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कुंद हो गई सतर्कता समितियों की धार
Updated Mon, 02 Jul 2018 12:32 AM IST
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ज्ञानपुर। खाद्यान्न वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने और अनाज की कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से गठित सतर्कता निगरानी समितियां कागज में सिमट कर रह गई हैं। ग्राम पंचायत से लेकर जिलास्तर तक गठित समिति प्रशासन की लापरवाही के कारण निष्क्रिय हो गई हैं। इसके चलते कोटेदारों की मनमानी की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां उजागर होती रही हैं। अनाज के उठान से लेकर उपभोक्ताओं को वितरित करने तक की प्रक्रिया में धांधली बरती जाती है। यही नहीं, गरीबों के अनाज की कालाबाजारी भी खूब होती है। खाद्य सुरक्षा कानून अधिनियम के लागू होने के बाद शासन ने ग्राम पंचायतों से लेकर जिलास्तर तक सतर्कता निगरानी समिति को गठित करने का निर्देश दिया था। इस पर करीब चार साल पूर्व समितियां तो गठित की गई लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते ये प्रभावी नहीं हो सकीं। ग्राम सभा की समिति में तीन उपभोक्ता, ग्राम प्रधान और शिक्षक समेत छह सदस्य होते हैं, जो अनाज के उठान से लेकर कोटे तक पहुंचाने के दौरान निगरानी रखते हैं। निगरानी समिति को निष्क्रिय बनाने के लिए कोटेदार अपने चहेते उपभोक्ताओं को शामिल कर लिए हैं। जिससे समिति कोटे की दुकानों पर बेहतर ढंग से प्रभावी नहीं हो पा रही है। इसी तरह ब्लॉक और जिलास्तर पर गठित समिति भी शोपीस बनकर ही रह गई हैं। जिससे शासन की मंशा अनुसार आम लोगों को तमाम दुश्वारियां सहनी पड़ती है। प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि समय-समय पर निगरानी समिति के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जाता है। कहीं से शिकायत आएगी तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां उजागर होती रही हैं। अनाज के उठान से लेकर उपभोक्ताओं को वितरित करने तक की प्रक्रिया में धांधली बरती जाती है। यही नहीं, गरीबों के अनाज की कालाबाजारी भी खूब होती है। खाद्य सुरक्षा कानून अधिनियम के लागू होने के बाद शासन ने ग्राम पंचायतों से लेकर जिलास्तर तक सतर्कता निगरानी समिति को गठित करने का निर्देश दिया था। इस पर करीब चार साल पूर्व समितियां तो गठित की गई लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते ये प्रभावी नहीं हो सकीं। ग्राम सभा की समिति में तीन उपभोक्ता, ग्राम प्रधान और शिक्षक समेत छह सदस्य होते हैं, जो अनाज के उठान से लेकर कोटे तक पहुंचाने के दौरान निगरानी रखते हैं। निगरानी समिति को निष्क्रिय बनाने के लिए कोटेदार अपने चहेते उपभोक्ताओं को शामिल कर लिए हैं। जिससे समिति कोटे की दुकानों पर बेहतर ढंग से प्रभावी नहीं हो पा रही है। इसी तरह ब्लॉक और जिलास्तर पर गठित समिति भी शोपीस बनकर ही रह गई हैं। जिससे शासन की मंशा अनुसार आम लोगों को तमाम दुश्वारियां सहनी पड़ती है। प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि समय-समय पर निगरानी समिति के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जाता है। कहीं से शिकायत आएगी तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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