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आस्ट्रेलिया में अब सजेंगी काशी में बनी कलाकृतियां
Updated Wed, 24 Jan 2018 02:21 AM IST
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वाराणसी। काशी के शिल्प अब आस्ट्रेलिया में प्रदर्शनी के लिए सजेंगे। भारतीय मूल के आस्ट्रेलिया के जियोलॉजिस्ट फ्रेड मेहता की बेटी ने यह निर्णय लिया है। अपने पिता की विरासत को सहेजने काशी आई इंडिया ने रामछाटपार शिल्पन्यास में प्रदर्शनी लगाई है। 25 दिसंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में इंडिया के दिवंगत पिता द्वारा बनाई गई कलाकृतियों को आम दर्शकों को देखने के लिए रखा गया है।
बीएचयू दृश्यकलासंकाय के मदनलाल ने बताया कि फ्रे ड ने तीन माह तक काशी में रहकर पीतल की 21 प्रतिकृतियां तैयार की थीं। इसमें रेखाचित्र और जानवरों के चित्रों के समन्वय से यह कृतिया तैयार की गई हैं। इसके अलावा पत्थरों पर उत्खनित चित्रों को भी प्रदर्शनी के लिए रखा गया है। माडर्न आर्ट का यह एक बेहतरीन नमूना है। आस्ट्रेलिया के भूवैज्ञानिक रहे फ्रेड ने शिल्पन्यास में ही रहकर इन कलाकृतियों को तैयार किया था। पेशे से इंटीरियर डिजाइनर इंडिया मेहता ने बताया कि वह अपने पिता की बनाई हुई कलाकृतियों को अपने साथ लेकर आस्ट्रेलिया जाएगी। वहां पर वह इनकी प्रदर्शनी लगाएगी और पिता की याद में आर्ट गैलरी बनाने की तैयारी कर रही है। उसका कहना है कि अब तो उसका बनारस से एक अलग ही रिश्ता बन गया है। बनारस ने उसकी पिता की विरासत को उसे सौंपा है जो उसके लिए हमेसा यादगार रहेगा।
आस्ट्रेलिया की रहने वाली इंडिया मेहता को फेसबुक ने उनकी पिता की कलाकृतियों तक पहुंचाया था। इंडिया को पता ही नहीं था कि उनके पिता फ्रेड मेहता की तीन दर्जन से अधिक मूर्तियां और चित्र बनारस में हैं। पिछले कुछ माह पूर्व जब इंडिया ने अपने पिता की मृत्यु की सूचना फेसबुक पर पोस्ट की तो फ्रे ड के मूर्तिकार मित्र काशी के मदनलाल दु:खी हो गए। उन्होंने फेसबुक के जरिए इंडिया मेहता से संपर्क किया और उन्हें उनके पिता की कृतियों के बारे में जानकारी दी।
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बीएचयू दृश्यकलासंकाय के मदनलाल ने बताया कि फ्रे ड ने तीन माह तक काशी में रहकर पीतल की 21 प्रतिकृतियां तैयार की थीं। इसमें रेखाचित्र और जानवरों के चित्रों के समन्वय से यह कृतिया तैयार की गई हैं। इसके अलावा पत्थरों पर उत्खनित चित्रों को भी प्रदर्शनी के लिए रखा गया है। माडर्न आर्ट का यह एक बेहतरीन नमूना है। आस्ट्रेलिया के भूवैज्ञानिक रहे फ्रेड ने शिल्पन्यास में ही रहकर इन कलाकृतियों को तैयार किया था। पेशे से इंटीरियर डिजाइनर इंडिया मेहता ने बताया कि वह अपने पिता की बनाई हुई कलाकृतियों को अपने साथ लेकर आस्ट्रेलिया जाएगी। वहां पर वह इनकी प्रदर्शनी लगाएगी और पिता की याद में आर्ट गैलरी बनाने की तैयारी कर रही है। उसका कहना है कि अब तो उसका बनारस से एक अलग ही रिश्ता बन गया है। बनारस ने उसकी पिता की विरासत को उसे सौंपा है जो उसके लिए हमेसा यादगार रहेगा।
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आस्ट्रेलिया की रहने वाली इंडिया मेहता को फेसबुक ने उनकी पिता की कलाकृतियों तक पहुंचाया था। इंडिया को पता ही नहीं था कि उनके पिता फ्रेड मेहता की तीन दर्जन से अधिक मूर्तियां और चित्र बनारस में हैं। पिछले कुछ माह पूर्व जब इंडिया ने अपने पिता की मृत्यु की सूचना फेसबुक पर पोस्ट की तो फ्रे ड के मूर्तिकार मित्र काशी के मदनलाल दु:खी हो गए। उन्होंने फेसबुक के जरिए इंडिया मेहता से संपर्क किया और उन्हें उनके पिता की कृतियों के बारे में जानकारी दी।
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