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18 नए कोल ब्लाकों के संचालन में क्लीयरेंस का पड़ा अड़ंगा

Tue, 11 Apr 2017 09:17 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,सोनभद्र
ब्यूरो,अमर उजाला,सोनभद्र Updated Tue, 11 Apr 2017 09:17 PM IST
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18 new coal block clearance is in trouble
कब तक मिल पाएगा क्लीयरेंस, फिलहाल नहीं मिल पा रहा जवाब - फोटो : demo
मौजूदा एनसीएल परिक्षेत्र (दो सौ किमी एरिया वाली मुहेर बेसिन) से इतर सिंगरौली-सीधी सीमा की पांच सौ किमी एरिया (मेन बेसिन) में 18 नए कोल ब्लाक्स (परियोजनाएं) स्थापित करने की कवायद में क्लीयरेंस का अड़ंगा है।
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मध्यप्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ के जरिए जो पत्रावली केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजी गई थी, उसमें कई बिंदुओं पर आपत्ति जता दी गई। आपत्तियों के मद्देनजर नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर फिर से भेजा गया लेकिन क्लीयरेंस कब तक मिलेगा? फिलहाल कोई जवाब नहीं मिल पा रहा है। 
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सिंगरौली-सीधी सीमा क्षेत्र के पांच सौ किमी एरिया में 18 नए कोल ब्लाक्स (पांच अंडर ग्रांउड) को चिन्हित किया गया था। इन ब्लाकों का पटपहरिया, गुरुबारा साउथ, गुरुबारा सेंट्रल, गुरुबारा नार्थ, डोंगरीताल, पुरइल, इंगुरी, मकरी बरका ईस्ट, मकरी बरका वेस्ट, बोरका, सारोताला, डोंगरीताल वेस्ट, हट्टा-दुधमनिया, बांधवगढ़, एरिया बेस्ट आफ बरका, बांधा, तेंदूताल, बुधेर के रूप में नामकरण किया गया।
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चूंकि 18 में से 11 खदानों की एरिया सीधी स्थित संजय राष्ट्रीय उद्यान के नजदीक पड़ रही थी। इसलिए एनसीएल के तत्कालीन पर्यावरण अधिकारी एके जैन ने 2014 में मध्यप्रदेश के वाइल्ड लाइफ विभाग के जरिए क्लीयरेंस के लिए पत्रावली केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजी।

मामला राष्ट्रीय महत्व से जुड़ा था। इस कारण जल्द क्लीयरेंस मिलने की उम्मीद थी। एनसीएल प्रबंधन ने दो अंडरग्राउंड खदानों के संचालन की कवायद भी तेज कर दी लेकिन क्लीयरेंस में फंसे पेंच से यह कवायद बीच में ही रुक गई है।


अन्य कोल ब्लाकों की भी पहल ड्रिलिंग और प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर अटकी हुई है। उधर, एनसीएल के सीएमडी टीके नाग ने भी एक कार्यक्रम में स्वीकार किया कि अभी क्लीयरेंस नहीं मिल पाया है। कहा कि जब तक क्लीयरेंस नहीं मिल जाता।

तब तक मेन बेसिन में चयनित कोल ब्लाकों के संचालन के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। 
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