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असि नदी के तट पर बीएचयू के कैडेट्स ने चलाया फावड़ा
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:07 AM IST
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वाराणसी। काशी की पहचान असि नदी के कायाकल्प के लिए अब हाथ से हाथ जुड़ने लगे हैं। सोमवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर से एनसीसी कैडेट्स ने बैनर, पोस्टर और तख्तियों के जरिए असि के पुनर्जीवन के लिए जागरूकता का संदेश दिया। कैड्ट्स ने नदी के तट पर फावड़ा चलाकर सिल्ट की सफाई की। श्रमदान करने वाले कैडेट्स का कहना था कि असि को आसानी से बचाया जा सकता है, बशर्ते लोग घर-घर से निकलने की इच्छाशक्ति पैदा करें।
दोपहर करीब दो बजे के बाद सैकड़ों की तादाद में एनसीसी कैडेट्स पोस्टर, बैनर के साथ असि नदी के तट पर पहुंचे। तमाम कैडे्ट्स हाथों में असि नदी की रक्षा से जुड़े स्लोगनों वाली प्रेरक तख्तियां लिए हुए थे। रवींद्रपुरी पुलिया के पास पहुंचे कैडेट्स ने फावड़ा चलाकर सिल्ट निकाली। बीएचयू में यूपी, उत्तराखंड के शिविरों से आए एनसीसी के कैड्ट्स उत्साह से भरे थे। उनका कहना था कि असि वाराणसी शहर की पहचान है। असि नहीं होगी तो वाराणसी के मायने नहीं होंगे। ऐसे में इस नदी को बचाने के लिए लोगों को पूरी ताकत से एकजुट होकर आगे आना चाहिए। असि नदी मुक्ति अभियान, यमुना मिशन के भी कार्यकर्ताओं ने असि के तट पर श्रमदान किया। नदी के तटों से अतिक्त्रस्मण हटाने और चौड़ाई बढ़ाने के लिए अभियान कर्मी लगातार प्रयास कर रहे हैं।
उधर, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के सलाहकार और सेवा निवृत्त डीजी (नागरिक सुरक्षा) आरएन सिंह ने कहा कि असि नदी को जनभागीदारी के बल पर बचाने के लिए अभियान तेज हो गया है। लोग लगातार असि नदी मुक्ति अभियान से जुड़ रहे हैं। यह असि के पुनर्जीवन के लिए बेहद सकारात्मक पहल है। जल्द ही असि नदी को अतिक्त्रस्मण मुक्त कराने के लिए सरकार से सहयोग से अभियान चलेगा।
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दोपहर करीब दो बजे के बाद सैकड़ों की तादाद में एनसीसी कैडेट्स पोस्टर, बैनर के साथ असि नदी के तट पर पहुंचे। तमाम कैडे्ट्स हाथों में असि नदी की रक्षा से जुड़े स्लोगनों वाली प्रेरक तख्तियां लिए हुए थे। रवींद्रपुरी पुलिया के पास पहुंचे कैडेट्स ने फावड़ा चलाकर सिल्ट निकाली। बीएचयू में यूपी, उत्तराखंड के शिविरों से आए एनसीसी के कैड्ट्स उत्साह से भरे थे। उनका कहना था कि असि वाराणसी शहर की पहचान है। असि नहीं होगी तो वाराणसी के मायने नहीं होंगे। ऐसे में इस नदी को बचाने के लिए लोगों को पूरी ताकत से एकजुट होकर आगे आना चाहिए। असि नदी मुक्ति अभियान, यमुना मिशन के भी कार्यकर्ताओं ने असि के तट पर श्रमदान किया। नदी के तटों से अतिक्त्रस्मण हटाने और चौड़ाई बढ़ाने के लिए अभियान कर्मी लगातार प्रयास कर रहे हैं।
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उधर, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के सलाहकार और सेवा निवृत्त डीजी (नागरिक सुरक्षा) आरएन सिंह ने कहा कि असि नदी को जनभागीदारी के बल पर बचाने के लिए अभियान तेज हो गया है। लोग लगातार असि नदी मुक्ति अभियान से जुड़ रहे हैं। यह असि के पुनर्जीवन के लिए बेहद सकारात्मक पहल है। जल्द ही असि नदी को अतिक्त्रस्मण मुक्त कराने के लिए सरकार से सहयोग से अभियान चलेगा।
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