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डीजल बोट, सुंदरता में खोट
Updated Wed, 05 Dec 2018 02:11 AM IST
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वाराणसी। काशी के अर्धचंद्राकार घाटों की सूरत बिगड़ रही है। डीजल बोट के इंजन से निकलने वाली कालिख घाटों पर जमा हो रही है। उन 24 घाटों पर जहां डीजल बोट खूब चलती हैं, 150 से ज्यादा ब्लैक स्पॉट बन गए हैं। ये स्पॉट ऐसे हैं, जिन्हें हटाना आसान नहीं है। प्रशासन आंखें मूंदे है और इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
नवीनीकरणीय विभाग ने करीब पांच माह पहले गंगा में चल रही डीजल बोटों पर चिंता जताते हुए, ई बोट के संचालन का प्रस्ताव दिया था। मगर प्रशासन ने इस योजना पर कोई काम शुरू नहीं किया। प्रवासी भारतीय सम्मलेन के लिए घाटों को संवारना है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 24 घाटों पर सौंदर्यीकरण का काम जारी है। इस काम में लगी एजेंसी ने प्रशासन को रिपोर्ट दी है कि डीजल नावों से घाटों पर कालिख जमा है। घाटों के मूल रंगरूप को बचाते हुए इस कालिख को हटाना मुश्किल हो रहा है।
400 नावों के संचालन की है अनुमति
नगर निगम ने गंगा में 400 नावों के संचालन की अनुमति दी है। करीब पांच माह पहले गंगा में प्रदूषण को रोकने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा विभाग ने बैटरी चालित नावों के संचालन को अनुमति दी थी। इसमें नावों में लगे डीजल इंजन की जगह बैटरी लगाने का प्रस्ताव दिया गया था। इसमें घाटों पर चार्जिंग प्वाइंट बनाकर नाविकों को शुल्क देकर बैटरी बदलने की सुविधा देने की बात थी। मगर, इस प्रस्ताव पर काम नहीं किया गया।
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डीजल इंजन से चलने वाली बोट से निकलने वाले धुएं से घाटों पर प्रदूषण की रिपोर्ट मिली है। घाटों पर भी ब्लैक स्पॉट का जिक्र है। इसका सत्यापन कराया जा रहा है। -सुरेंद्र सिंह, जिलाधिकारी
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नवीनीकरणीय विभाग ने करीब पांच माह पहले गंगा में चल रही डीजल बोटों पर चिंता जताते हुए, ई बोट के संचालन का प्रस्ताव दिया था। मगर प्रशासन ने इस योजना पर कोई काम शुरू नहीं किया। प्रवासी भारतीय सम्मलेन के लिए घाटों को संवारना है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 24 घाटों पर सौंदर्यीकरण का काम जारी है। इस काम में लगी एजेंसी ने प्रशासन को रिपोर्ट दी है कि डीजल नावों से घाटों पर कालिख जमा है। घाटों के मूल रंगरूप को बचाते हुए इस कालिख को हटाना मुश्किल हो रहा है।
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400 नावों के संचालन की है अनुमति
नगर निगम ने गंगा में 400 नावों के संचालन की अनुमति दी है। करीब पांच माह पहले गंगा में प्रदूषण को रोकने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा विभाग ने बैटरी चालित नावों के संचालन को अनुमति दी थी। इसमें नावों में लगे डीजल इंजन की जगह बैटरी लगाने का प्रस्ताव दिया गया था। इसमें घाटों पर चार्जिंग प्वाइंट बनाकर नाविकों को शुल्क देकर बैटरी बदलने की सुविधा देने की बात थी। मगर, इस प्रस्ताव पर काम नहीं किया गया।
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डीजल इंजन से चलने वाली बोट से निकलने वाले धुएं से घाटों पर प्रदूषण की रिपोर्ट मिली है। घाटों पर भी ब्लैक स्पॉट का जिक्र है। इसका सत्यापन कराया जा रहा है। -सुरेंद्र सिंह, जिलाधिकारी