{"_id":"5a4163144f1c1bce6d8b622c","slug":"51514234644-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा चाइनीज मंझा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा चाइनीज मंझा
Updated Tue, 26 Dec 2017 02:14 AM IST
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वाराणसी। आदमपुर थाना अंतर्गत कज्जाकपुरा स्थित आरडीएच कॉलोनी निवासी मृत्युंजय दास रविवार को भदऊं चुंगी क्षेत्र में बाइक से दूध लेने जा रहे थे। इसी दौरान चाइनीज मांझा गले में फंसा। उसे हटाने के दौरान उनका हाथ जख्मी हो गया और अनियंत्रित होकर मृत्युंजय सड़क पर गिर पड़े। मृत्युंजय के हाथ में आठ टांके लगाने पड़े।
घर के अकेले कमाऊ सदस्य मृत्युंजय को अब लगभग दो हफ्ते कामकाज छोड़ कर बैठना होगा। अकेले मृत्युंजय प्रतिबंधित चाइनीज मंझे के शिकार नहीं हुए हैं। दिसंबर महीने में ही अब तक दर्जन भर से ज्यादा लोग और कई पक्षी इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। बावजूद इसके पुलिस और प्रशासन के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं और चाइनीज मंझे की धड़ल्ले से बिक्री जारी है।
खिचड़ी नजदीक आते ही पतंगबाजी का दौर अपने शबाब पर है। पतंग और मंझे की बिक्री बढ़ गई है। देशी मंझे की तुलना में चाइनीज मंझा सस्ता और मजबूत होने के कारण इसकी बिक्री ज्यादा होती है। चाइनीज मंझा कांच और धातु के बुरादे के साथ ही लोहे और केमिकल के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसके चलते यह बेहद खतरनाक होता है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी और सरकार की ओर इसकी बिक्री पर रोक लगाई गई है। मगर, प्रतिबंध के बावजूद शहर के दालमंडी, हड़हा सराय, नई सड़क सहित शहर के अन्य इलाकों में चाइनीज मंझे की बिक्री जारी है।
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जिलाधिकारी की ओर से भी कई बार अभियान चलाकर चाइनीज मंझे की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया लेकिन प्रशासनिक मजिस्ट्रेटों और थानेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। नतीजतन, रोजाना लोग चाइनीज मंझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। सोमवार को फिर डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने मजिस्ट्रेटों और थानेदारों को निर्देश दिया है कि अभियान चलाकर चाइनीज मंझा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इस संबंध में शिथिलता बरतने पर थानेदार और प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई की जद में आएंगे।
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घर के अकेले कमाऊ सदस्य मृत्युंजय को अब लगभग दो हफ्ते कामकाज छोड़ कर बैठना होगा। अकेले मृत्युंजय प्रतिबंधित चाइनीज मंझे के शिकार नहीं हुए हैं। दिसंबर महीने में ही अब तक दर्जन भर से ज्यादा लोग और कई पक्षी इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। बावजूद इसके पुलिस और प्रशासन के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं और चाइनीज मंझे की धड़ल्ले से बिक्री जारी है।
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खिचड़ी नजदीक आते ही पतंगबाजी का दौर अपने शबाब पर है। पतंग और मंझे की बिक्री बढ़ गई है। देशी मंझे की तुलना में चाइनीज मंझा सस्ता और मजबूत होने के कारण इसकी बिक्री ज्यादा होती है। चाइनीज मंझा कांच और धातु के बुरादे के साथ ही लोहे और केमिकल के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसके चलते यह बेहद खतरनाक होता है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी और सरकार की ओर इसकी बिक्री पर रोक लगाई गई है। मगर, प्रतिबंध के बावजूद शहर के दालमंडी, हड़हा सराय, नई सड़क सहित शहर के अन्य इलाकों में चाइनीज मंझे की बिक्री जारी है।
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जिलाधिकारी की ओर से भी कई बार अभियान चलाकर चाइनीज मंझे की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया लेकिन प्रशासनिक मजिस्ट्रेटों और थानेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। नतीजतन, रोजाना लोग चाइनीज मंझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। सोमवार को फिर डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने मजिस्ट्रेटों और थानेदारों को निर्देश दिया है कि अभियान चलाकर चाइनीज मंझा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इस संबंध में शिथिलता बरतने पर थानेदार और प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई की जद में आएंगे।