{"_id":"59501e244f1c1b555f8b4619","slug":"171498422820-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"काशी में पांच डग चले भगवान, भक्तों ने खींचा रथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काशी में पांच डग चले भगवान, भक्तों ने खींचा रथ
Updated Mon, 26 Jun 2017 02:23 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। मोक्षपुरी में भगवान के प्रति प्रेम, भक्ति, समर्पण और मिलन के रंग रविवार को आस्था के भावों पर अमिट हो गए। भोर में नंदीघोष नामक फूलों, लतरों से सुसज्जित रथ पर भगवान जगन्नाथ के आरूढ़ होने के साथ ही प्रभु के प्रेम की चासनी पगने लगी। रथ का पहिया पांच कदम खींचा गया और फिर तुलसी अर्पण के लिए घर-घर से लोग निकल पड़े। काशी में भगवान के दर्शन का अनूठा लक्खा मेला भक्ति भाव के ऊंचे मानकों पर गुलजार हो गया। सुबह इस्कॉन के भजनानंदियों के साथ संन्यासियों संग श्रद्धालु थिरके तो शाम को करीब दो किमी दायरे में बनारस की मस्ती, मिजाज और रंगों की ऐसी छटा बिखरी कि हर कोई उस आनंद में गोता लगाकर धन्य हो उठा।
ससुराल में सैर-सपाटे पर भगवान के निकलने की तैयारियां भी शानो-शौकत के साथ हुईं। पुजारी राधेश्याम पांडेय के आचार्यत्व में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को पीतांबर पहनाकर पीले गेंदा के फूलों से शृंगार किया गया। रथ के शिखर के अलावा परिक्त्रस्मा पथ को भी भव्य सजाया गया। 5ऱ्11 बजे भोर में मंगला आरती हुई और फिर पट खुलते ही कतारबद्ध बच्चे, महिलाएं और पुरुष तुलसी दल अर्पित करने और रथ के पहियों के स्पर्श के लिए उमड़ने लगे। बेला के फूलों की लड़ियों के अलावा दशहरी, लंगड़ा आम और मेवा की नान खटाई भगवान को चढ़ाकर सुख -समृद्धि की कामना की जाने लगी। शाम को बेनीराम बाग के सामने जहां रथारूढ़ भगवान जगन्नाथ थे, वहां से लेकर रथयात्रा चौराहे तक तिल रखे की जगह नहीं थी। गुलाब, बेला के फूलों की छतरियां दूर से ही लतर की रोशनी में जगमगा रही थीं।
विज्ञापन
ससुराल में सैर-सपाटे पर भगवान के निकलने की तैयारियां भी शानो-शौकत के साथ हुईं। पुजारी राधेश्याम पांडेय के आचार्यत्व में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को पीतांबर पहनाकर पीले गेंदा के फूलों से शृंगार किया गया। रथ के शिखर के अलावा परिक्त्रस्मा पथ को भी भव्य सजाया गया। 5ऱ्11 बजे भोर में मंगला आरती हुई और फिर पट खुलते ही कतारबद्ध बच्चे, महिलाएं और पुरुष तुलसी दल अर्पित करने और रथ के पहियों के स्पर्श के लिए उमड़ने लगे। बेला के फूलों की लड़ियों के अलावा दशहरी, लंगड़ा आम और मेवा की नान खटाई भगवान को चढ़ाकर सुख -समृद्धि की कामना की जाने लगी। शाम को बेनीराम बाग के सामने जहां रथारूढ़ भगवान जगन्नाथ थे, वहां से लेकर रथयात्रा चौराहे तक तिल रखे की जगह नहीं थी। गुलाब, बेला के फूलों की छतरियां दूर से ही लतर की रोशनी में जगमगा रही थीं।
विज्ञापन