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ब्लास्ट के आरोपी को छोड़ने की तैयारी में यूपी सरकार

Thu, 25 Apr 2013 08:25 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Thu, 25 Apr 2013 08:25 AM IST
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uttar pradesh government orders to withdraw case against gorakhpur blasts accused

उत्तरप्रदेश सरकार ने गोरखपुर ब्लास्ट में एक नामजद आरोपी तारिक कासिमी के खिलाफ दर्ज को मुकदमे वापस लेने के आदेश दिए हैं।

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गृह विभाग ने इस संबंध में जिलाधिकारी गोरखपुर को निर्देश जारी किया है।

गृह सचिव सर्वेश चन्द्र मिश्रा के मुताबिक गोरखपुर के जिलाधिकारी और एसपी की रिपोर्ट केआधार पर यह कार्रवाई की गई है। सरकार ने किसी भी व्यक्ति पर मुकदमा वापस लेने का यह पहला आदेश किया है।

2007 में गोरखपुर में हुए ब्लास्ट के बाद कासिमी के खिलाफ पुलिस ने एक नामजद मुकदमा दर्ज किया था।

22 मई, 2007 को गोरखपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट में छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

शुरुआती जांच में सामने आया था कि यह ब्लास्ट इंडियन मुजाहिदीन और हूजी के आतंकियों ने मिलकर किया है।

इसी सिलसिले में कथित रूप से हूजी से जुड़े तारिक कासिमी पर भी गोरखपुर ब्लास्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह मामला एडिशनल जिला और सेशन जज भूदेव गौतम की अदालत में चल रहा है।
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कासिमी के खिलाफ इस मामले में अभी आरोप पत्र दाखिल किया जाना है। आजमगढ़ में यूनानी विधा का डॉक्टर कासिमी शादीशुदा है और उसके चार बच्चे हैं।

कासिमी के परिवार ने आरोप को झूठा बताते हुए सरकार से उपयुक्त कार्रवाई की मांग की थी।

2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान सपा ने सत्ता में आने पर निर्दोष युवकों से मुकदमा वापस लेने का वादा किया था।

गृह सचिव सर्वेश चंद्र मिश्रा ने बुधवार को यहां बताया कि मुकदमा वापसी की यह कार्रवाई जिलाधिकारी, एसपी और जिला अभियोजन अधिकारी की रिपोर्ट पर की जाती है।
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जिलाधिकारी गोरखपुर को यह निर्देश दिए गए हैं कि वह मुकदमा वापस लेने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र डालें।

लखनऊ-फैजाबाद ब्लास्ट में भी आरोपी

तारिक कासिमी पर गोरखपुर के अलावा लखनऊ और फैजाबाद कोर्ट में 23 नवंबर, 2007 को हुए एक अन्य ब्लास्ट में मुकदमा चल रहा है।

यूपी पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स ने तारिक कासिमी और हूजी से संबद्ध जौनपुर के खालिद मुजाहिद को बाराबंकी रेलवे स्टेशन केपास से दिसंबर, 2007 में गिरफ्तार किया था।

एसटीएफ का दावा था कि दोनों के पास से 1.250 किलो आरडीएक्स, छह डेटोनेटर, तीन मोबाइल फोन, छह सिमकार्ड मिले थे। इन पर पहले लखनऊ और फैजाबाद कोर्ट में ब्लास्ट का आरोप लगा।

इसके बाद पुलिस ने तारिक कासिमी की भूमिका गोरखपुर में हुए ब्लास्ट में भी संदिग्ध पाई थी। इस ब्लास्ट में भी हूजी और इंडियन मुजाहिदीन केलोगों का हाथ बताया गया था।

बाद में पुलिस जांच में पाया गया कि गोरखपुर में हुए ब्लास्ट में इंडियन मुजाहिदीन के सलमान उर्फ छोटू, सैफ और मिर्जा शादाब बेग का ही हाथ था। सैफ और सलमान इस मामले में गिरफ्तार किए जा चुके हैं और इस वक्त जेल में हैं।

निमेश कमीशन की रिपोर्ट में उठे थे सवाल

पिछली बसपा सरकार ने आतंकियों पर लगे मुकदमों की जांच के लिए आरडी निमेश की अध्यक्षता में एक आयोग बनाया था।

कासिमी के घरवालों का कहना है कि निमेश आयोग की रिपोर्ट में बाराबंकी से गिरफ्तार किए गए कासिमी और मुजाहिद की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए गए हैं। यह गिरफ्तारी पूरी तरह से संदेह के घेरे में है।


पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार लोगों से भी हटेगा केस


पश्चिम बंगाल से वर्ष 2007 में पकड़े गए हूजी से जुड़े पांच आतंकियों से भी लखनऊ हाईकोर्ट में सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाला केस वापस लिया जाएगा।

इन हूजी आतंकियों को वर्ष 2007 में पकड़े गए हूजी कमांडर जलालुद्दीन की निशानदेही पर पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया था।

इनमें मुख्तार हुसैन, मोहम्मद अली अकबर, अजिउर्र रहमान, नौशाद हाफिज और नूरुल इस्लाम पर वर्ष 2008 में लखनऊ हाईकोर्ट में ट्रायल के दौरान पेश किए जाने पर देश विरोधी और सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाले नारे लगाए जाने का आरोप लगा था।

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