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UP Election Result: गोरखपुर शहरी सीट पर सीएम योगी ने बनाया नया रिकॉर्ड, वोटिंग वाले दिन ही तय हो गई थी जीत
Thu, 10 Mar 2022 07:45 PM IST
हिमांशु मिश्रा
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Thu, 10 Mar 2022 07:45 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे जारी हो गए हैं। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहरी सीट से करीब एक लाख मतों से जीत गए। 18 साल बाद किसी मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव लड़ा था। इससे पहले 2003 में मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री रहते हुए चुनाव लड़ा था।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोरखपुर शहरी सीट पर 53.30% लोगों ने इस बार वोट डाला था। 45 साल के इतिहास में यह पहली बार था, जब इतनी ज्यादा वोटिंग हुई थी। पिछली बार यानी 2017 के मुकाबले इस बार 2.32% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2017 में यहां के 50.98% लोगों ने वोट डाला था।
मुख्यमंत्री योगी की सीट पर मतदान प्रतिशत बढ़ने के बाद ही सियासी गलियारे में चर्चा शुरू हो गई थी। लोग वोटिंग बढ़ने के राजनीतिक मायने निकाल रहे थे। लेकिन, इसके उलट आंकड़ें सबकुछ पहले ही बयां कर रहे थे। इस सीट पर 1989 से अब तक कोई भी भाजपा को नहीं हरा पाया है। हां, 2002 में भाजपा से पसंद का उम्मीदवार न उतारे जाने पर योगी आदित्यनाथ ने खुद का प्रत्याशी उतार दिया था। बाद में वह भी भाजपा में ही शामिल हो गए थे।
यही नहीं, जब जब वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई तब तब भाजपा प्रत्याशी ने ज्यादा अंतर से जीत हासिल की है। पढ़िए ये रिपोर्ट...
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कब-कब कितनी वोटिंग हुई?
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मुख्यमंत्री योगी की सीट पर मतदान प्रतिशत बढ़ने के बाद ही सियासी गलियारे में चर्चा शुरू हो गई थी। लोग वोटिंग बढ़ने के राजनीतिक मायने निकाल रहे थे। लेकिन, इसके उलट आंकड़ें सबकुछ पहले ही बयां कर रहे थे। इस सीट पर 1989 से अब तक कोई भी भाजपा को नहीं हरा पाया है। हां, 2002 में भाजपा से पसंद का उम्मीदवार न उतारे जाने पर योगी आदित्यनाथ ने खुद का प्रत्याशी उतार दिया था। बाद में वह भी भाजपा में ही शामिल हो गए थे।
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यही नहीं, जब जब वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई तब तब भाजपा प्रत्याशी ने ज्यादा अंतर से जीत हासिल की है। पढ़िए ये रिपोर्ट...
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कब-कब कितनी वोटिंग हुई?
| वर्ष | प्रत्याशी | पार्टी | वोटिंग |
| 1977 | अवधेश कुमार श्रीवास्तव | जनता पार्टी | 43.9% |
| 1980 | सुनील शास्त्री | कांग्रेस (आई) | 42.1% |
| 1985 | सुनील शास्त्री | कांग्रेस | 37.5% |
| 1989 | शिव प्रताप शुक्ला | भाजपा | 49.5% |
| 1991 | शिव प्रताप शुक्ला | भाजपा | 43.4% |
| 1993 | शिव प्रताप शुक्ला | भाजपा | 47.7% |
| 1996 | शिव प्रताप शुक्ला | भाजपा | 38.0% |
| 2002 | डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल | हिंदू महासभा | 33.1% |
| 2007 | डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल | भाजपा | 28.6 % |
| 2012 | डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल | भाजपा | 46.2 % |
| 2017 | डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल | भाजपा | 50.98% |
| 2022 | योगी आदित्यनाथ | भाजपा | 66.13% |
गोरखपुर शहरी सीट पर 1989 से भाजपा का कब्जा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर शहरी सीट पर 1989 से भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। 2002 में टिकट बंटवारे को लेकर योगी आदित्यनाथ और पार्टी के नेताओं के बीच अनबन हो गई थी। तब योगी आदित्यनाथ ने इस सीट से अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के टिकट पर डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को चुनाव लड़ाया था। अग्रवाल जीते भी थे। हालांकि, 2007 से डॉ. राधा मोहन भाजपा के टिकट पर लगातार तीन बार चुनाव जीते।
आंकड़े बता रहे... वोटिंग बढ़ी तो जीत का मार्जिन बढ़ गया
अगर पिछले 45 सालों के आंकड़ों का एनालिसिस करें तो जब-जब वोटिंग बढ़ी है, इसका फायदा भाजपा को ही मिला है। मतलब वोटिंग अधिक होने पर भाजपा की जीत का मार्जिन भी बढ़ जाता है।
2007 : सबसे कम 28.6% वोट पड़े थे, तब भाजपा भाजपा के डॉ. राधा मोहन अग्रवाल ने 22,392 मतों से जीत हासिल की थी। डॉ. अग्रवाल को 49,715 मत मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे समाजवादी पार्टी के भानु प्रकाश मिश्र को 27,323 वोट मिले थे।
2012 : वोटिंग 28.6% से बढ़कर 46.2% हो गई। तब भाजपा की जीत के मार्जिन में भी करीब चार फीसदी की बढ़ोतरी हुई। तब डॉ. राधा मोहन अग्रवाल 47,454 मतों के अंतर से जीते थे। डॉ. अग्रवाल को 81,148 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे समाजवादी पार्टी की राज कुमारी देवी ने 33,694 मत हासिल किए थे।
2017 : चुनाव के दौरान मतदान में करीब चार प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। तब 50.98% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। तब भाजपा के डॉ. राधा मोहन अग्रवाल ने 60,730 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। डॉ. अग्रवाल को 122,221 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के राना राहुल सिंह दूसरे नंबर पर थे। राहुल को 61,491 वोट मिले थे।
2022 : इस बार 2.32% वोटिंग में बढ़ोतरी हुई थी। इसके चलते भाजपा के जीत का अंतर भी बढ़ गया। सीएम योगी ने दूसरे नंबर पर रही समाजवादी पार्टी की प्रत्याशीको 41.2% वोटों के अंतर से पराजित कर दिया।
आंकड़े बता रहे... वोटिंग बढ़ी तो जीत का मार्जिन बढ़ गया
अगर पिछले 45 सालों के आंकड़ों का एनालिसिस करें तो जब-जब वोटिंग बढ़ी है, इसका फायदा भाजपा को ही मिला है। मतलब वोटिंग अधिक होने पर भाजपा की जीत का मार्जिन भी बढ़ जाता है।
2007 : सबसे कम 28.6% वोट पड़े थे, तब भाजपा भाजपा के डॉ. राधा मोहन अग्रवाल ने 22,392 मतों से जीत हासिल की थी। डॉ. अग्रवाल को 49,715 मत मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे समाजवादी पार्टी के भानु प्रकाश मिश्र को 27,323 वोट मिले थे।
2012 : वोटिंग 28.6% से बढ़कर 46.2% हो गई। तब भाजपा की जीत के मार्जिन में भी करीब चार फीसदी की बढ़ोतरी हुई। तब डॉ. राधा मोहन अग्रवाल 47,454 मतों के अंतर से जीते थे। डॉ. अग्रवाल को 81,148 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे समाजवादी पार्टी की राज कुमारी देवी ने 33,694 मत हासिल किए थे।
2017 : चुनाव के दौरान मतदान में करीब चार प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। तब 50.98% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। तब भाजपा के डॉ. राधा मोहन अग्रवाल ने 60,730 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। डॉ. अग्रवाल को 122,221 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के राना राहुल सिंह दूसरे नंबर पर थे। राहुल को 61,491 वोट मिले थे।
2022 : इस बार 2.32% वोटिंग में बढ़ोतरी हुई थी। इसके चलते भाजपा के जीत का अंतर भी बढ़ गया। सीएम योगी ने दूसरे नंबर पर रही समाजवादी पार्टी की प्रत्याशीको 41.2% वोटों के अंतर से पराजित कर दिया।