दिव्यांग छात्र की शिकायत पर बीएचयू की चीफ प्रॉक्टर ने उठाया सवाल, बोलीं- आरोप झूठे और मनगढ़ंत
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वाराणसी के बीएचयू में स्नातक प्रथम वर्ष के जिस दिव्यांग छात्र ने चीफ प्रॉक्टर पर मारपीट का आरोप लगाते हुए लंका थाने में तहरीर दी है, उस पर सवाल खड़ा होने लगा है। चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने दिव्यांग (दृष्टिबाधित) छात्र संतोष कुमार त्रिपाठी पर निलंबित छात्राें के साथ मिलकर शिकायत करने का आरोप लगाते हुए इसे साजिश बताया है।
बिड़ला हॉस्टल में रहने वाले संतोष कुमार त्रिपाठी ने 14 मार्च को लंका थाने में तहरीर देकर चीफ प्रॉक्टर और सुरक्षा गार्डों पर मारपीट, जान से मारने की धमकी और आंख फोड़ने का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की थी।
पुलिस तो अभी मामले की जांच कर रही है लेकिन सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय के सलाहकार बोर्ड के सदस्य डॉ. उत्तम ओझा ने इसका संज्ञान लेकर कुलपति से भी जांच कराने की मांग की है। सूत्रों की माने तो मामले में कुलपति ने जांच कमेटी भी गठित कर दी है।
इधर, प्रेस को जारी बयान में चीफ प्रॉक्टर ने सफाई दी है कि निलंबित छात्रों के साथ मिलकर दिव्यांग छात्र मनगढ़ंत और झूठा आरोप लगा रहा है। ऐसा कर उनके चरित्र को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है, आरोपों का कोई ठोस प्रमाण भी नहीं है। इसकी जानकारी चीफ प्रॉक्टर ने कुलपति को भी दे दी है।
मारपीट करने वाले छात्र का शोध पंजीकरण रद्द
सर सुंदरलाल अस्पताल में एक अक्तूबर 2016 को उपकुलसचिव डॉ. संजय यादव के साथ मारपीट करने वाले फ्रांसीसी अध्ययन विभाग के छात्र राजन सिंह का प्रवेश पंजीकरण रद्द कर दिया गया है। कुलसचिव की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि संबंधित छात्र का प्रवेश जांच समिति की सिफारिश पर सितंबर 2017 में निरस्त किया जा चुका था लेकिन उसने फिर प्रवेश ले लिया था।
बताया कि इस आदेश के बाद भी विभागीय स्तर पर दो अप्रैल 2018 को राजन को शोध पंजीकरण की अनुमति दे दी गई, अब कुलपति के आदेश पर उसका शोध पंजीकरण रद्द कर दिया गया है।