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कई मायनों में महत्वपूर्ण होगा पीएम मोदी का दौरा
Updated Thu, 12 Jul 2018 02:32 AM IST
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वाराणसी। दो दिन। सांगठनिक दृष्टि से भाजपा के दो क्षेत्र। तीन कमिश्नरी और तीन दलों के सांसद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 14-15 जुलाई को पूर्वांचल दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। दौरे में स्वच्छ भारत अभियान और इज्जत घरों से गांवों की बेहतरी और हाल में बढ़ाए गए फसलों समर्थन मूल्य के साथ-साथ विकास कार्यों पर फोकस करने के साथ-साथ पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को मिशन 2019 में भागीदारी के लिए तैयार किया जाएगा। तीनों जनसभाएं ग्रामीण क्षेत्र में होनी हैं। 2014 में बतौर पीएम दावेदार मोदी ने तीनों मंडल की 12 सीटों में से वाराणसी, आजमगढ़, लालगंज, गाजीपुर, मऊ और बलिया के ग्रामीण क्षेत्रों में ही सभाएं की थीं।
सपा-बसपा गठबंधन के बाद घोषित तौर पर कार्यक्रम भले ही चुनावी शंखनाद न हों पर मतदाताओं को सपा सुप्रीमो रहे मुलायम सिंह की संसदीय सीट आजमगढ़ को इस बार हर हाल हासिल करने और अपना दल (एस) के साथ गठबंधन को और मजबूती करने के अलावा पीएम मोदी द्वारा चार साल में अपने संसदीय क्षेत्र में कराए गए कार्यों का हिसाब-किताब देकर वाराणसी से ही दोबारा चुनाव लड़ने का संकेत दिया जाएगा। दो दिन का दौरा उन क्षेत्रों-जिलों में नहीं रखा गया है, जहां के कुछ मौजूदा सांसदों का टिकट कटने की अटकलें हैं।
पीएम मोदी के दौरे से पहले चार जुलाई को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मिर्जापुर दौरे में साफ कर चुके हैं कि स्थानीय सांसद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ गठबंधन को और सशक्त करेंगे। समझा जा रहा है कि सुभासपा अध्यक्ष और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर की नाराजगी को मंत्रिमंडल विस्तार में कम करने की कोशिश की जाएगी। 2017 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ को छोड़ दें तो तीनों मंडल की 61 सीटों के नतीजों ने साबित कर दिया है कि पूर्वांचल में अद (एस) और सुभासपा के साथ गठबंधन का शाह का प्रयोग कारगर रहा है।
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सपा-बसपा गठबंधन के बाद घोषित तौर पर कार्यक्रम भले ही चुनावी शंखनाद न हों पर मतदाताओं को सपा सुप्रीमो रहे मुलायम सिंह की संसदीय सीट आजमगढ़ को इस बार हर हाल हासिल करने और अपना दल (एस) के साथ गठबंधन को और मजबूती करने के अलावा पीएम मोदी द्वारा चार साल में अपने संसदीय क्षेत्र में कराए गए कार्यों का हिसाब-किताब देकर वाराणसी से ही दोबारा चुनाव लड़ने का संकेत दिया जाएगा। दो दिन का दौरा उन क्षेत्रों-जिलों में नहीं रखा गया है, जहां के कुछ मौजूदा सांसदों का टिकट कटने की अटकलें हैं।
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पीएम मोदी के दौरे से पहले चार जुलाई को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मिर्जापुर दौरे में साफ कर चुके हैं कि स्थानीय सांसद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ गठबंधन को और सशक्त करेंगे। समझा जा रहा है कि सुभासपा अध्यक्ष और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर की नाराजगी को मंत्रिमंडल विस्तार में कम करने की कोशिश की जाएगी। 2017 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ को छोड़ दें तो तीनों मंडल की 61 सीटों के नतीजों ने साबित कर दिया है कि पूर्वांचल में अद (एस) और सुभासपा के साथ गठबंधन का शाह का प्रयोग कारगर रहा है।
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