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गंगा बेसिन इलाके में पानी में फ्लोराइड का असर न के बराबर
Updated Sat, 20 Jan 2018 02:09 AM IST
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वाराणसी। प्रदूषण के चलते तेजी से भूगर्भ जल दूषित हो रहा है। दिल्ली की रिपोर्ट के मुताबिक वाराणसी सहित कई आसपास के जिलों में पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाए जाने की शिकायत सामने आई है। लेकिन यहां इसका असर न के बराबर है। कारण कि गंगा बेसिन का इलाका होने के कारण यहां पानी अधिक दूषित नहीं है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता और एक्सपर्ट कन्हैयालाल का कहना है कि पिछले तीन साल में हैंडपंप या ट्यूबवेल की बोरिंग कराने के दौरान अब तक पानी में फ्लोराइड की शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि फ्लोराइड की मात्रा ग्रामीण इलाके में उन स्थानों पर पाई जाती है जहां तालाब होता है और उसमें गंदा पानी भरा होता है। इससे उसके आसपास के इलाके का भूगर्भ जल दूषित हो जाता है और वहां फ्लोराइड की मात्रा बढ़ जाती है। चूंकि यहां गंगा का किनारा है और गांवों में अब ऐसे तालाब नहीं बचे, जिससे कि इसकी शिकायत मिले। घाघरा नदी के आसपास के जिलों में पानी में आर्सेनिक की मात्रा पाई जाती है। इसमें बलिया, आजमगढ़ और मऊ शामिल है। लेकिन वहां भी पानी में फ्लोराइड की शिकायत नहीं आई।
फ्लोराइड से फ्लोरेसिस नामक बीमारी होने की संभावना अधिक रहता है। इसका सीधा असर कैल्सियम को प्रभावित करता है, जिससे शरीर की हड्डियां दिन प्रतिदिन कमजोर होने लगती है। इसके अलावा पेट संबंधी बीमारी के साथ ही दांतों पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। बचाव के लिए जरूरी है कि पानी के लिए जमीन में पहले की अपेक्षा अधिक गहराई में खुदाई कराएं। हालांकि अस्पताल में फ्लोराइड वाले मरीजों की संख्या बहुत कम ही रहती है, फिर भी सावधानी बरतने की जरूरत है। -डॉ.एके सिंह, फिजिशियन, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा
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जल निगम के अधिशासी अभियंता और एक्सपर्ट कन्हैयालाल का कहना है कि पिछले तीन साल में हैंडपंप या ट्यूबवेल की बोरिंग कराने के दौरान अब तक पानी में फ्लोराइड की शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि फ्लोराइड की मात्रा ग्रामीण इलाके में उन स्थानों पर पाई जाती है जहां तालाब होता है और उसमें गंदा पानी भरा होता है। इससे उसके आसपास के इलाके का भूगर्भ जल दूषित हो जाता है और वहां फ्लोराइड की मात्रा बढ़ जाती है। चूंकि यहां गंगा का किनारा है और गांवों में अब ऐसे तालाब नहीं बचे, जिससे कि इसकी शिकायत मिले। घाघरा नदी के आसपास के जिलों में पानी में आर्सेनिक की मात्रा पाई जाती है। इसमें बलिया, आजमगढ़ और मऊ शामिल है। लेकिन वहां भी पानी में फ्लोराइड की शिकायत नहीं आई।
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फ्लोराइड से फ्लोरेसिस नामक बीमारी होने की संभावना अधिक रहता है। इसका सीधा असर कैल्सियम को प्रभावित करता है, जिससे शरीर की हड्डियां दिन प्रतिदिन कमजोर होने लगती है। इसके अलावा पेट संबंधी बीमारी के साथ ही दांतों पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। बचाव के लिए जरूरी है कि पानी के लिए जमीन में पहले की अपेक्षा अधिक गहराई में खुदाई कराएं। हालांकि अस्पताल में फ्लोराइड वाले मरीजों की संख्या बहुत कम ही रहती है, फिर भी सावधानी बरतने की जरूरत है। -डॉ.एके सिंह, फिजिशियन, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा
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