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हेलीकॉप्टर के इंतजार में खड़े लोगों पर गिरी चट्टान
मुरादाबाद/ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jun 2013 01:55 AM IST
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सोलह जून के बाद भी केदारघाटी में तबाही का दौर थमा नहीं है। दो दिन पहले ही घाटी के पास ही सोनप्रयाग में हैलीकॉप्टर का इंतजार कर रहे 25-30 श्रद्धालुओं पर चट्टान आ गिरी।
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पल भर में ही ये लोग जिंदा दफन हो गए। ये मौतें तो सरकारी रिकार्ड में दर्ज ही नहीं हो सकी हैं। इन मौतों को मुरादाबाद के चार युवाओं ने अपनी आंखों से देखा।
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शहर के ईदगाह निवासी करन मिगलानी अपने दोस्तों मधुर गुप्ता, तोषित गुप्ता व मयंक जैन के साथ अपनी कार से पंद्रह जून को चार धाम यात्रा के लिए निकले थे।
शुक्रवार को दोपहर में लौटै करन ने बताया कि रात करीब सवा बारह वे लोग गौरीकुंड पहुंचे। उस समय बरसात हो रही थी। यहां से उन्हें अपना रास्ता पैदल तय करना था। होटल में जाकर वे लोग सो गए।
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सुबह आठ बजे तैयार होकर निकले तो बरसात हो रही थी। होटल वालों ने बताया कि बाबा केदार को जाने वाले रास्ते का पुल टूट चुका है।
करन ने बताया कि होटल के पीछे बहने वाली नदी में पानी बढ़ता जा रहा था। रात करीब पौने बारह बजे अचानक पानी का सैलाब आया और सड़कों पर खड़े वाहनों को अपने साथ बहा ले गया। करन के मुताबिक, तकरीबन सभी वाहनों में ड्राइवर मौजूद थे।
सुबह हालात बिगड़ते देख उन लोगों ने बस एक छोटे से बैग में अपना सामान लेकर उन लोगों ने गौरीकुंड छोड़ दिया। दलदल भरे रास्तों से होते हुए वे सोनप्रयाग की ओर चल पड़े। छह सात घंटे पहाड़ की पगडंडियों से गुजरते हुए वे मुनकरिया गणेश गांव में पहुंचे।
यहां गांव वालों ने उन्हें बताया कि करीब तीन किलोमीटर नीचे जाकर मिलिट्री कैंप है। चार पांच घंटे बाद वे लोग मिलिट्री कैंप पहुंचे। यहां बमुश्किल उन्होंने दो दिन गुजारे। मौसम थोड़ा साफ हुआ तो वे लोग एक पहाड़ी की खड़ी चढ़ाई व उतराई पार कर 19 जून की सुबह सोनप्रयाग के पास पहुंचे। सोनप्रयाग से थोड़ा पहले लोगों का झुंड खड़ा था। पता चला कि यहां हैलीकाप्टर आने वाला है। करन ने बताया कि वे चारों भी वहीं इंतजार करने लगे।
काफी थके होने के कारण कुछ दूरी पर जाकर बैठ गए। इसके बाद जो हुआ वह दिल दहलाने वाला था। पल भर में ही पहाड़ दरकने लगा। ऊपर से तेज स्पीड से आई एक चट्टान के नीचे सभी खड़े लोग दब गए।