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परिवर्तन का सम्मान जरूरी, खुद से हो बदलाव की शुरुआत : दलाई लामा
Updated Tue, 02 Jan 2018 01:53 AM IST
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वाराणसी। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने सोमवार को केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए छात्रों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस नए क्षण और नए अवसर को ग्रहण करते हुए अपनी प्राथमिकताएं तय करें। हमें हर परिवर्तन का सम्मान करना चाहिए। वर्तमान समय की आवश्यकता है कि बदलते समय के साथ हम स्वयं को उद्देश्यपूर्ण तरीके से ढालें। हमें प्राप्त होने वाला प्रत्येक क्षण नवीन है। इसका उपयोग नए तरीके से स्वयं तथा मानवता के हित में करना चाहिए। छात्र अपने भीतर बहुआयामी दृष्टिकोण का विकास करें।
संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह के उद्घाटन के बाद तिब्बती धर्मगुरु ने कहा कि आने वाले वर्ष में कुछ ऐसा काम करें कि जब पीछे मुड़कर देखें तो लगे कि कुछ अच्छा किया है। अगर ऐसा नहीं है तो हमें बदलाव की जरूरत है। बदलाव की शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए। तभी बेहतर परिवार और समाज की परिकल्पना साकार होगी। हमें अपने मस्तिष्क को सतत क्रियाशील रखना चाहिए। इस दौरान दलाई लामा ने संस्थान की स्वर्ण जयंती पर स्मारिका तथा संस्थान द्वारा प्रकाशित 22 ग्रंथों का विमोचन किया। संस्थान के पुरा छात्र संगठन द्वारा सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया।
समारोह में सिक्किम के पूर्व उप राज्यपाल डॉ. बीपी सिंह ने कहा कि शांति की स्थापना हमारे प्रयासों से ही संभव है। कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने संस्थान की उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। कुलसचिव डॉ. आरके उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस दौरान ठांगू रिनपोछे, गादेन ट्रि रिनपोछे, डॉ. लोबसंग सेंग्ये, पूर्व निदेशक प्रो. समदोंग रिनपोछे मौजूद रहे।
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समारोह के बाद दलाई लामा बोध गया में होने वाली कालचक्र पूजा में शामिल होने के लिए दोपहर बाद करीब दो बजे सड़क मार्ग से वहां के लिए रवाना हो गए।
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संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह के उद्घाटन के बाद तिब्बती धर्मगुरु ने कहा कि आने वाले वर्ष में कुछ ऐसा काम करें कि जब पीछे मुड़कर देखें तो लगे कि कुछ अच्छा किया है। अगर ऐसा नहीं है तो हमें बदलाव की जरूरत है। बदलाव की शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए। तभी बेहतर परिवार और समाज की परिकल्पना साकार होगी। हमें अपने मस्तिष्क को सतत क्रियाशील रखना चाहिए। इस दौरान दलाई लामा ने संस्थान की स्वर्ण जयंती पर स्मारिका तथा संस्थान द्वारा प्रकाशित 22 ग्रंथों का विमोचन किया। संस्थान के पुरा छात्र संगठन द्वारा सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया।
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समारोह में सिक्किम के पूर्व उप राज्यपाल डॉ. बीपी सिंह ने कहा कि शांति की स्थापना हमारे प्रयासों से ही संभव है। कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने संस्थान की उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। कुलसचिव डॉ. आरके उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस दौरान ठांगू रिनपोछे, गादेन ट्रि रिनपोछे, डॉ. लोबसंग सेंग्ये, पूर्व निदेशक प्रो. समदोंग रिनपोछे मौजूद रहे।
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समारोह के बाद दलाई लामा बोध गया में होने वाली कालचक्र पूजा में शामिल होने के लिए दोपहर बाद करीब दो बजे सड़क मार्ग से वहां के लिए रवाना हो गए।