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धातुओं के व्यवहार को समझना जरूरी
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वाराणसी। आईआईटी बीएचयू के धातुकीय अभियांत्रिकी विभाग में छह दिवसीय शार्ट टर्म कोर्स की शुरुआत सोमवार से हुई। कोर्स के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों और उद्योगों के तकनीकी विकास सहित कई बिंदुओं पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. जीएस महोबिया ने बताया कि मटेरियल फेल होने की कई वजहें हैं जिन्हें इस कार्यक्रम आयोजित कार्यशालाओं में बताया जायेगा। बतौर मुख्य अतिथि प्रो. बीके श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 100 से अधिक ओटीपी प्रोग्राम पिछले तीन सालों में किया जा चुका है। प्रो. एनके मुखोपाध्याय ने बताया कि धातुओं के व्यवहार को समझते हुए ही उनसे उत्कृष्ट सेवा की उम्मीद की जा सकती है। हिंडालको, एनसीएल, मारुति जैसे देश में कई उद्योगों के मैटेरियल फेल्योर की समस्या में निराकरण में विभाग ने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। प्रो. केके सिंह ने पुलवामा में हुए आतंकी घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस तरह देश की सुरक्षा कई कारकों पर निर्भर करती है, ठीक उसी तरह किसी भी धातु की सुरक्षा या फेल्योर भी कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर है। इसमें मेटालर्जिकल फेल्योर सबसे महत्वपूर्ण है। इस दौरान प्रो. टीआर मानखंड, प्रो.वकील सिंह, प्रो. एके जौहरी आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम संयोजक डॉ. जीएस महोबिया ने बताया कि मटेरियल फेल होने की कई वजहें हैं जिन्हें इस कार्यक्रम आयोजित कार्यशालाओं में बताया जायेगा। बतौर मुख्य अतिथि प्रो. बीके श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 100 से अधिक ओटीपी प्रोग्राम पिछले तीन सालों में किया जा चुका है। प्रो. एनके मुखोपाध्याय ने बताया कि धातुओं के व्यवहार को समझते हुए ही उनसे उत्कृष्ट सेवा की उम्मीद की जा सकती है। हिंडालको, एनसीएल, मारुति जैसे देश में कई उद्योगों के मैटेरियल फेल्योर की समस्या में निराकरण में विभाग ने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। प्रो. केके सिंह ने पुलवामा में हुए आतंकी घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस तरह देश की सुरक्षा कई कारकों पर निर्भर करती है, ठीक उसी तरह किसी भी धातु की सुरक्षा या फेल्योर भी कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर है। इसमें मेटालर्जिकल फेल्योर सबसे महत्वपूर्ण है। इस दौरान प्रो. टीआर मानखंड, प्रो.वकील सिंह, प्रो. एके जौहरी आदि मौजूद रहे।
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