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अभिषेक की प्रक्रिया अवैधानिक
Updated Fri, 08 Dec 2017 02:14 AM IST
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वाराणसी। लहुराबीर स्थित भारत धर्म महामंडल के सभा कक्ष में शाम चार बजे ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य चयन के मसले पर ऑल इंडिया कौंसिल की बैठक आरंभ हुई। जनरल सेक्रेटरी प्रो. शंभू उपाध्याय ने एजेंडा पढ़कर सुनाया। इसके बाद बीते 24 नवंबर को डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी शंभूनाथ चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय, शशिनंदर दर, सत्येंद्र मिश्र और दिनेश मणि तिवारी की ओर से स्वामी स्वरूपानंद के नाम का प्रस्ताव पारित करने के अलावा मध्य प्रदेश के परमहंसी गंगा आश्रम पहुंचकर ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर अभिषेक करने की प्रक्रिया को अवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया। इसके बाद पांचों पदाधिकारियों के निलंबन की पुष्टि की गई।
अध्यक्ष दयानिधि मिश्र ने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद उच्चकोटि के विद्वान संत हैं। हम सभी उनके प्रति निष्ठा रखते हैं और उनके भक्त हैं लेकिन विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी तक जो नाम आए हैं, शंकराचार्य पद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए चयन प्रक्रिया की अवधि 20 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी गई। इस मौके पर चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह, राजेश राय, रवींद्र नाथ पांडेय समेत 17 सदस्य उपस्थित थे।
उधर, उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय की अगुवाई वाले दूसरे धड़े ने कार्यालय कक्ष में अलग बैठक कर 18 सदस्यों के बहुमत का दावा किया। कहा कि स्वरूपानंद का ज्योतिष्पीठ पर पूर्ण बहुमत से चयन किया जा चुका है। ऐसे में दयानिधि और शंभू उपाध्याय की ओर से बुलाई गई मंत्री सभा की बैठक और निलंबन की कार्रवाई दोनों विधि शून्य है।
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अध्यक्ष दयानिधि मिश्र ने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद उच्चकोटि के विद्वान संत हैं। हम सभी उनके प्रति निष्ठा रखते हैं और उनके भक्त हैं लेकिन विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी तक जो नाम आए हैं, शंकराचार्य पद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए चयन प्रक्रिया की अवधि 20 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी गई। इस मौके पर चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह, राजेश राय, रवींद्र नाथ पांडेय समेत 17 सदस्य उपस्थित थे।
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उधर, उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय की अगुवाई वाले दूसरे धड़े ने कार्यालय कक्ष में अलग बैठक कर 18 सदस्यों के बहुमत का दावा किया। कहा कि स्वरूपानंद का ज्योतिष्पीठ पर पूर्ण बहुमत से चयन किया जा चुका है। ऐसे में दयानिधि और शंभू उपाध्याय की ओर से बुलाई गई मंत्री सभा की बैठक और निलंबन की कार्रवाई दोनों विधि शून्य है।
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