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खटारा बसों के टूटे शीशें से बढ़ी यात्रियों की मुश्किलें
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वाराणसी। परिवहन निगम की बसों के सहारे सफर करने जा रहे हैं तो रुकिए। ठीक से गर्म कपड़े और कान ढकने की व्यवस्था कर लीजिए, क्योंकि हो सकता है कि बस में आपको ऐसी सीट पर बैठना पड़े जिसके शीशे टूटे हों। जी हां परिवहन निगम की कई बसों के शीशें टूटे हुए हैं, जिसका संचालन कराया जा रहा है।
निगम रेलवे की तर्ज पर अपने यात्रियों को भी सुविधा देने के लिये व्यवस्था सुनिश्चित कराने का दावा करता है। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं दिखता। वजह डिपो परिसर में सुविधाएं भगवान भरोसे हैं। बसों में तो बहुत की हालत ऐसी है कि उसे देखने पर ऐसा लगता है कि वह बीच रास्ते में कहां दगा दे जाए का कोई भरोसा नहीं। इस समय भी बसों के शीशे टूटे हुए दिख रहे हैं, जबकि इसके लिए सख्त निर्देश है कि बिना गाड़ी की लाइट, शीशे सही हुए डिपो से बस बाहर नहीं निकलेगी। बावजूद इसके कई बसों में यात्री सीट की बगल लगे दो शीशे में एक टूटे दिख रहे हैं। जिससे इन सीटों के आसपास बैठने वाले यात्रियों को भी ठंड में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नियमानुसार बसें वर्कशाप से धुलने के बाद ही बाहर आनी चाहिए, मगर अधिकांश बसें बिना सफाई के ही फर्राटा भर रही है। ऐसा इस लिए कहना पड़ रहा है कि अधिकांश बसों की सीटों पर धूल जमा रहती है। जहां बैठने से पहले यात्रियों को सफाई करनी पड़ती है।
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परिवहन निगन की विभिन्न रुटों पर 580 बसें संचालित होती हैं। इनमें 78 अनुबंधित बसें भी शामिल हैं। ये बसें प्रतिदिन लखनऊ, प्रयागराज, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, दिल्ली, चंदौली, विंध्याचल, सोनभद्र आदि रुटों पर संचालित की जाती हैं।
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निगम रेलवे की तर्ज पर अपने यात्रियों को भी सुविधा देने के लिये व्यवस्था सुनिश्चित कराने का दावा करता है। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं दिखता। वजह डिपो परिसर में सुविधाएं भगवान भरोसे हैं। बसों में तो बहुत की हालत ऐसी है कि उसे देखने पर ऐसा लगता है कि वह बीच रास्ते में कहां दगा दे जाए का कोई भरोसा नहीं। इस समय भी बसों के शीशे टूटे हुए दिख रहे हैं, जबकि इसके लिए सख्त निर्देश है कि बिना गाड़ी की लाइट, शीशे सही हुए डिपो से बस बाहर नहीं निकलेगी। बावजूद इसके कई बसों में यात्री सीट की बगल लगे दो शीशे में एक टूटे दिख रहे हैं। जिससे इन सीटों के आसपास बैठने वाले यात्रियों को भी ठंड में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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नियमानुसार बसें वर्कशाप से धुलने के बाद ही बाहर आनी चाहिए, मगर अधिकांश बसें बिना सफाई के ही फर्राटा भर रही है। ऐसा इस लिए कहना पड़ रहा है कि अधिकांश बसों की सीटों पर धूल जमा रहती है। जहां बैठने से पहले यात्रियों को सफाई करनी पड़ती है।
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परिवहन निगन की विभिन्न रुटों पर 580 बसें संचालित होती हैं। इनमें 78 अनुबंधित बसें भी शामिल हैं। ये बसें प्रतिदिन लखनऊ, प्रयागराज, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, दिल्ली, चंदौली, विंध्याचल, सोनभद्र आदि रुटों पर संचालित की जाती हैं।