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धरोहर बचाने के लिए साधु-संतों का शंखनाद0
Updated Tue, 08 May 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। असि संगम से शंख, डमरू और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ मंदिरों को बचाने के लिए सोमवार को जन आंदोलन शुरू हुआ। विकास के नाम पर काशी की धरोहरों, सैकड़ों साल पुराने मंदिरों और देव विग्रहों को क्षत-विक्षत करने के विरोध में साधु-संतों, बटुकों और आम नागरिकों ने पैदल मार्च निकाला। मार्च वरुणा के संगम पर समाप्त हुआ। मंगलवार से रोजाना आठ दिनों तक अलग-अलग घाटों पर विविध समुदाय के लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन होगा। 16 मई से काशी यात्रा शुरू होगी और समापन 29 मई को होगा।
मंदिर बचाओ आंदोलनम् की शुरुआत करते हुए श्री विद्यामठ के प्रभारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि काशी में आस्था पर कुठाराघात किया जा रहा है। काशी के उन पौराणिक मंदिरों, जिनकी वर्षों से पूजा-अर्चना हो रही है, सौ करोड़ सनातनधर्मियों की आस्था के केंद्र हैं। उन्हें विकास के नाम पर ध्वस्त करने के साथ ही मलबा बनाकर फेंकने की कोशिश की जा रही है। कहा, काशी के नागरिक और साधु-संत ऐसा नहीं होने देंगे।
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मंदिर बचाओ आंदोलनम् की शुरुआत करते हुए श्री विद्यामठ के प्रभारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि काशी में आस्था पर कुठाराघात किया जा रहा है। काशी के उन पौराणिक मंदिरों, जिनकी वर्षों से पूजा-अर्चना हो रही है, सौ करोड़ सनातनधर्मियों की आस्था के केंद्र हैं। उन्हें विकास के नाम पर ध्वस्त करने के साथ ही मलबा बनाकर फेंकने की कोशिश की जा रही है। कहा, काशी के नागरिक और साधु-संत ऐसा नहीं होने देंगे।
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