घरेलू हिंसा: वन स्टाॅप सेंटर में मामला आता है लेकिन समाधान नहीं निकलता, जाना पड़ता है कोर्ट; हर माह 55 नए केस
Varanasi News: वन स्टाॅप सेंटर में घरेलू विवाद को लेकर सुलह-समझाैता कराने की कोशिश की जाती है लेकिन कम ही मामले सुलझ पाते हैं। अधिकतर मामले अदालत में चले जाते हैं।
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घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए बनाए गए वन स्टॉप सेंटर में हर महीने औसतन 55 नए मामले दर्ज हो रहे हैं। 25 फीसदी मामलों का समाधान सिर्फ बातचीत से संभव नहीं हो पाता है।
कई बार पति-पत्नी या ससुराल पक्ष के बीच विवाद इतने गहरे होते हैं कि काउंसलिंग के बाद भी समझौते की संभावना खत्म हो जाती है। सेंटर से जुड़ी काउंसलर प्रियंका के अनुसार, कुछ महीनों में कई मामले आए हैं, जहां महिला उच्च शिक्षित है या किसी सम्मानित पद पर है। फिर भी घरेलू उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी पीड़िता की बात सुनने वाला कोई नहीं होता।
अधिकतर केस में आरोपी पति वकील, पुलिसकर्मी या फिर उच्च पदों पर आसीन होते हैं। ऐसे में उनके पास सिर्फ कोर्ट का रास्ता बचता है। सेंटर की प्रभारी रश्मि दुबे के मुताबिक, सबसे ज्यादा शिकायतें मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना की होती हैं। कुछ मामलों में शारीरिक हिंसा की शिकायतें भी होती हैं, लेकिन बदनामी के डर से अधिकांश महिलाएं पुलिस तक नहीं पहुंच पातीं।
कई लोगों ने कर लिया कोर्ट का रुख
गाजीपुर की महिला स्टेट बैंक में उच्च पद पर कार्यरत थी। उनकी शादी 3 साल पहले वाराणसी में तैनात पुलिसकर्मी से हुई थी। कुछ महीने बाद महिला ने अपना ट्रांसफर वाराणसी करा लिया। महिला साथ रहने की जिद करने लगी। पति राजी नहीं हुआ। वन स्टॉप सेंटर में दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया गया। समस्या का समाधान न होने पर महिला ने कोर्ट का रुख कर लिया।
चंदौली के चंधासी की महिला की शादी पहड़िया क्षेत्र के युवक से 2022 में हुई थी। पति मुंबई में नौकरी करता था। ससुराल में लोग प्रताड़ित करते थे। पत्नी साथ रहने की जिद करने लगी, लेकिन पति मना करता रहा। पति अकसर घर वालों की ही सुनता था। वन स्टाप सेंटर में शिकायत के बाद भी समाधान नहीं हुआ, नतीजन मामला कोर्ट तक पहुंचा।
वन स्टॉप सेंटर में आने वाले 75 प्रतिशत केसों का समाधान हो रहा है। जिन केस के समाधान नहीं हो पाते हैं, उन्हें कोर्ट जाने की सलाह दी जाती है। महिलाओं और युवतियों की समस्याओं के समाधान के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया जाता है। - रश्मि दुबे, प्रभारी, वन स्टॉप सेंटर।