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हथियार नहीं नक्सली सीख रहे कालीन बनाने का हुनर
Updated Wed, 24 Oct 2018 01:37 AM IST
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वाराणसी। मिर्जापुर और सोनभद्र के नक्सली हथियार छोड़ कालीन बुनने का हुनर सीख रहे हैं। भारतीय कालीन संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने नक्सलियों को मुख्य धारा में जोड़ने के लिए उनके परिवारों को कालीन बुनाई का प्रशिक्षण दे रहा है। कुछ लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर कालीन की बुनाई शुरू भी कर दी है। सीईपीसी का उद्देश्य नक्सलियों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ ही कालीन उद्योग में घटते बुनकरों की संख्या को भी बढ़ाना है। बुनकरों के विकास और उनको अधिक से अधिक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय व सीईपीसी ने नक्सल क्षेत्र के लोगों को हुनरमंद बनाने का संयुक्त प्रयास शुरू किया।
कालीन निर्माताओं निर्यातकों का कहना है कि पहले नक्सली परिवार को कालीन बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाता है। जब वे पूरी तरह पारंगत हो जाते हैं तो उनके घर पर ही पावरलूम की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। सीईपीसी के कार्यकारी निदेशक संजय कुमार ने बताया कि कालीन बुनकरी व्यवसाय के संवर्धन के लिए नए क्षेत्रों की तलाश में झारखंड के रांची पहुंचे तो वहां के प्रमुख सचिव को योजना अच्छी लगी और फिर वहां के लोहारदग्गा, पलामू, गढ़वा जैसे नक्सली क्षेत्रों में इस योजना की शुरुआत की गयी और यह प्रयास रंग लाया। उन्होंने बताया कि इसके बाद उड़ीसा के धारचूला, नेलयरा, छत्तीसगढ़ के राबनंद गांव, पश्चिम बंगाल के मालदा नार्थ व दिनाजपुर, आंध्र प्रदेश के कुन्नूर, बिहार के गया, नेवादा, मधुबनी व दागा के अलावा यूपी के सोनभद्र व मीरजापुर आदि जगहों पर नक्सली परिवारों को कालीन बुनाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सीईपीसी के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि इसके बाद नक्सली परिवारों को डिजाइन का प्रशिक्षण देने भी योजना है। इसके तहत 40-40 की संख्या में प्रशिक्षित किया जाएगा। बताया कि वर्तमान में चल रहे परीक्षण केंद्रों पर 20-20 की संख्या में लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
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कालीन निर्माताओं निर्यातकों का कहना है कि पहले नक्सली परिवार को कालीन बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाता है। जब वे पूरी तरह पारंगत हो जाते हैं तो उनके घर पर ही पावरलूम की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। सीईपीसी के कार्यकारी निदेशक संजय कुमार ने बताया कि कालीन बुनकरी व्यवसाय के संवर्धन के लिए नए क्षेत्रों की तलाश में झारखंड के रांची पहुंचे तो वहां के प्रमुख सचिव को योजना अच्छी लगी और फिर वहां के लोहारदग्गा, पलामू, गढ़वा जैसे नक्सली क्षेत्रों में इस योजना की शुरुआत की गयी और यह प्रयास रंग लाया। उन्होंने बताया कि इसके बाद उड़ीसा के धारचूला, नेलयरा, छत्तीसगढ़ के राबनंद गांव, पश्चिम बंगाल के मालदा नार्थ व दिनाजपुर, आंध्र प्रदेश के कुन्नूर, बिहार के गया, नेवादा, मधुबनी व दागा के अलावा यूपी के सोनभद्र व मीरजापुर आदि जगहों पर नक्सली परिवारों को कालीन बुनाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सीईपीसी के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि इसके बाद नक्सली परिवारों को डिजाइन का प्रशिक्षण देने भी योजना है। इसके तहत 40-40 की संख्या में प्रशिक्षित किया जाएगा। बताया कि वर्तमान में चल रहे परीक्षण केंद्रों पर 20-20 की संख्या में लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
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