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खुद को लेखपाल बता रची थी कब्जे की साजिश
Updated Sat, 23 Sep 2017 02:23 AM IST
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सेवापुरी। कपसेठी थाना क्षेत्र के कालिका बाजार स्थित मां कालिका देवी के जिस तालाब और भीटे की भूमि पर दबंगों ने जेसीबी लगाकर कब्जा किया था, उस पर कब्जे की साजिश कोई और नहीं बल्कि राजस्व विभाग के एक लेखपाल के निजी चपरासी ने रची थी। लोगों के अनुसार यह खुद को लेखपाल बताकर खेतों की पैमाइश भी करता है। इसकी पुष्टि खुद हल्का लेखपाल त्रिभुवन मौर्या ने की। आरोप है कि दबंगों ने इसी तथाकथित लेखपाल से भूमि की गलत पैमाइश करा कर भीटे की भूमि को कब्जा कर रहे थे। ग्रामीणों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सह पर तथाकथित लेखपाल से पैमाइश कराने के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मां कालिका देवी के नाम से आराजी नंबर 31 रकबा 0.64 हेक्टेयर और आराजी नंबर 32 रकबा 0.825 हेक्टेयर की भूमि राजस्व अभिलेख में तालाब और भीटा अंकित है। यह भूमि लबे रोड होने के कारण काफी कीमती है। इसी कारण दबंगों की नजर इस भूमि पर है। पिछले दिनों कुछ दबंग जेसीबी से तालाब का भीटा कटवा कर उसे समतल कराकर खेत बना रहे थे। ग्रामीणों ने विरोध किया लेकिन राजस्व विभाग की मिलीभगत के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। ग्रामीणों ने तहसील दिवस पर प्रार्थना पत्र दिया और एसडीएम राजातालाब ईशा दुहन से दबंगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हरिभानपुर के पूर्व प्रधान शिववंश सिंह और तूफानी सिंह ने बताया कि पूर्व के एक लेखपाल का निजी चपरासी जो खुद को लेखपाल बता कर भीटे की भूमि की पैमाइश कर उसे कुछ खातेदारों की भूमि बता दिया था, जिसके तहत लोग भीटे की भूमि पर कब्जा करने लगे। हल्का लेखपाल त्रिभुवन मौर्या ने बताया कि पूरे विवाद के पीछे गलत पैमाइश ही है।
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मां कालिका देवी के नाम से आराजी नंबर 31 रकबा 0.64 हेक्टेयर और आराजी नंबर 32 रकबा 0.825 हेक्टेयर की भूमि राजस्व अभिलेख में तालाब और भीटा अंकित है। यह भूमि लबे रोड होने के कारण काफी कीमती है। इसी कारण दबंगों की नजर इस भूमि पर है। पिछले दिनों कुछ दबंग जेसीबी से तालाब का भीटा कटवा कर उसे समतल कराकर खेत बना रहे थे। ग्रामीणों ने विरोध किया लेकिन राजस्व विभाग की मिलीभगत के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। ग्रामीणों ने तहसील दिवस पर प्रार्थना पत्र दिया और एसडीएम राजातालाब ईशा दुहन से दबंगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हरिभानपुर के पूर्व प्रधान शिववंश सिंह और तूफानी सिंह ने बताया कि पूर्व के एक लेखपाल का निजी चपरासी जो खुद को लेखपाल बता कर भीटे की भूमि की पैमाइश कर उसे कुछ खातेदारों की भूमि बता दिया था, जिसके तहत लोग भीटे की भूमि पर कब्जा करने लगे। हल्का लेखपाल त्रिभुवन मौर्या ने बताया कि पूरे विवाद के पीछे गलत पैमाइश ही है।
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