{"_id":"baaab76a-7dda-11e2-9052-d4ae52bc57c2","slug":"uttar-pradesh-bjp-names-new-office-bearers","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तर प्रदेश भाजपा में भी वंशवाद को बढ़ावा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तर प्रदेश भाजपा में भी वंशवाद को बढ़ावा
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Sat, 23 Feb 2013 11:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश भाजपा की नई टीम में नेता पुत्रों को तवज्जो दी गई है। वंशवाद व परिवारवाद को लेकर सपा व कांग्रेस पर हमला बोलने वाली भाजपा ने अपनी प्रदेश टीम को बनाने में नेता पुत्रों को तवज्जो देने में कोई कंजूसी या संकोच नहीं किया।
विज्ञापन
आठ उपाध्यक्षों में दो राजवीर सिंह राजू भैया कल्याण सिंह और गोपाल टंडन लालजी टंडन के पुत्र हैं। प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के पुत्र हैं। प्रदेश मंत्री बनाई गईं नीलिमा कटियार अभी तक प्रदेश महामंत्री रहीं पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रेमलता कटियार की पुत्री हैं। इसके अलावा भी टीम में शामिल कुछ चेहरे किसी न किसी नेता के नजदीकी हैं।
विज्ञापन
लगभग 11 महीने की लंबी प्रतीक्षा के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी शनिवार को प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा की तो यह भी साफ हो गया कि बड़े नेताओं को खुश करने की मशक्कत व संतुलन साधने के चक्कर में ही टीम को बाहर आने में इतना लंबा समय लगा।
विज्ञापन
एक तरह चार नेताओं के पुत्र-पुत्रियों का समायोजन तो दूसरी तरफ हृदयनारायण दीक्षित जैसे चेहरों की अनदेखी ने वाजपेयी के फैसले को कठघरे में खड़ा कर दिया है। चर्चा है कि नेताओं के पुत्र-पुत्रियों को जगह देने के पीछे वाजपेयी की नेताओं को खुश करने या संतुलन साधने की कोशिश के अलावा दूसरा कोई कारण नहीं है।
कल्याण के पुत्र राजवीर का टीम में जगह पाना पहले से ही तय माना जा रहा था। पंकज सिंह को विधानसभा चुनाव के दौरान ही प्रदेश मंत्री से प्रदेश महामंत्री पद पर तरक्की दे दी गई थी। इसलिए उन्हें तो महामंत्री रखना ही था।
कज के मंत्री से महामंत्री बनने के बाद लालजी टंडन के पुत्र गोपाल टंडन की तरक्की भी तय मानी जा रही थी। कारण, लखनऊ की राजनीति में टंडन की अनदेखी फिलहाल किसी नेता के लिए आसान नहीं है। प्रेमलता कटियार भी लंबे समय से अपनी पुत्री के समायोजन में लगी थीं।