{"_id":"5995f44b4f1c1bcc388b45dc","slug":"141502999627-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर आयुक्त हुए प्रशासक, मेयर के कक्ष में जड़ा ताला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर आयुक्त हुए प्रशासक, मेयर के कक्ष में जड़ा ताला
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:27 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। नगर निगम के सदन का कार्यकाल पूरा होने के बाद गुरुवार को मेयर रामगोपाल मोहले से लेकर सदन और पार्षद दल केनेताओं के कमरों मे ताला जड़ दिया गया। कक्ष के सामने से नेम प्लेट हटा दिया गया। नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल प्रशासक केतौर पर अब नगर निगम की कमान संभालेंगे। नगर निगम सदन की पहली बैठक 16 अगस्त को हुई थी। शासन से निर्देश मिला था कि शपथ ग्रहण की तिथि के बाद पहली बैठक से नगर निगम का कार्यकाल माना जाएगा। इसी के आधार पर चुने गए प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म मानते हुए मेयर से लेकर पार्षदों तक केनेम प्लेट हटा दिए गए। कमरों में नगर आयुक्त के निर्देश पर ताला जड़ दिय गया। नगर आयुक्त का कहना है कि शासनादेश के मुताबिक 16 अगस्त 2017 को कार्यकाल खत्म मानते हुए कार्रवाई की गई है। कार्यकारिणी के गठन का मामला कोर्ट में है। ऐसे में सदन का पांच साल का कार्यकाल बुधवा को पूरा हो गया। वहीं मेयर राम गोपाल मोहले ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि कार्यकाल एक सितंबर को पूरा हो रहा है। ऐसे में कमरे पर ताला लगाना यह सही नहीं है।
ये है शासनादेश
वाराणसी। प्रमुख सचिव कुमार कमलेश ने 19 जुलाई को प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं के लिए शासनादेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि निकायों की कार्य अवधि की गणना उनके गठन के पश्चात शपथ ग्रहण की तिथि के बाद हुई पहली बैठक से लिया जाएगा। कार्यअवधि खत्म होने के बाद नगर आयुक्त, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत को निकायों के कार्य का संचालन का दायित्व होगा। निकाय की कार्यकारिण समिति बहुमत के आधार पर नगर आयुक्तों एवं अधिशासी अधिकारियों को परामर्श दे सकेगी। नागरिक सुविधाओं का परीक्षण भी कर सकती है। मगर उन्हें कोई पारिश्रमिक देय नहीं होगा।
विज्ञापन
ये है शासनादेश
वाराणसी। प्रमुख सचिव कुमार कमलेश ने 19 जुलाई को प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं के लिए शासनादेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि निकायों की कार्य अवधि की गणना उनके गठन के पश्चात शपथ ग्रहण की तिथि के बाद हुई पहली बैठक से लिया जाएगा। कार्यअवधि खत्म होने के बाद नगर आयुक्त, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत को निकायों के कार्य का संचालन का दायित्व होगा। निकाय की कार्यकारिण समिति बहुमत के आधार पर नगर आयुक्तों एवं अधिशासी अधिकारियों को परामर्श दे सकेगी। नागरिक सुविधाओं का परीक्षण भी कर सकती है। मगर उन्हें कोई पारिश्रमिक देय नहीं होगा।
विज्ञापन