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अमृत को विषपान और उमंग पर मेहरबान
Updated Sat, 04 Aug 2018 02:48 AM IST
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वाराणसी। जरुरतमंदों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए शुरू अमृत फार्मेसी को बीएचयू में विषपान कराया जा रहा है जबकि मंहगी दवाएं बेच रही उमंग फार्मेसी पर प्रशासन पूरी तरह से मेहरबान है। डेढ़ साल पहले शुरू अमृत फार्मेसी के विस्तार का कोई प्रयास नहीं किया गया है। यही कारण है कि सस्ती दवाओं वाला यह स्टोर एक ही जगह पर सीमित रखा गया। दूसरी ओर उमंग फार्मेसी ने अपना दायरा बढ़ाया और छह मंजिल वाले अस्पताल से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक में शाखाएं खोल दीं।
बीएचयू अस्पताल में हर दिन ओपीडी में पांच से सात हजार मरीज आते हैं। इसमें औसतन 100-200 मरीजों को भर्ती किया जाता है। सभी को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर बीएचयू में स्वास्थ्य मंत्रालय ने डेढ़ साल पहले अमृत फार्मेसी खोली। यहां दवाओं के साथ-साथ इलाज में प्रयोग होने वाले उपकरणों पर सभी मरीजों को 75 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रावधान है। बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन निहित स्वार्थों के कारण मंत्रालय की ओर से खोली गई अमृत फार्मेसी को लेकर उदासीन बना हुआ है। इसका खामियाजा यहां आने वाले गरीब, असहाय और जरुरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ता है। अमृत फार्मेसी की सुलभ उपलब्धता नहीं होने के कारण मरीज और उनके परिजनों को मजबूरन मंहगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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बीएचयू अस्पताल में हर दिन ओपीडी में पांच से सात हजार मरीज आते हैं। इसमें औसतन 100-200 मरीजों को भर्ती किया जाता है। सभी को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर बीएचयू में स्वास्थ्य मंत्रालय ने डेढ़ साल पहले अमृत फार्मेसी खोली। यहां दवाओं के साथ-साथ इलाज में प्रयोग होने वाले उपकरणों पर सभी मरीजों को 75 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रावधान है। बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन निहित स्वार्थों के कारण मंत्रालय की ओर से खोली गई अमृत फार्मेसी को लेकर उदासीन बना हुआ है। इसका खामियाजा यहां आने वाले गरीब, असहाय और जरुरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ता है। अमृत फार्मेसी की सुलभ उपलब्धता नहीं होने के कारण मरीज और उनके परिजनों को मजबूरन मंहगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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