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सोनभद्र हिंसा: 26 घंटे बाद प्रियंका गांधी का धरना खत्म, बोलीं- मेरा मकसद पूरा हुआ

Sat, 20 Jul 2019 05:15 PM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 20 Jul 2019 05:15 PM IST
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3 ASP 5 CO and 12 inspectors to stop the way of Priyanka gandhi
प्रियंका गांधी से मिलतीं उभ्भा गांव की महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

सोनभद्र जिले के उभ्भा गांव में हुए नरसंहार में मृतकों के परिजनों से मिलने जा रहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को पुलिस ने शुक्रवार को रोका लिया था। जिसके बाद प्रियंका गांधी धरने पर बैठ गई थीं। इसी दौरान शनिवार को पीड़ित परिवार की 5 महिलाएं प्रियंका गांधी से मिलने चुनार पहुंचीं। प्रियंका गांधी ने पीड़ितों की तकलीफ सुनकर उन्हें ढांढस बंधाया। साथ ही कमरे में पीड़ितों के साथ बैठक की। 

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बैठक के बाद पीड़ितों के साथ बाहर आईं प्रियंका गांधी ने कहा कि मेरा मकसद पूरा हुआ और हमारी कुछ मांगे हैं। 25 लाख मुआवजा दिया जाए, मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए, पीड़ितों को जमीन का मालिकाना हक मिले और निर्दोषों पर किए गए झूठे मुकदमे वापस लिया जाए। कांग्रेस भी पीड़ितों की आर्थिक मदद करेगी। 
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इसके पहले प्रियंका गांधी चुनार किले में पेड़ के नीचे धरने पर बैठी थीं। इसी दौरान प्रियंका गांधी से मिलने आए पीड़ितों के रिश्तेदारों को पुलिस ने किले के नीचे रोका तो प्रियंका गांधी खुद उनसे मिलने जाने लगी थीं। इस पर पुलिस ने प्रियंका को भी रोका था। इसी बात पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ झड़प भी हुई।

उधर, सोनभद्र के डीएम अंकित अग्रवाल ने कहा कि उभ्भा गांव की स्थिति बेहद संवेदनशील है। इसलिए पूरे जिले में धारा 144 लागू की गई है। जिले में राजनीतिक दलों के साथ ही सामाजिक संगठनों का प्रवेश वर्जित किया गया है।

डीएम ने कहा कि मेरा अनुरोध है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने में मदद करें। जितनी जल्दी स्थिति सामान्य हो जाएगी, उतनी ही जल्दी धारा 144 हटा दिया जाएगा। उभ्भा गांव में अभी भी पुलिस फोर्स तैनात है और अब तक इस हत्याकांड से जुड़े 29 लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।

शुक्रवार को पहुंचीं प्रियंका को नरायणपुर से पहले रामनगर में टेंगरा मोड़ पर ही रोकने की तैयारी थी। इसके मद्देनजर उनके आगमन से लगभग डेढ़ घंटे पहले ही डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी आनंद कुलकर्णी भारी पुलिस बल के साथ बीएचयू ट्रामा सेंटर पहुंच गए थे। 

टेंगरा मोड़ पर प्रियंका का काफिला रोकने में सफलता नहीं मिली तो तीन एडिशनल एसपी, पांच सीओ और 12 थानेदारों के अलावा पुलिस लाइन से आई फोर्स ने नरायणपुर चौकी के सामने मिर्जापुर पुलिस के साथ नाकाबंदी की। 

प्रियंका का काफिला नरायणपुर पुलिस चौकी के सामने पहुंचा तो भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग देखकर एसपीजी के अधिकारियों ने उनका वाहन रोक दिया। इसके साथ ही एसपीजी के अधिकारियों ने अपने हेडक्वार्टर को प्रियंका को रोके जाने की जानकारी दी। 

आगे बढ़ने से रोके जाने पर प्रियंका सड़क पर धरने पर बैठ गईं तो एसपीजी ने उन्हें घेर लिया। प्रियंका तीखी धूप में भी करीब एक घंटे तक सड़क पर ही बैठी रहीं। इस दौरान वाराणसी से सोनभद्र मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद रही। 

लगभग एक घंटे बाद प्रियंका अपने वाहन में सवार होकर फिर आगे बढ़ीं तो पुलिस ने दोबारा घेरेबंदी की और कांग्रेस नेताओं को सड़क पर से जबरन उठाकर नरायणपुर चौकी ले जाया गया। इसके बाद प्रियंका को उनके वाहन से उतार कर एसडीएम चुनार की गाड़ी में बैठाया गया और पुलिस अभिरक्षा में चुनार गेस्ट हाउस भेज दिया था।

3 ASP 5 CO and 12 inspectors to stop the way of Priyanka gandhi
धरने पर बैठे टीएमसी के नेता - फोटो : अमर उजाला

वहीं तृणमूल कांग्रेस के चार सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल को वाराणसी पुलिस ने वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे पर रोक दिया। यह प्रतिनिधिमंडल सोनभद्र में पीड़ितों के परिजनों से मिलने जा रहा था। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन कर रहे हैं। वहीं, टीएमसी के नेता पुलिस प्रशासन द्वारा रोके जाने पर नाराज हो कर एयरपोर्ट पर ही धरने पर बैठ गए।
 


वहीं, प्रियंका गांधी वाड्रा से मिलने जा रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजबब्बर को भी वाराणासी एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया।  राज बब्बर के साथ जीतिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, मुकुल वासनिक, राजीव शुक्ला, दीपेंद्र हुड्डा, प्रजानाथ शर्मा समेत कई कांग्रेसी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

वाराणसी के डीएम सुरेंद्र सिंह के पहुंचने के बाद सभी नेताओं को बीएचयू ट्रामा सेंटर घायलों से मिलने जाने की अनुमति मिली। फिर 12.50 बजे टीएमसी के तीनों सदस्य बीएचयू ट्रामा सेंटर के लिए रवाना हो गए। वहीं, दोपहर 1.05 बजे राज बब्बर, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह समेत सभी कांग्रेसी नेता भी बीएचयू ट्रामा सेंटर के लिए निकले।

यह भी पढ़ें : सोनभद्र पर सियासत गर्म, टीएमसी के नेताओं ने बीएचयू ट्रामा सेंटर में जाना घायलों का हाल, धरना जारी

राज्यपाल से मिले कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी

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राज्यपाल से मिलते प्रमोद तिवारी - फोटो : अमर उजाला

कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी नेतृत्व में शनिवार को सोनभद्र नरसंहार मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक से मिलकर पार्टी का प्रतिनिधिमंडल ने पत्रक सौंपा। प्रमोद तिवारी ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि प्रदेश सरकार नहीं चाहती कि कोई भी पीड़ितों के आंसू पोछे या उनका दर्द बांटे। उत्तर प्रदेश सरकार अपनी खामियों को छुपाने के लिए अघोषित इमरजेंसी लागू कर दिया है, जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है।

सोनभद्र में धारा 144 पर मायावती ने किया ट्वीट

वहीं, मायावती ने सोनभद्र हत्याकांड पर ट्वीट करते हुए कहा कि यूपी के सोनभद्र में आदिवासी समाज का उत्पीड़न व शोषण, उनकी जमीन से बेदखली व अब नरसंहार स्टेट भाजपा सरकार की कानून-व्यवस्था के मामले में फेल होने का पक्का प्रमाण है। यूपी ही नहीं देश की जनता भी इन सबसे अति-चिंतित जबकि बीएसपी की सरकार में एसटी तबके के हितों का भी खास ख्याल रखा गया।

मायावती ने लिखा कि यूपी सरकार जान-माल की सुरक्षा व जनहित के मामलें में अपनी विफलता को छिपाने के लिए धारा 144 का सहारा लेकर किसी को सोनभद्र जाने नहीं दे रही है। फिर भी उचित समय पर वहाँ जाकर पीड़ितों की यथासंभव मदद कराने का बीएसपी विधानमंडल दल को निर्देश। सरकारी लापरवाही इस नरसंहार का मुख्य कारण।

यह भी पढ़ें : सोनभद्र हिंसा पर मायावती का योगी सरकार पर हमला, कहा- विफलता छिपाने के लिए लगाई धारा 144

 
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