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सरकार, युवाओं के बीच में समन्वय जरूरी
Updated Sun, 18 Feb 2018 02:12 AM IST
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वाराणसी। दीनदयाल हस्तकला संकुल में संघ की बैठक में युवा शक्ति पर मंथन हुआ। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी में हुई चर्चा के केंद्र में युवा रहे। सूत्रों की मानें तो युवाओं के हर हाथ को काम मिले इस पर चर्चा हुई। कहा गया कि सरकार और युवाआें के बीच समन्वय जरूरी है।
बैठक में कहा गया कि युवाशक्ति को राष्ट्र निर्माण में लगाने की आवश्यकता है। स्वामी विवेकानंद और दीनदयाल के आदर्श को आगे बढ़ाने के साथ साथ युवा शक्ति को सही दिशा में लगाने की आवश्यकता है। इस पूरे वैश्विक जगत में भारतीय जीवन पद्धति, जीवन शैली, भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को जिस तरह युवाओं ने आत्मसात किया है। निश्चित तौर पर सामाजिक आचरण समाज व्यवहार में दीनदयाल प्रतिस्थापित हुए हैं।
कहीं न कहीं इसी युवाशक्ति की ऊर्जा को राष्ट्र के खंभों के निर्माण में लगना होगा। वर्तमान में युवाओं को निराशा को दूर करना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। परम वैभव की सोच के साथ सरकार युवाओं के बीच में समन्वय हो। युवाओं की सोच को सरकारी नीतियों के तहत कार्यान्वित करना आज की आवश्यकता है। अन इंप्लायमेंट अंग्रेजी शब्द है। बेरोजगार शब्द उर्दू शब्द है। प्राचीन भारत में कोई बिना काम के नहीं था। नीतियां अंतरराष्ट्रीय हों या राष्ट्रीय हो। उसे युगानुकल बनाना होगा। तब लगेगा कि समाज का वो अंतिम व्यक्ति जिसके लिए नीति का निर्धारण कर रहे हैं। लाभ की योजनाएं उसको दृष्टिगत रखते हुए बनें। युवाओं के ऐसे आचरण अनुशासित रहे जो युवा शक्ति उल्लासधर्मा हो।
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बैठक में कहा गया कि युवाशक्ति को राष्ट्र निर्माण में लगाने की आवश्यकता है। स्वामी विवेकानंद और दीनदयाल के आदर्श को आगे बढ़ाने के साथ साथ युवा शक्ति को सही दिशा में लगाने की आवश्यकता है। इस पूरे वैश्विक जगत में भारतीय जीवन पद्धति, जीवन शैली, भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को जिस तरह युवाओं ने आत्मसात किया है। निश्चित तौर पर सामाजिक आचरण समाज व्यवहार में दीनदयाल प्रतिस्थापित हुए हैं।
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कहीं न कहीं इसी युवाशक्ति की ऊर्जा को राष्ट्र के खंभों के निर्माण में लगना होगा। वर्तमान में युवाओं को निराशा को दूर करना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। परम वैभव की सोच के साथ सरकार युवाओं के बीच में समन्वय हो। युवाओं की सोच को सरकारी नीतियों के तहत कार्यान्वित करना आज की आवश्यकता है। अन इंप्लायमेंट अंग्रेजी शब्द है। बेरोजगार शब्द उर्दू शब्द है। प्राचीन भारत में कोई बिना काम के नहीं था। नीतियां अंतरराष्ट्रीय हों या राष्ट्रीय हो। उसे युगानुकल बनाना होगा। तब लगेगा कि समाज का वो अंतिम व्यक्ति जिसके लिए नीति का निर्धारण कर रहे हैं। लाभ की योजनाएं उसको दृष्टिगत रखते हुए बनें। युवाओं के ऐसे आचरण अनुशासित रहे जो युवा शक्ति उल्लासधर्मा हो।
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