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‘महिलाओं की साक्षरता बढ़ाने पर जोर देना होगा’
Updated Wed, 19 Sep 2018 01:56 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू विज्ञान संस्थान सांख्यिकी विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगलवार को शुभारंभ हुआ। पहले दिन वक्ताओं ने भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि संयुक्त राष्ट्र जनानान्कीय कोष के उप क्षेत्रीय निदेशक डॉ. जेनिफर बटलर ने कहा कि भारत में महिलाओं की साक्षरता पुरुषों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम है। ऐसे में महिलाओं की साक्षरता को बढ़ाने पर जोर देना होगा।
विज्ञान संगोष्ठी संकुल में आयोजित संगोष्ठी में बटलर ने कहा कि जब तक पुरुषों और महिलाओं के बीच के अंतर को कम नहीं किया जाएगा तब-तक देश में सम्यक सुधार संभव नहीं है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि लैंगिक समानता सूचकांक में भारत का विश्व में 130 वां स्थान है, जो सोचनीय है।
भारतीय जनानान्कीय अध्ययन संगठन के महासचिव डा. सोमैयाजुलू ने कहा कि विकास का सीधा संबंध महिलाओं की समाज में भागीदारी से है। अभी भी महिलाओं की अधिकांश उत्पादकता मूलभूत समस्याओं की पूर्ति में चली जाती है। संगोष्ठी संयोजक प्रो. केके सिंह ने बताया कि आंकड़ों के विश्लेषण की तकनीकों को उपयोग में लाने के लिए शोधकर्ताओं को जागरूक करना है। बताया कि संगोष्ठी के लिए कुल 320 शोध पत्र आए हैं, जिनका प्रस्तुतीकरण होगा। अध्यक्षता प्रो. मल्लिकार्जुन जोशी ने की। इस दौरान प्रो. बीबी खरे, डॉ. सुरेश शर्मा, प्रो. सुषमा त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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विज्ञान संगोष्ठी संकुल में आयोजित संगोष्ठी में बटलर ने कहा कि जब तक पुरुषों और महिलाओं के बीच के अंतर को कम नहीं किया जाएगा तब-तक देश में सम्यक सुधार संभव नहीं है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि लैंगिक समानता सूचकांक में भारत का विश्व में 130 वां स्थान है, जो सोचनीय है।
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भारतीय जनानान्कीय अध्ययन संगठन के महासचिव डा. सोमैयाजुलू ने कहा कि विकास का सीधा संबंध महिलाओं की समाज में भागीदारी से है। अभी भी महिलाओं की अधिकांश उत्पादकता मूलभूत समस्याओं की पूर्ति में चली जाती है। संगोष्ठी संयोजक प्रो. केके सिंह ने बताया कि आंकड़ों के विश्लेषण की तकनीकों को उपयोग में लाने के लिए शोधकर्ताओं को जागरूक करना है। बताया कि संगोष्ठी के लिए कुल 320 शोध पत्र आए हैं, जिनका प्रस्तुतीकरण होगा। अध्यक्षता प्रो. मल्लिकार्जुन जोशी ने की। इस दौरान प्रो. बीबी खरे, डॉ. सुरेश शर्मा, प्रो. सुषमा त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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