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यूपी विधानसभा में फिर टूटी मर्यादा, जमकर हंगामा
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Thu, 14 Feb 2013 08:45 PM IST
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दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के सबसे बड़े राज्य में एक बार फिर हमारे राजनेताओं ने मर्यादाओं को तार-तार कर दिया। उत्तर प्रदेश में जिन नेताओं को जनता ने अपना प्रतिनिधि चुनकर विधानसभा में भेजा, उन्हीं ने यूपी विधानसभा को सर्कस का रिंग बनाकर रख दिया।
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बजट सत्र का पहला दिन और सदन में हमारे जनप्रतिनिधि कागज के गोले फेंकने, नारेबाजी करने और एक-दूसरे पर कटाक्ष करने में लगे रहे। बृहस्पतिवार को विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के चलते राज्यपाल बीएल जोशी दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अपना अभिभाषण नहीं पढ़ सके। उन्हें अभिभाषण की पहली और आखिरी लाइन पढ़कर ही लौटना पड़ा।
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भाजपा ने अभिभाषण का बहिष्कार किया। वहीं मर्यादा भूल बसपा सदस्य टेबल पर चढ़े, तो रालोद और कांग्रेस के नुमाइंदे भी साथ हो लिए। यही नहीं कुछ सदस्यों ने तो राज्यपाल के आसन की ओर कागज के गोले भी फेंके। संसदीय कार्यमंत्री आजम खां पर भी तीखे कटाक्ष किए गए।
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आजम खां और खादी ग्रामोद्योग मंत्री राजाराम पाण्डेय के इस्तीफों की मांग भी उठी। हालांकि आजम खां ने भी बसपा पर जमकर जवाबी हमले किए। हंगामे को देखते हुए राज्यपाल ने कहा कि अगर आप नहीं सुनना चाहते हैं तो अंतिम शब्द पढ़कर अभिभाषण समाप्त कर देता हूं और दो मिनट के भीतर शुरू और अंत की लाइनें पढ़कर वापस लौट गए।
दोपहर साढ़े बारह बजे दोनों सदनों की अलग-अलग बैठक शुरू हुई, तो विधानसभा में बसपा ने वाकआउट कर दिया। बसपा ने तर्क दिया कि राज्यपाल ने 92 पेज के अभिभाषण का एक भी पेज पूरा नहीं पढ़ा। ऐसे में अध्यक्ष द्वारा इसके पढ़े जाने से प्रदेश में गलत संदेश जाएगा। विधान परिषद में भी सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बसपा के सदस्य वेल में आ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
भाजपा के हुकुम सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 176 तथा विधानसभा की नियमावली का उल्लेख करते हुए कहा कि अभिभाषण में सदन को बुलाए जाने के कारणों का उल्लेख होना चाहिए, जो नहीं है। ऐसे अभिभाषण को सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।
अध्यक्ष ने उनकी इस आपत्ति को यह कहते हुए खारिज कर दिया। परंपरा रही है कि राज्यपाल के अभिभाषण को पढ़ा हुआ माना जाता है। इसके बाद कार्यसूची के सभी कार्य निपटाकर विधानसभा की कार्यवाही 18 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई।
क्यों हुआ हंगामा
महाकुंभ के दौरान इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में हुई मौतों के बाद से ही विपक्षी पार्टियों ने अखिलेश सरकार को घेरने की तैयारी कर ली थी। बसपा का आरोप है कि कुंभ हादसा और प्रदेश की जर्जर कानून-व्यवस्था के लिए पूरी तरह प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। नीले बैनरों पर सरकार विरोधी नारे लिखे व नीली टोपियां लगाए बसपा सदस्यों ने कुंभ हादसे की न्यायिक जांच की मांग की।
कैसे-कैसे नारे
जैसे ही राज्यपाल ने अभिभाषण पढ़ना शुरू किया, विपक्षी पार्टियों के नारों से सदन गूंज गया। मानों नारेबाजी को लेकर बसपा, कांग्रेस और रालोद में होड़ लगी हुई थी। ‘राज्यपाल वापस जाओ’, ‘सोती सरकार मरते लोग, कुंभ व्यवस्था की खुल गई पोल’, ‘यूपी-केंद्र का देखो खेल, जनता मरती, क्यों टाल मटोल’, ‘कानून व्यवस्था ध्वस्त है, सपा सरकार मस्त है’, ‘समाजवादियों का है राज, जंगलराज व गुंडा राज’, ‘गुंडे-माफिया और अपराधी, सपा सरकार की हैं बैसाखी’ जैसे नारे लिखे बैनर सदन में लहरा रहे थे। रालोद सदस्य ‘सभी किसानों का 50 हजार तक का कर्ज माफ करने’, ‘गन्ना खरीद में धांधली रोकने’, ‘24 घंटे बिजली आपूर्ति दो’ जैसे नारे लिखे बैनर लिए हुए थे।
शोरशराबे के बीच निपटाया गया एजेंडा
बसपा सदस्यों के हंगामे व शोरशराबे के बीच ही सभापति गणेश शंकर पाण्डेय ने विधान परिषद की कार्यसूची के अन्य विषयों को निपटाकर सदन की बैठक 18 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने तर्क दिया कि विधानसभा में राज्यपाल ने अभिभाषण पढ़ा ही नहीं है इसलिए परिषद में उसको पढ़ने का कोई औचित्य नहीं है। पर, सभापति ने नेता सदन से राज्यपाल के अभिभाषण को सदन में रखने को कहा। इसके अलावा परिषद की कार्यसूची के अन्य विषय भी निपटाए गए।
ऐसे-ऐसे हमले
‘गुंडों की सरकार चली गई। गुंडों की, हत्यारों की, बलात्कारियों की सरकार चली गई। देश के सबसे बड़े गुंडों की सरकार ही थी तो बसपा सरकार।’-आजम खां, संसदीय कार्यमंत्री, सदन में बसपा को ललकारते हुए
राज्यपाल का अभिभाषण झूठ का पुलिंदा है, इसका यूपी की जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं। यूपी में जंगलराज है, हर तरफ अराजकता का माहौल है....जनता त्रस्त है। कुंभ हादसा इसका बड़ा प्रमाण है। अभिभाषण में इन सारी विफलताओं का कोई जवाब तो मिलता...वे सिर्फ सरकारी दस्तावेज पढ़ने आए थे।-स्वामीप्रसाद मौर्य, नेता प्रतिपक्ष
सरकार हर मोर्चे पर नाकाम रही है। पिछला बजट ही खर्च नहीं कर पाई, जो दिखाता है कि सरकार विकास को लेकर कितनी उदासीन है।-प्रदीप माथुर, नेता कांग्रेस
सरकार पूरी तरह फेल है। कुंभ हादसा इसका उदाहरण है। वहां तो मंत्रियों में श्रेय लेने की होड़ लगी हुई थी। मौतें हो रहीं थीं और सरकार सो रही थी।-मुन्ना सिंह चौहान, अध्यक्ष रालोद