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वैदिक महायज्ञ में देश-विदेश के अनुयायियों ने दी आहुति
Updated Sat, 25 Nov 2017 01:54 AM IST
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चौबेपुर। स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहा में चल रहे विहंगम योग संत समाज के 94 वे वार्षिकोत्सव समारोह के दूसरे दिन 5101 कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। आकर्षक ढंग से सजी 5101 कुण्डीय यज्ञ वेदियों से वैदिक मंत्रों की ध्वनि गूंजती रही। देश-विदेश के भक्तों ने यज्ञ कुंड में आहुति दी। सदगुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज एवं संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज की उपस्थिति में आयोजित समारोह में श्वेत ध्वजा फहराया गया।
इस दौरान संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि यज्ञ का अर्थ है त्याग, सेवा, सहयोग और समर्पण। जो मानव, समाज और विश्व के लिए हितकारी है, उसी का नाम यज्ञ है। यज्ञ ही संसार में श्रेष्ठतम कर्म है। यज्ञ की मुख्य भावना का तात्पर्य स्वार्थ के त्याग और परोपकारमय जीवन व्यतीत करने से है। वैदिक मंत्रोच्चारण से वातावरण शुद्ध होने के साथ दिव्य परिवेश का निर्माण होता है। ग्लोबल वार्मिंग को रोकने का यह एक सशक्त माध्यम है। इस पर सभी पर्यावरण चिंतकों का ध्यान अवश्य होना चाहिए। यज्ञ एवं योग के सामंजस्य से ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है।
शाम के सत्र में आध्यात्मिक भजनों की प्रस्तुति प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा किया गया। इसके बाद संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने अपनी दिव्यवाणी में कहा कि जहां प्रेम है वहीं पर परमात्मा का वास है। जहां सत्य है, जहां श्रद्धा है जहां समर्पण है, वहीं आत्मा का कल्याण है, वहीं परमात्मा का प्रकाश है। संसार के बंधन से मुक्ति की यात्रा का आधार सदगुरुदेव का स्वर्वेद है। इस मौके पर दो आध्यात्मिक ग्रन्थ रत्नों का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर झारखंड के गो पशुपालन एवं कृषि मंत्री रणधीर सिंह, उद्योगपति सरदार अमित पाल समेत मुंबई, दिल्ली, गुजरात के गणमान्यों ने महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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इस दौरान संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि यज्ञ का अर्थ है त्याग, सेवा, सहयोग और समर्पण। जो मानव, समाज और विश्व के लिए हितकारी है, उसी का नाम यज्ञ है। यज्ञ ही संसार में श्रेष्ठतम कर्म है। यज्ञ की मुख्य भावना का तात्पर्य स्वार्थ के त्याग और परोपकारमय जीवन व्यतीत करने से है। वैदिक मंत्रोच्चारण से वातावरण शुद्ध होने के साथ दिव्य परिवेश का निर्माण होता है। ग्लोबल वार्मिंग को रोकने का यह एक सशक्त माध्यम है। इस पर सभी पर्यावरण चिंतकों का ध्यान अवश्य होना चाहिए। यज्ञ एवं योग के सामंजस्य से ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है।
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शाम के सत्र में आध्यात्मिक भजनों की प्रस्तुति प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा किया गया। इसके बाद संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने अपनी दिव्यवाणी में कहा कि जहां प्रेम है वहीं पर परमात्मा का वास है। जहां सत्य है, जहां श्रद्धा है जहां समर्पण है, वहीं आत्मा का कल्याण है, वहीं परमात्मा का प्रकाश है। संसार के बंधन से मुक्ति की यात्रा का आधार सदगुरुदेव का स्वर्वेद है। इस मौके पर दो आध्यात्मिक ग्रन्थ रत्नों का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर झारखंड के गो पशुपालन एवं कृषि मंत्री रणधीर सिंह, उद्योगपति सरदार अमित पाल समेत मुंबई, दिल्ली, गुजरात के गणमान्यों ने महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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