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जल परिवहन में बाधक बनेगी कछुआ सेंचुरी 0
Updated Fri, 09 Mar 2018 02:44 AM IST
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वाराणसी। गंगा में राजघाट से रामनगर किले तक सात किलोमीटर तक के कछुआ सेंचुरी पीएम नरेंद्र मोदी की महात्वाकांक्षी योजना जल परिवहन में बाधक होगी। स्थानीय प्रशासन की ओर से सेंचुरी से होने वाने नुकसान हो लेकर विशेषज्ञों की रिपोर्ट पिछले साल ही शासन को भेजी थी लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हो सका है। वहीं जल परिवहन का काम तेजी से चल रहा है।
वाराणसी से हल्दिया तक जल परिवहन की योजना है। रामनगर में मल्टी माडल टर्मिनल बन रहा है। यहां केंद्रीय जल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भले ही जल्द से जल्द सेंचुरी की बाधा दूर करने की बात कही हो लेकिन अब तक शासन की ओर से वन विभाग को कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई है। वन विभाग ने बुधवार को ही मणिकर्णिका घाट के सामने साढ़े पांच सौ मांसाहारी कछुआ छोड़े हैं।
बीएचयू आईआईटी, केंद्रीय जल आयोग के अलावा अन्य अभियंताओं की टीम की मदद से जिला प्रशासन ने कछुआ सेंचुरी से होने वाले खतरों को जानने की कोशिश की थी। उन कारणों को चिह्नित कराया गया था, जिनकी वजह से शहर की ओर गंगा का जल दबाव बढ़ रहा है और घाटों में क्षरण पैदा होने लगा है। इसे रोकने के लिए सेंचुरी के प्रतिबंधों को शिथिल करते हुए बालू की ड्रेजिंग कराने की योजना थी लेकिन अभी तक इस दिशा में कुछ भी होता नजर नहीं आ रहा है। उल्लेखनीय है कि जल परिवहन के तहत एक हजार टन के मालवाहक जलपोत संचालित होंगे। इनसे मारुति की गाड़ियों को वाराणसी से कोलकाता ले जाया जाएगा। इस संदर्भ में डीएफओ मूलचंद का कहना है कि कछुआ सेंचुरी हटाने को लेकर शासन स्तर से कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। शर्तों के साथ सेंचुरी में मालवाहक पोत को चलाने की अनुमति दी जा सकती है। इस संबंध में केंद्र और प्रदेश सरकार से वार्ता हुई है।
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वाराणसी से हल्दिया तक जल परिवहन की योजना है। रामनगर में मल्टी माडल टर्मिनल बन रहा है। यहां केंद्रीय जल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भले ही जल्द से जल्द सेंचुरी की बाधा दूर करने की बात कही हो लेकिन अब तक शासन की ओर से वन विभाग को कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई है। वन विभाग ने बुधवार को ही मणिकर्णिका घाट के सामने साढ़े पांच सौ मांसाहारी कछुआ छोड़े हैं।
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बीएचयू आईआईटी, केंद्रीय जल आयोग के अलावा अन्य अभियंताओं की टीम की मदद से जिला प्रशासन ने कछुआ सेंचुरी से होने वाले खतरों को जानने की कोशिश की थी। उन कारणों को चिह्नित कराया गया था, जिनकी वजह से शहर की ओर गंगा का जल दबाव बढ़ रहा है और घाटों में क्षरण पैदा होने लगा है। इसे रोकने के लिए सेंचुरी के प्रतिबंधों को शिथिल करते हुए बालू की ड्रेजिंग कराने की योजना थी लेकिन अभी तक इस दिशा में कुछ भी होता नजर नहीं आ रहा है। उल्लेखनीय है कि जल परिवहन के तहत एक हजार टन के मालवाहक जलपोत संचालित होंगे। इनसे मारुति की गाड़ियों को वाराणसी से कोलकाता ले जाया जाएगा। इस संदर्भ में डीएफओ मूलचंद का कहना है कि कछुआ सेंचुरी हटाने को लेकर शासन स्तर से कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। शर्तों के साथ सेंचुरी में मालवाहक पोत को चलाने की अनुमति दी जा सकती है। इस संबंध में केंद्र और प्रदेश सरकार से वार्ता हुई है।
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