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कहत सप्रेम नाइ महि माथा। भरत प्रनाम करत रघुनाथा।।
Updated Sat, 06 Oct 2018 02:17 AM IST
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रामनगर। तीर्थराज प्रयाग को प्रणाम कर भरत जी चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। इधर, भगवान राम का भी मन भ्राता भरत की याद कर अधीर हो उठता है। तभी इंद्रदेव देवताओं से कहते हैं कि ऐसा उपाय करो कि भरत का राम से मिलन न होने पाए। यह सुन बृहस्पति उन्हें समझाते हैं कि सारा जग भगवान श्रीराम को जपता है। भगवान राम-भरत जी की भक्ति परम पवित्र है, जो छल करेगा वह श्रीराम की क्रोधाग्नि से भस्म हो जाएगा।
रामनगर की श्रीराम लीला के बारहवें दिन शुक्रवार को भरत का यमुनावतरण, ग्रामवासी मिलन, श्रीराम दर्शन आदि की लीलाएं हुईं। सगरा पोखरा और रामबाग पोखरा स्थित चित्रकूट में बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं ने लीला का आनंद लिया।
लीला आगे बढ़ती है और भरत जी यमुना तट पर पहुंचते हैं। निषाद राज नाव लेकर पहुंचते हैं और सभी को नदी पार कराते हैं। उधर, श्रीराम स्नान कर शंकर जी की पूजा करते हैं तभी उत्तर दिशा की ओर देखते हैं कि आकाश में धूल उड़ रही है और पशु-पक्षी भाग रहे हैं। कोल भील कहते हैं हे स्वामी आप के दोनों भाई आ रहे हैं। इधर, भरत जी आश्रम के समीप पहुंचते हैं।
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भरत को सेना के साथ चित्रकूट में आने की बात सुनकर एक बार राम भी सोच में पड़ गए। ऊपर से लक्ष्मण का विश्वास भी डगमगा उठा, लेकिन उसी समय आकाशवाणी हुई और सभी का संदेह दूर हो गया। राम को देखकर भरत पाहिंनाथ कहकर भूमि पर गिर पड़े तो भगवान राम ने दौड़कर उन्हें उठाकर गले से लगा लिया। दोनों भाइयों की आंखों से आंसुओं की धार फूट पड़ती है। यह देख लक्ष्मण भी अपने आंसू रोक नहीं पाते। जिसे देखकर लीला प्रेमियों की आंखें छलक उठीं।
राम सबको अपनी कुटिया में ले जाकर भोजन कराते हैं। उसके बाद सभी विश्राम करते हैं लेकिन भरत को नींद नहीं आती। वे सोचते हैं कि राम अयोध्या लौटेंगे या नहीं। गुरू वशिष्ठ उन्हें इसके लिए कहेंगे या नहीं। सोचते- सोचते रात बीत जाती है। यहीं पर भगवान की आरती के बाद लीला को विश्राम दिया गया।
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रामनगर की श्रीराम लीला के बारहवें दिन शुक्रवार को भरत का यमुनावतरण, ग्रामवासी मिलन, श्रीराम दर्शन आदि की लीलाएं हुईं। सगरा पोखरा और रामबाग पोखरा स्थित चित्रकूट में बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं ने लीला का आनंद लिया।
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लीला आगे बढ़ती है और भरत जी यमुना तट पर पहुंचते हैं। निषाद राज नाव लेकर पहुंचते हैं और सभी को नदी पार कराते हैं। उधर, श्रीराम स्नान कर शंकर जी की पूजा करते हैं तभी उत्तर दिशा की ओर देखते हैं कि आकाश में धूल उड़ रही है और पशु-पक्षी भाग रहे हैं। कोल भील कहते हैं हे स्वामी आप के दोनों भाई आ रहे हैं। इधर, भरत जी आश्रम के समीप पहुंचते हैं।
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भरत को सेना के साथ चित्रकूट में आने की बात सुनकर एक बार राम भी सोच में पड़ गए। ऊपर से लक्ष्मण का विश्वास भी डगमगा उठा, लेकिन उसी समय आकाशवाणी हुई और सभी का संदेह दूर हो गया। राम को देखकर भरत पाहिंनाथ कहकर भूमि पर गिर पड़े तो भगवान राम ने दौड़कर उन्हें उठाकर गले से लगा लिया। दोनों भाइयों की आंखों से आंसुओं की धार फूट पड़ती है। यह देख लक्ष्मण भी अपने आंसू रोक नहीं पाते। जिसे देखकर लीला प्रेमियों की आंखें छलक उठीं।
राम सबको अपनी कुटिया में ले जाकर भोजन कराते हैं। उसके बाद सभी विश्राम करते हैं लेकिन भरत को नींद नहीं आती। वे सोचते हैं कि राम अयोध्या लौटेंगे या नहीं। गुरू वशिष्ठ उन्हें इसके लिए कहेंगे या नहीं। सोचते- सोचते रात बीत जाती है। यहीं पर भगवान की आरती के बाद लीला को विश्राम दिया गया।