{"_id":"61e0fa0871e87f5b6a321998","slug":"up-election-2022-bjp-troubles-increased-due-to-the-departure-of-backward-class-leaders","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी का रण 2022: पिछड़े वर्ग के नेताओं के जाने से भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं, मौर्य के प्रभाव पर भाजपा ने 2017 में उन्हें दी थीं आठ सीटें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी का रण 2022: पिछड़े वर्ग के नेताओं के जाने से भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं, मौर्य के प्रभाव पर भाजपा ने 2017 में उन्हें दी थीं आठ सीटें
Fri, 14 Jan 2022 09:50 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 14 Jan 2022 09:50 AM IST
सार
ये सभी नेता न केवल अपनी जाति के चेहरे माने जाते हैं बल्कि जाति में उनकी बात सुनी भी जाती है। यही वजह है कि 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्य को भी टिकट दिया। स्वामी प्रसाद के छह अन्य समर्थकों को भी टिकट दिया था।
विज्ञापन
UP Election 2022
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रदेश में पिछड़े वर्ग में पैठ रखने वाले मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, धर्म सिंह सैनी सहित अन्य दिग्गजों के भाजपा छोड़कर जाने से पार्टी को झटका लगा है। पिछड़े वर्ग के इन नेताओं के पार्टी छोड़ने से भाजपा के मौजूदा विधायकों की परेशानी बढ़ गई है। विधायक मान रहे हैं कि जो नेता पार्टी छोड़कर गए हैं उसका असर प्रदेश के उन विधानसभा क्षेत्रों में भी पड़ेगा जहां उनकी जाति-समाज के लोग निर्णायक भूमिका में हैं।
पडरौना (कुशीनगर) से विधायक व प्रदेश सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य, मऊ के मधुबन से विधायक व मंत्री दारा सिंह चौहान, सहारनपुर के नकुड़ से विधायक व राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभारी धर्म सिंह सैनी, बांदा के तिंदवारी से भाजपा विधायक बृजेश प्रजापति, कानपुर देहात के बिल्हौर से भगवती प्रसाद सागर, शाहजहांपुर की तिलहर से रोशन लाल वर्मा, औरैया की विधूना से विनय शाक्य, लखीमपुर खीरी से विधायक बाला प्रसाद अवस्थी व शिकोहाबाद के विधायक मुकेश वर्मा भाजपा छोड़ चुके हैं।
मेरठ की मीरापुर सीट से भाजपा विधायक अवतार सिंह भड़ाना भी भाजपा छोड़कर रालोद में शामिल हो गए हैं। भाजपा छोड़कर सपा में शामिल होने वाले विधायकों में सीतापुर सदर से राकेश राठौर, खलिलाबाद से जय चौबे, नानपारा (बहराइच) से माधुरी वर्मा और बुलंदशहर से केके शर्मा के नाम शामिल हैं।
विज्ञापन
खास प्रभाव रखते हैं सभी चेहरे
ये सभी नेता न केवल अपनी जाति के चेहरे माने जाते हैं बल्कि जाति में उनकी बात सुनी भी जाती है। यही वजह है कि 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्य को भी टिकट दिया। स्वामी प्रसाद के छह अन्य समर्थकों को भी टिकट दिया था। दारा सिंह चौहान की भी अपने समाज में अच्छी पकड़ है। चौहान को भाजपा ने ओबीसी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसा महत्वपूर्ण पद भी दिया था। धर्म सिंह सैनी सहारनपुर से कांग्रेस के इमरान मसूद को चुनाव हराकर आए थे।
विज्ञापन
पडरौना (कुशीनगर) से विधायक व प्रदेश सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य, मऊ के मधुबन से विधायक व मंत्री दारा सिंह चौहान, सहारनपुर के नकुड़ से विधायक व राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभारी धर्म सिंह सैनी, बांदा के तिंदवारी से भाजपा विधायक बृजेश प्रजापति, कानपुर देहात के बिल्हौर से भगवती प्रसाद सागर, शाहजहांपुर की तिलहर से रोशन लाल वर्मा, औरैया की विधूना से विनय शाक्य, लखीमपुर खीरी से विधायक बाला प्रसाद अवस्थी व शिकोहाबाद के विधायक मुकेश वर्मा भाजपा छोड़ चुके हैं।
विज्ञापन
मेरठ की मीरापुर सीट से भाजपा विधायक अवतार सिंह भड़ाना भी भाजपा छोड़कर रालोद में शामिल हो गए हैं। भाजपा छोड़कर सपा में शामिल होने वाले विधायकों में सीतापुर सदर से राकेश राठौर, खलिलाबाद से जय चौबे, नानपारा (बहराइच) से माधुरी वर्मा और बुलंदशहर से केके शर्मा के नाम शामिल हैं।
विज्ञापन
खास प्रभाव रखते हैं सभी चेहरे
ये सभी नेता न केवल अपनी जाति के चेहरे माने जाते हैं बल्कि जाति में उनकी बात सुनी भी जाती है। यही वजह है कि 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्य को भी टिकट दिया। स्वामी प्रसाद के छह अन्य समर्थकों को भी टिकट दिया था। दारा सिंह चौहान की भी अपने समाज में अच्छी पकड़ है। चौहान को भाजपा ने ओबीसी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसा महत्वपूर्ण पद भी दिया था। धर्म सिंह सैनी सहारनपुर से कांग्रेस के इमरान मसूद को चुनाव हराकर आए थे।
पिछड़े वोट बैंक को संदेश देने में जुटी भाजपा
इन विधायकों के भाजपा छोड़कर जाने की पार्टी के बड़े नेताओं की चिंता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते दो दिन से भाजपा पिछड़े वोट बैंक को संदेश देने का प्रयास कर रही है कि पार्टी में ही पिछड़े वर्ग को आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।
बृहस्पतिवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि ओबीसी समाज को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक प्रतिनिधित्व का जितना भाजपा में मिला है उतना किसी सरकार में नहीं मिला। उनके लिए ‘पी’ का अर्थ पिछड़ों का उत्थान है, जबकि कुछ लोगों के लिए ‘पी’ का अर्थ सिर्फ पिता, पुत्र और परिवार का उत्थान है।
भाजपा के नेता भी दबी जुबान में मान रहे हैं कि यदि समय रहते डैमेज कंट्रोल नहीं हुआ तो पार्टी छोड़कर जाने वाले पिछड़े वर्ग के विधायक न केवल खुद की सीट पर भाजपा के वोट बैंक को प्रभावित करेंगे बल्कि अन्य सीटों पर भी मुश्किलें बढ़ाएंगे।
बृहस्पतिवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि ओबीसी समाज को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक प्रतिनिधित्व का जितना भाजपा में मिला है उतना किसी सरकार में नहीं मिला। उनके लिए ‘पी’ का अर्थ पिछड़ों का उत्थान है, जबकि कुछ लोगों के लिए ‘पी’ का अर्थ सिर्फ पिता, पुत्र और परिवार का उत्थान है।
भाजपा के नेता भी दबी जुबान में मान रहे हैं कि यदि समय रहते डैमेज कंट्रोल नहीं हुआ तो पार्टी छोड़कर जाने वाले पिछड़े वर्ग के विधायक न केवल खुद की सीट पर भाजपा के वोट बैंक को प्रभावित करेंगे बल्कि अन्य सीटों पर भी मुश्किलें बढ़ाएंगे।