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तीन महीने में भी पूरा नहीं हो पाएगा वरुणा कॉरिडोर 0
Updated Sat, 07 Apr 2018 02:36 AM IST
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वाराणसी। शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद जिस सुस्त गति से वरुणा कॉरिडोर का काम चल रहा है, उससे लगता नहीं कि यह अगले तीन माह में भी पूरा हो पाएगा। 30 जून तक काम पूरा करने का नया लक्ष्य तय किया गया है लेकिन अभी इसकी राह में कई मुश्किलें हैं। कॉरिडोर तैयार करने के साथ ही दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट के लिए अब तक अवैध निर्माण नहीं हटाए गए हैं। यदि अवैध निर्माणों को हटाए और पचास मीटर के दायरे में ग्रीन बेल्ट विकसित किए बिना जैसे-जैसे कॉरिडोर बन भी गया तो वह सिर्फ खानापूर्ति ही होगी। हालांकि कार्यदायी संस्था के अधिकारी निर्धारित समयावधि में कार्य पूरा कराने का दावा कर रहे हैं। यदि मानसून से पहले काम पूरा न हुआ तो फिर बारिश और बाढ़ के चलते मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
वरुणा कॉरिडोर को पहले 31 मार्च तक पूरा करना था लेकिन यूपीपीसीएल और सिंचाई विभाग की खींचतान के चलते छह महीने तक काम प्रभावित रहा। इस दौरान कई बड़ी अनियमितताएं भी सामने आईं। जिन पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। मौजूदा समय नदी की सफाई का काम चौकाघाट पुल से आदिकेशव घाट की ओर कराया जा रहा है। इसके अलावा, मिटटी से लेवलिंग कराई जा रही है। जिस प्रकार शास्त्री घाट के पास रेलिंग लगाई गई है, उसी प्रकार डीएम बंगले से आदि केशवघाट तक रेलिंग लगाई जाएगी। नदी के दोनों किनारों पर पाथवे का निर्माण कार्य कराया जाना है। पौधरोपण के अलावा लाइटिंग का काम पूरा कराया जाएगा। 201 करोड़ रुपये की योजना के तहत पूरा पैसा सिंचाई विभाग को मिल चुका था। बीते वित्तीय वर्ष में बचे 74 करोड़ शासन को वापस कर दिए गए थे।
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वरुणा कॉरिडोर को पहले 31 मार्च तक पूरा करना था लेकिन यूपीपीसीएल और सिंचाई विभाग की खींचतान के चलते छह महीने तक काम प्रभावित रहा। इस दौरान कई बड़ी अनियमितताएं भी सामने आईं। जिन पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। मौजूदा समय नदी की सफाई का काम चौकाघाट पुल से आदिकेशव घाट की ओर कराया जा रहा है। इसके अलावा, मिटटी से लेवलिंग कराई जा रही है। जिस प्रकार शास्त्री घाट के पास रेलिंग लगाई गई है, उसी प्रकार डीएम बंगले से आदि केशवघाट तक रेलिंग लगाई जाएगी। नदी के दोनों किनारों पर पाथवे का निर्माण कार्य कराया जाना है। पौधरोपण के अलावा लाइटिंग का काम पूरा कराया जाएगा। 201 करोड़ रुपये की योजना के तहत पूरा पैसा सिंचाई विभाग को मिल चुका था। बीते वित्तीय वर्ष में बचे 74 करोड़ शासन को वापस कर दिए गए थे।
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