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उत्तर प्रदेश चुनाव: भाजपा को किसान आंदोलन का खौफ, पश्चिम अगर बिगड़ेगा तो पूरब ऐसे करेगा भरपाई

Mon, 25 Oct 2021 05:17 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 25 Oct 2021 05:17 PM IST
सार

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक दरअसल यह सब सोची-समझी रणनीति के तहत ही किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर भारतीय जनता पार्टी की योजनाओं का असर नहीं होगा, लेकिन योजनाओं का शुभारंभ और जनता से संवाद जैसे कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री समेत देश के तमाम बड़े नेताओं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का सीधा संवाद पूर्वांचल की धरती से ही किया जा रहा है...

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UP election 2022: BJP thinks if there is a problem in western Uttar Pradesh due to farmers protest, then it will be compensated from Purvanchal UP
पीएम मोदी ने किया मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण - फोटो : @BJP4UP

विस्तार

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 'पूरब और पश्चिम' के दांव की एक नई गणित का खाका तैयार कर लिया है। इस गणित के अनुसार अगर किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जरा भी मामला गड़बड़ होता नजर आएगा, तो पूर्वांचल से उसकी भरपाई की जाएगी। इसके लिए बाकायदा न सिर्फ तैयारियां की गई हैं, बल्कि उन्हें अमलीजामा पहनाया जाना भी शुरू कर दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी की यह रणनीति का हिस्सा ही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अब तक जितनी भी जनसभाएं और योजनाओं को शुभारंभ करने वाले कार्यक्रम हुए हैं वे सब पूर्वांचल से ही किए गए हैं।

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पूर्वांचल से सत्ता की राह आसान

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में की गई तमाम योजनाओं का शुभारंभ और बड़ी जनसभाओं को पूर्वांचल से ही शुरू किया गया है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक दरअसल यह सब सोची-समझी रणनीति के तहत ही किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर भारतीय जनता पार्टी की योजनाओं का असर नहीं होगा, लेकिन योजनाओं का शुभारंभ और जनता से संवाद जैसे कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री समेत देश के तमाम बड़े नेताओं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का सीधा संवाद पूर्वांचल की धरती से ही किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति को लंबे अरसे से समझने वाले बीडी शुक्ला कहते हैं दरअसल भाजपा को इस बात का पूरा अंदाजा है कि उसकी मुट्ठी में पूर्वांचल जितना ज्यादा मजबूती से रहेगा, उतनी ही मजबूती से उत्तर प्रदेश में सत्ता की वापसी आसान होगी। शुक्ला के मुताबिक दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चल रहे किसान आंदोलन से भारतीय जनता पार्टी को कुछ हद तक नुकसान हो सकता है। ऐसे में भाजपा ने अपने तरकश में पूर्वांचल का तीर संभाल कर रखा हुआ है। यही वजह है कि बीते कुछ वक्त में अगर आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों को भी देखेंगे तो पूर्वांचल में ही उनका सबसे ज्यादा आना हुआ है। बीते सप्ताह में तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो बार पूर्वांचल में आकर चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है।

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अवध और बुंदेलखंड की अहम भूमिका

राजनीतिक विश्लेषक डॉक्टर चंद्रभान कहते हैं कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के दो बड़े केंद्र हैं। इसमें एक पूर्वांचल और दूसरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश आता है। हालांकि अवध और बुंदेलखंड की भी अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। लेकिन जब बात पश्चिम और पूर्व की होती है तो अवध का एक बड़ा हिस्सा पूर्वांचल में शामिल हो जाता है और अवध के पश्चिम का कुछ हिस्सा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरण को साधता हुआ नजर आता है। वह कहते हैं कि हालांकि यह बात अलग है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी भी बड़े नेता को उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुत लंबे समय से सत्ता के प्रमुख पद पर बैठने का मौका नहीं मिला। डॉ. चंद्रभान के मुताबिक किसानों के आंदोलन के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा का राजनैतिक समीकरण निश्चित तौर पर थोड़ा डगमगा रहा है। यही वजह है कि भाजपा अब ज्यादा से ज्यादा फोकस पूर्वांचल को साधने में कर रही है। दरअसल वोटों के नजरिए से अगर देखा जाए तो बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का बड़ा वोट बैंक पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही आता है। हालांकि जातिगत लिहाज से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई बार ध्रुवीकरण की राजनीति हावी हो जाती है और चुनावी बाजी पलटने में देर नहीं लगती है।

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किसान आंदोलन का कोई असर नहीं

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम की राजनीति में वजूद रखने वाली राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन की चर्चा भी कुछ विपक्षी पार्टियों से चल रही है। इसके अलावा किसान आंदोलन की वजह से भी भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बड़े तबके की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। यही वजह है कि भाजपा के रणनीतिकारों ने अपना ज्यादा फोकस पूर्वांचल को साधने में लगा दिया है। प्रधानमंत्री की लगातार होने वाली जनसभाओं और कार्यक्रमों से इस बात की मुहर भी लग गई है कि पूर्वांचल को साधकर उत्तर प्रदेश में भाजपा दोबारा सत्ता में आने की सभी गोटियां सेट कर चुकी है।



हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि उनका पूरा फोकस जितना पूर्वांचल में है उतना ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर भी है। वह कहते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का किसी भी तरीके का कोई असर नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के मुताबिक उत्तर प्रदेश में योजनाओं का शुभारंभ किसी भी क्षेत्र में हो उसका लाभ प्रदेश के हर इलाके के और जिले के लोगों को मिलेगा।

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