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बारिश में बेकार हो जाएंगे पांच हजार शौचालय
Updated Mon, 21 May 2018 12:56 AM IST
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ज्ञानपुर/लालानगर। गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) बनाने में प्रशासन और ग्राम प्रधानों की लापरवाही से स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लग रहा है। 117 करोड़ खर्च कर जिले में अब तक बने 98 हजार शौचालयों में करीब पांच हजार शौचालय बारिश में ही निष्प्रयोज्य हो जाएंगे। तालाब के पास और खेतों में बनाए गए शौचालय बरसात के पानी से डूब जाएंगे। मात्र ढाई से तीन फीट गहरे सोख्ता बनाए गए हैं, जो बारिश में बेकार हो जाएंगे।
केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाने की मुहिम शुरू की थी। जिले को ओडीएफ बनाने के लिए गावों में तेजी से शौचालयों का निर्माण हो रहा है। प्रशासनिक आंकड़ों पर नजर डालें तो नमामि गंगे योजना के तहत गंगा से सटे 46 गांवों को ओडीएफ बनाने के बाद और 491 राजस्व गांव को भी खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा चुका है लेकिन हकीकत इससे इतर है। आनन-फानन में बनाए जा रहे शौचालयों में मानकों का बिल्कुल ख्याल नहीं रखा गया। स्थल चयन से लेकर निर्माण कार्य तक में घोर लापरवाही बरती जा रही है। कई गावों में तालाबों के किनारे और खेतों के निचले हिस्सों में शौचालय बनाकर कोरम पूरा कर लिया गया है। यही नहीं, इन शौचालयों के सोख्ता की गहराई मात्र ढाई से तीन फीट है। ऐसे शौचालय बारिश का पानी भरने से बेकार हो जाएंगे। पंचायत राज विभाग के अनुसार अब तक जिले में 98 हजार शौचालय बनाए जा चुके हैं, जिसमें 117 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च हुई है। औराई और अभोली के कुछ प्रधानों ने बताया कि गांवों में शौचालयों की हालत काफी खराब है। बारिश में 20 फीसदी से अधिक शौचालय बेकार हो जाएंगे। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि शौचालय के स्थल का चयन ग्राम प्रधान और लाभार्थी करते हैं। अगर शौचालय बेकार होंगे तो प्रधानों पर कार्रवाई की जाएगी।
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केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाने की मुहिम शुरू की थी। जिले को ओडीएफ बनाने के लिए गावों में तेजी से शौचालयों का निर्माण हो रहा है। प्रशासनिक आंकड़ों पर नजर डालें तो नमामि गंगे योजना के तहत गंगा से सटे 46 गांवों को ओडीएफ बनाने के बाद और 491 राजस्व गांव को भी खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा चुका है लेकिन हकीकत इससे इतर है। आनन-फानन में बनाए जा रहे शौचालयों में मानकों का बिल्कुल ख्याल नहीं रखा गया। स्थल चयन से लेकर निर्माण कार्य तक में घोर लापरवाही बरती जा रही है। कई गावों में तालाबों के किनारे और खेतों के निचले हिस्सों में शौचालय बनाकर कोरम पूरा कर लिया गया है। यही नहीं, इन शौचालयों के सोख्ता की गहराई मात्र ढाई से तीन फीट है। ऐसे शौचालय बारिश का पानी भरने से बेकार हो जाएंगे। पंचायत राज विभाग के अनुसार अब तक जिले में 98 हजार शौचालय बनाए जा चुके हैं, जिसमें 117 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च हुई है। औराई और अभोली के कुछ प्रधानों ने बताया कि गांवों में शौचालयों की हालत काफी खराब है। बारिश में 20 फीसदी से अधिक शौचालय बेकार हो जाएंगे। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि शौचालय के स्थल का चयन ग्राम प्रधान और लाभार्थी करते हैं। अगर शौचालय बेकार होंगे तो प्रधानों पर कार्रवाई की जाएगी।
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