्रबंधक को भेजे गए पत्र में स्थिति को गंभीर बताया है। कहा है कि कूड़ा प्रोसेसिंग का कार्य जल्द शुरू कराया जाए। साथ ही, कूड़ा डंपिंग के लिए प्लांट परिसर की जमीन वैज्ञानिक पद्धति से तैयार कराई जाए ताकि डंप कूड़े का जमीन में रिसाव न होने पाए। प्रदूषण रोकने के उपायों पर ध्यान न दिए जाने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
विज्ञापन