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Varanasi News: 8000 किलोग्राम तार पर चलेंगी रोपवे की 150 ट्रालियां
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वाराणसी। काशी में बनने वाले रोपवे की ट्राली को चलाने के लिए 8000 किलोग्राम के दो तार समानांतर लगेंगे। दोनों तरफ से तकरीबन आठ किमी इसकी लंबाई होगी। इसी तार पर सवारी समेत 150 ट्रालियां चलेंगी। यह देश का पहला व दुनिया की तीसरा अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे है। सब कुछ ठीक रहा तो जून तक यह चालू हो जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन पर इसकी ट्राली के लोकार्पण की तैयारी की गई है। पीएम को ट्राली का स्वरूप दिखाया जाएगा। इसके लिए स्थान का चयन होना बाकी है। पहले साजन तिराहे पर इसे लगाना था, लेकिन यहां यातायात के दबाव को देखते हुए स्थान परिवर्तन करने पर बात चल रही है।
बोलिविया के लापाज और मेक्सिको के बाद यह दुनिया का तीसरा और देश का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे होगा। इसके निर्माण में लगने वाले उपकरण स्विटजरलैंड व यूरोपीय संघ से आयात किए गए हैं। इसकी तकनीक स्विटजरलैंड की है। यात्रियों की सुगम यात्रा के साथ ही सुरक्षा पर भी विशेष फोकस है।
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इनसेट
3.85 किमी की दूरी 16 मिनट में होगी पूरी
रोपवे की योजना 807 करोड़ रुपये की है। वाराणसी कैंट स्टेशन से शुरू होकर गोदौलिया चौराहे तक कुल पांच स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसमें कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया चौराहे पर स्टेशन बनाया जाएगा। रोपवे की कुल दूरी 3.85 किलोमीटर है। यह दूरी करीब 16 मिनट में तय होगी। लगभग 35 से 45 मीटर की ऊंचाई से ट्रॉली चलेगी।
स्विटजरलैंड और यूरोपीय संघ से आए उपकरण
रोपवे के निर्माण में स्टील टॉवर, बुल व्हील्स, ग्रिप्स-हैंगर, टायर कन्वेयर, केबिन आदि उपकरण स्विट्जरलैंड व यूरोपीय संघ से आ रहे हैं। स्टील ट्यूबलर टावर और 4 लेग टावर प्री-फैब्रिकेटेड स्विटजरलैंड का है। जो कम जगह में इंस्टाल होगा। ट्राली 29 टावर के सहारे चलेगा। इसमें स्टील ट्यूबलर टावर की संख्या 24 और 3 लैटिस टावर होंगे।
रोपवे की ट्राली चलाने के लिए आठ किमी लंबी स्टील की तार होगी। दो तार समानांतर लगाए जाएंगे। इसका वजन 8000 किलोग्राम है। - पूजा मिश्रा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड (एनएचएलएमएल)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन पर इसकी ट्राली के लोकार्पण की तैयारी की गई है। पीएम को ट्राली का स्वरूप दिखाया जाएगा। इसके लिए स्थान का चयन होना बाकी है। पहले साजन तिराहे पर इसे लगाना था, लेकिन यहां यातायात के दबाव को देखते हुए स्थान परिवर्तन करने पर बात चल रही है।
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बोलिविया के लापाज और मेक्सिको के बाद यह दुनिया का तीसरा और देश का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे होगा। इसके निर्माण में लगने वाले उपकरण स्विटजरलैंड व यूरोपीय संघ से आयात किए गए हैं। इसकी तकनीक स्विटजरलैंड की है। यात्रियों की सुगम यात्रा के साथ ही सुरक्षा पर भी विशेष फोकस है।
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3.85 किमी की दूरी 16 मिनट में होगी पूरी
रोपवे की योजना 807 करोड़ रुपये की है। वाराणसी कैंट स्टेशन से शुरू होकर गोदौलिया चौराहे तक कुल पांच स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसमें कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया चौराहे पर स्टेशन बनाया जाएगा। रोपवे की कुल दूरी 3.85 किलोमीटर है। यह दूरी करीब 16 मिनट में तय होगी। लगभग 35 से 45 मीटर की ऊंचाई से ट्रॉली चलेगी।
स्विटजरलैंड और यूरोपीय संघ से आए उपकरण
रोपवे के निर्माण में स्टील टॉवर, बुल व्हील्स, ग्रिप्स-हैंगर, टायर कन्वेयर, केबिन आदि उपकरण स्विट्जरलैंड व यूरोपीय संघ से आ रहे हैं। स्टील ट्यूबलर टावर और 4 लेग टावर प्री-फैब्रिकेटेड स्विटजरलैंड का है। जो कम जगह में इंस्टाल होगा। ट्राली 29 टावर के सहारे चलेगा। इसमें स्टील ट्यूबलर टावर की संख्या 24 और 3 लैटिस टावर होंगे।
रोपवे की ट्राली चलाने के लिए आठ किमी लंबी स्टील की तार होगी। दो तार समानांतर लगाए जाएंगे। इसका वजन 8000 किलोग्राम है। - पूजा मिश्रा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड (एनएचएलएमएल)