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गूगल की नौकरी छोड़कर बन गईं साध्वी
Updated Tue, 27 Nov 2018 01:35 AM IST
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वाराणसी। धर्म संसद में हिस्सा ले रहीं साध्वी ब्रह्मवादिनी देवी स्कंद सबसे कम उम्र प्रतिनिधि हैं। गूगल की नौकरी और लाखों का सेलरी पैकेज छोड़कर वह साध्वी बनीं।
दिल्ली में पली बढ़ी देवी स्कंद एक बड़े कारोबारी की बेटी हैं। शुरू से ही इंगलिश मीडियम से पढ़ाई की। देवी स्कंद ने बताया कि पढ़ाई के दौरान वह माता-पिता के साथ मंदिरों और गुरुमाता के यहां आती जाती रहीं हैं। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम किया, फिर सीएस की पढ़ाई की। शिक्षा के बल पर ही गूगल जैसी कंपनी में नौकरी लगी। करीब एक साल तक नौकरी की। इस दौरान ही मां के साथ गुरु माता के यहां आईं। उनके द्वारा ईश्वर को लेकर बताए गए मार्ग से बहुत प्रभावित हुईं। घर में जब वैराग्य लेने की बात कही तो मां तो मान गई, लेकिन पिता को मनाना मुश्किल था। लेकिन गुरु माता के आदेश से फैसला अटल हो गया था। मेरी इच्छा को देखते हुए पिता और भाई ने भी अनुमति दे दी। इसके बाद मैं गुरु माता आशुतोशांवरी की शरण में गोरखपुर के मुंडेरवा स्थित परब्रह्म संयोज्य शरणमेमि आश्रम आ गई। वहां मेरा नाम ब्रह्मवादिनी देवी स्कंद पड़ा।
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दिल्ली में पली बढ़ी देवी स्कंद एक बड़े कारोबारी की बेटी हैं। शुरू से ही इंगलिश मीडियम से पढ़ाई की। देवी स्कंद ने बताया कि पढ़ाई के दौरान वह माता-पिता के साथ मंदिरों और गुरुमाता के यहां आती जाती रहीं हैं। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम किया, फिर सीएस की पढ़ाई की। शिक्षा के बल पर ही गूगल जैसी कंपनी में नौकरी लगी। करीब एक साल तक नौकरी की। इस दौरान ही मां के साथ गुरु माता के यहां आईं। उनके द्वारा ईश्वर को लेकर बताए गए मार्ग से बहुत प्रभावित हुईं। घर में जब वैराग्य लेने की बात कही तो मां तो मान गई, लेकिन पिता को मनाना मुश्किल था। लेकिन गुरु माता के आदेश से फैसला अटल हो गया था। मेरी इच्छा को देखते हुए पिता और भाई ने भी अनुमति दे दी। इसके बाद मैं गुरु माता आशुतोशांवरी की शरण में गोरखपुर के मुंडेरवा स्थित परब्रह्म संयोज्य शरणमेमि आश्रम आ गई। वहां मेरा नाम ब्रह्मवादिनी देवी स्कंद पड़ा।
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