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वीडीए की नींद टूटी, दो अवैध निर्माण सील

Tue, 23 Jan 2018 02:40 AM IST
Updated Tue, 23 Jan 2018 02:40 AM IST
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वीडीए की नींद टूटी, दो अवैध निर्माण सील
वाराणसी। शहर के पॉश इलाके महमूरगंज और इसके साथ ही घसियारी टोला में किए जा रहे अवैध निर्माण पर सोमवार को वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की नींद टूट गई। वीडीए ने इस बहुमंजिला इमारत को सील कर दिया है। वीडीए की इस कार्रवाई से अवैध निर्माण कराने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। इस मामले में पास कराए गए नक्शे से एक मंजिल अधिक निर्माण करा लिया गया था।
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शहर में धड़ल्ले से जारी अवैध निर्माण की खबर को अमर उजाला ने सोमवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद वीडीए उपाध्यक्ष और सचिव के निर्देश पर अधिकारियों-कर्मचारियों ने 10वीं मंजिल को सील कर दिया। वीडीए के तहसीलदार और जोनल अधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि दशाश्वमेध वार्ड के महमूरगंज में बिल्डर अनुज डिडवानिया ने ग्राउंड फ्लोर केसाथ नौ मंजिल का नक्शा पास कराया था। बाद में चोरी-छिपे एक और मंजिल का निर्माण करा लिया गया था। इसी तरह कोतवाली वार्ड के घसियारी टोला में अन्नपूर्णा देवी की ओर से नक्शा पास कराए बगैर के ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार मंजिला भवन का निर्माण कराया जा रहा था। इन्हें भी सील कर दिया गया।
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100 से अधिक नोटिस, फिर कार्रवाई नहीं
वीडीए की सीमा में अवैध निर्माण होने, शिकायत पहुंचने और फिर नोटिस देकर सील करने का खेल लंबे समय से चल रहा है। नक्शे के विपरीत निर्माण होने पर उच्चाधिकारी से शिकायत होने पर ही वीडीए कार्रवाई करता है। अब तक 100 से अधिक मामलों में वीडीए नोटिस जारी कर चुका है। हालांकि इसके बाद फिर चुप्पी साध ली जाती है।
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सूत्रों का कहना है कि सभी जोन और वार्डों में अवैध निर्माण चल रहे हैं। इसमें कई ऐसे हैं, जहां बेसमेंट का निर्माण कराया जा रहा है। क्षेत्रीय अभियंताओं, जोनल अधिकारियों और भवन स्वामियों की मिलीभगत से बिना नक्शा पास कराए निर्माण हो रहा है। मैदागिन चौराहे के आसपास और विशेश्वरगंज मंडी में भी अवैध ढंग से बेसमेंट संचालित हैं। उनमें पार्किंग की जगह का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह शहर केसघन इलाके बांस फाटक पर एक बड़े कारोबारी के यहां बने बेसमेंट में व्यवसाय किया जा रहा है। लहुराबीर इलाके में कई बेसमेंट में दुकानें संचालित हैं।
मंडलायुक्त न्यायालय के बाबू ने ही दबा रखी थी फाइल
दालमंडी जैसे सघन इलाके में अवैध ढंग से बेसमेंट के निर्माण मामले की परत लगातार खुलती जा रही हैं। पता चला है कि बेसमेंट बनाने वाले भवन स्वामी के रिश्तेदार और मंडलायुक्त न्यायालय में बाबू ने तीन साल से मामले की फाइल दबा रखी थी।
अहम बात यह है कि फाइल के बारे में न तो वीडीए ने चिंता की और न ही मंडलायुक्त ने इसका संज्ञान लिया। जानकारों की मानें तो आरोपी और बाबू की रिश्तेदारी के बारे में अधिकारियों को पूरी जानकारी थी। अब सच्चाई सामने आने के बाद अफसरों की अनदेखी के कारण बाबू पर कार्रवाई होना तो दूर मामले में उसकी भूमिका को भी संदिग्ध नहीं माना गया है। खुलासा होने केबाद बाबू छुट्टी पर चला गया है।
अतिक्रमण-अवैध निर्माण हटाने के लिए फोर्स की कमी नहीं
अतिक्रमण हटाने, अवैध ढंग से निर्मित बेसमेंट की शिनाख्त करने में फोर्स की कमी के सवाल और आरोप पर एसएसपी ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि वीडीए, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी अतिक्रमण और अवैध निर्माण को चिह्नित करने के बाद हमें बता दें कि कब कार्रवाई करनी है। संबंधित विभागों को जहां भी जरूरत होगी, फोर्स मुहैया करा दी जाएगी।

वीडीए के अधिकारियों का आरोप है कि अवैध निर्माण के सर्वे और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान पुलिस बल न उपलब्ध रहने से दिक्कतें आती हैं। इस पर एसएसपी ने कहा कि सर्वे के लिए सामान्य तौर पर फोर्स की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, कुछ क्षेत्रों की संवेदनशीलता के आधार पर यदि सर्वे करने के लिए भी फोर्स मांगी जाएगी तो हर हाल में उपलब्ध कराएंगे। वीवीआईपी ड्यूटी और शांति व कानून व्यवस्था के चलते कभी-कभार फोर्स उपलब्ध कराने में अड़चन आ जाती है लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता।
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