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क्षीरसागर की झांकी देख भाव विभोर हुए श्रद्धालु
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वाराणसी। काशी के प्रह्लाद घाट पर वर्षों से चली आ रही पांच दिवसीय नरसिंह लीला का मंगलवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस लीला को देखने के लिए क्षीर सागर की झांकी और जय विजय के श्राप का मंचन किया गया, जिसे देख सभी श्रद्धालु देख भाव विभोर हो गए।
अनोखी लीला को देखने के लिए दूर दराज से बड़ी संख्या में श्रदलु पहुंचते हैं। मंगलवार को इस अनोखी लीला के प्रथम प्रसंग का मंचन जब घाट पर देर रात शुरू हुआ तो पूरा घाट श्रद्धालुओं से पट गया था। पहले दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग के फन के नीचे सोए हुए हैं और माता लक्ष्मी उनके साथ विराजमान थीं। इस लीला को देखने के लिए रात 8 बजे से ही प्रह्लाद घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई थी। रात 11:30 बजे भगवान विष्णु की नारायण झांकी नाव पर सवार होकर जब प्रह्लाद घाट की ओर बढ़ी तो घाट की सीढ़ियों पर बैठे लोग हर हर महादेव का जय घोष करने लगे।
भगवान विष्णु आकर्षक वस्त्र और कलावती गहने धारण किए हुए थे। वहीं माता लक्ष्मी शृंगार कर उनके चरणों के पास विराजमान थी। नरसिंह लीला के अवसर पर प्रह्लाद घाट को आकर्षक विद्युत झालरों से सजाया गया था। बुधवार को नरसिंह वाराह अवतार, हिरण्याक्ष वध और प्रह्लाद जन्म की लीला का मंचन होगा।
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अनोखी लीला को देखने के लिए दूर दराज से बड़ी संख्या में श्रदलु पहुंचते हैं। मंगलवार को इस अनोखी लीला के प्रथम प्रसंग का मंचन जब घाट पर देर रात शुरू हुआ तो पूरा घाट श्रद्धालुओं से पट गया था। पहले दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग के फन के नीचे सोए हुए हैं और माता लक्ष्मी उनके साथ विराजमान थीं। इस लीला को देखने के लिए रात 8 बजे से ही प्रह्लाद घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई थी। रात 11:30 बजे भगवान विष्णु की नारायण झांकी नाव पर सवार होकर जब प्रह्लाद घाट की ओर बढ़ी तो घाट की सीढ़ियों पर बैठे लोग हर हर महादेव का जय घोष करने लगे।
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भगवान विष्णु आकर्षक वस्त्र और कलावती गहने धारण किए हुए थे। वहीं माता लक्ष्मी शृंगार कर उनके चरणों के पास विराजमान थी। नरसिंह लीला के अवसर पर प्रह्लाद घाट को आकर्षक विद्युत झालरों से सजाया गया था। बुधवार को नरसिंह वाराह अवतार, हिरण्याक्ष वध और प्रह्लाद जन्म की लीला का मंचन होगा।
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