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गौरवशाली इतिहास रहा है 9 गोरखा रायफल का
Updated Sun, 12 Nov 2017 02:06 AM IST
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वाराणसी। 9 गोरखा रायफल का इतिहास बेहद ही गौरवशाली रहा है। गोरखा रायफल के खाते में एक दर्जन से अधिक वीरता पुरस्कार आए हैं। आर्मी चीफ जनरल विपिन रावत ने शुक्रवार को 9 गोरखा रायफल के दो सौ पूरे होने पर जीटीसी में आयोजित समारोह में कहा कि वह खुद गोरखा रायफल के समारोह में शामिल होकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। 9 जीआर के जवानों को अदम्य साहस के लिए एक अशोक चक्र, 5 परम विश्व सेवा पदक, 5 महावीर चक्र, 3 कीर्ति चक्र, 6 अति विश्वसेवा पदक, 17 वीर चक्र, 7 शौर्य चक्र, 13 सेना पदक, 14 विश्व सेवा पदक शिशु सम्मान प्रदान किया गया है।
9 गोरखा रेजीमेंट 1817 में अंग्रेजों ने बनाई थी। 1 9 47 में त्रिपक्षीय समझौते के तहत स्वतंत्रता के बाद ये भारतीय सेना का हिस्सा बनी। 9 गोरखा रायफल सेना के सात गोरखा रेजीमेंटों में से एक है। 1 जीआर, 3 जीआर, 4 जीआर, 5 जीआर (एफएफ), 8 जीआर और 11 जीआर भी गोरखा रेजीमेंट का हिस्सा है। गोरखा जवानों ने प्रथम और विश्व युद्ध में भी अंग्रेजी हुकूमत के लिए जंग लड़ी थी और बहादुरी का परिचय दिया था। द्वितीय विश्व युद्ध में रेजिमेंट की बटालियन मलाया, इटली और उत्तरी अफ्रीका में लड़ी।
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9 गोरखा रेजीमेंट 1817 में अंग्रेजों ने बनाई थी। 1 9 47 में त्रिपक्षीय समझौते के तहत स्वतंत्रता के बाद ये भारतीय सेना का हिस्सा बनी। 9 गोरखा रायफल सेना के सात गोरखा रेजीमेंटों में से एक है। 1 जीआर, 3 जीआर, 4 जीआर, 5 जीआर (एफएफ), 8 जीआर और 11 जीआर भी गोरखा रेजीमेंट का हिस्सा है। गोरखा जवानों ने प्रथम और विश्व युद्ध में भी अंग्रेजी हुकूमत के लिए जंग लड़ी थी और बहादुरी का परिचय दिया था। द्वितीय विश्व युद्ध में रेजिमेंट की बटालियन मलाया, इटली और उत्तरी अफ्रीका में लड़ी।
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