बीएचयू के पुरातत्वविद अयोध्या के पास खपुरा गांव में तलाशेगें ताम्र पाषाण कालीन संस्कृति
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अब तीसरे सत्र में पुरातत्वविदों को उम्मीद है कि ताम्र पाषाण संस्कृति के अवशेष मिलेंगे।प्राचीन इतिहास विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. पुष्पलता सिंह ने अपनी टीम के साथ खपुरा पुरास्थल पर सर्वेक्षण कराया तो यहां कई प्राचीन पुरावशेषों के मिलने की संभावना जताई थी। दूसरे सत्र 2018-19 में गुप्तकालीन ईंटों और मृदभांडों के अवशेष मिल चुके हैं। इसमें लौह कालीन संस्कृति के मिले अवशेष करीब 3100 साल पुराने हैं।
शनिवार से होने वाली खुदाई के लिए बीएचयू से जरूरी सामान भी खपुरा पुरास्थल पर भिजवा दिए गए हैं। प्रो. पुष्पलता के मुताबिक अब तक मिले पुरावशेषों के आधार पर यह संकेत मिलता है कि तमसा नदी के किनारे स्थित खपुरा पुरास्थल के लोगों का संबंध सरयूपार एवं विंध्य-मध्य गांगेय क्षेत्र के लोगों से था। खपुरा में होने वाली खुदाई में डॉ. प्रभाकर उपाध्याय, शोध छात्र सहित विभाग के अन्य लोग भी सहयोग करेंगे।
अयोध्या से 50 किलोमीटर की दूरी पर खपूरा में शनिवार से होने वाली खुदाई का उद्देश्य पूर्व लौह कालीन संस्कृति से ताम्र पाषाण संस्कृति के बारे में जानना है। इसका संकेत दो सत्रों में प्राप्त मृदभांडों में मिल चुका हैं। -प्रो. पुष्पलता सिंह, प्राचीन इतिहास विभाग, बीएचयू
खपुरा में अब तक मिले हैं ये मृदभांड
- काले लेपित पात्र
- लाल पात्र
- काले एवं लाल पात्र
- उत्तरीय काली चमकीली मृदभांड
- धूसर पात्र
- पुरावशेष
- हड्डी पर बने बाणग्रा और आभूषण
- लौह उपकर
- ताम्र उपकरण एवं मिट्टी से बने मनके