{"_id":"5a036cc74f1c1b60678b9fed","slug":"161510173895-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिरासत में प्राणघातक हमले के आरोपी चार पुलिसकर्मी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिरासत में प्राणघातक हमले के आरोपी चार पुलिसकर्मी बरी
Updated Thu, 09 Nov 2017 02:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान प्राणघातक हमला करने के आरोपी तत्कालीन सीओ जयप्रकाश सिंह, एसआई रमाशंकर यादव, राजेंद्र प्रसाद सिंह और सिपाही गोरखनाथ सिंह को संदेह का लाभ देते हुए न्यायालय ने बरी कर दिया। मामले की सुनवाई अपर जिला जज एकादश राजेश्वर शुक्ला की अदालत ने की और आरोप सिद्ध न होने पर यह फैसला सुनाया।
अभियोजन के अनुसार कबीर नगर, दुर्गाकुंड निवासी राजकुमार बिज ने वर्ष 1996 में भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि उनके पुत्र राकेश बिज को 29 नवंबर 1996 को भेलूपुर पुलिस घर से उठा ले गई थी। बताया गया कि राकेश को उसके दोस्त संजय सिंह की हत्या के मामले में पूछताछ के लिए लाया गया है। आरोप था कि राकेश को पुलिस हिरासत में इतना मारा गया कि वह कोमा में चला गया।
आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एसएसपी के आदेश से मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में इसकी विवेचना 14 अक्तूबर, 1998 को सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। सीबीसीआईडी ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। इस मामले में एक आरोपी पुलिसकर्मी राजनारायण सिंह की विचारण के दौरान ही मौत हो गई थी। अदालत में बचाव पक्ष की पैरवी विधानचंद्र यादव और वरुण प्रताप सिंह ने की।
विज्ञापन
विज्ञापन
अभियोजन के अनुसार कबीर नगर, दुर्गाकुंड निवासी राजकुमार बिज ने वर्ष 1996 में भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि उनके पुत्र राकेश बिज को 29 नवंबर 1996 को भेलूपुर पुलिस घर से उठा ले गई थी। बताया गया कि राकेश को उसके दोस्त संजय सिंह की हत्या के मामले में पूछताछ के लिए लाया गया है। आरोप था कि राकेश को पुलिस हिरासत में इतना मारा गया कि वह कोमा में चला गया।
विज्ञापन
आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एसएसपी के आदेश से मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में इसकी विवेचना 14 अक्तूबर, 1998 को सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। सीबीसीआईडी ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। इस मामले में एक आरोपी पुलिसकर्मी राजनारायण सिंह की विचारण के दौरान ही मौत हो गई थी। अदालत में बचाव पक्ष की पैरवी विधानचंद्र यादव और वरुण प्रताप सिंह ने की।
विज्ञापन