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बेटी-दामाद समेत तीन की हत्या में दो को दस साल की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Wed, 15 Apr 2015 12:46 AM IST
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उन्नाव। बेटी, दामाद और समधन की हत्या के मामले में युवती के पिता और उसके साथी को जिला सत्र न्यायाधीश ने दस-दस साल के कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
फतेहपुर चौरासी थानाक्षेत्र के जैतपुर के मजरा दुर्गापुरवा गांव निवासी विनोद निषाद ने गांव निवासी रीता से प्रेम विवाह किया था। रीता के पिता प्रयाग नारायण उर्फ परागी को इसकी जानकारी हुई तो उसने इसका विरोध किया। इस मामले में बहला फुसलाकर ले जाने का मुकदमा भी चला था।
इसमें विनोद और रीता के बालिग होने की पुष्टि होने पर न्यायालय ने 18 सितंबर 2012 को दोनों को दोषमुक्त करार दिया। इसके बाद विनोद रीता के साथ अपने घर में रहने लगा। 17 मार्च 2014 को रीता, सास कृष्णा और ननद सीमा के साथ चचिया ससुर राकेश के घर से होली खेलकर लौट रही थी। इसी दौरान उसके पिता और अन्य ने धारदार हथियारों से हमला कर रीता और उसके पति विनोद और सास कृष्णा को मरणासन्न कर दिया। इलाज के दौरान तीनों की मौत हो गई थी।
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विनोद के पिता बाबूलाल ने परागी समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे की सुनवाई जिला सत्र न्यायाधीश सप्तम जगदीश प्रसाद कर रहे थे। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र ने पैरवी की। लेकिन तीन लोगों को संदेह का लाभ मिला और न्यायाधीश ने उन्हें बरी कर दिया। जबकि परागी और गांव के ही परमू को दस-दस साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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फतेहपुर चौरासी थानाक्षेत्र के जैतपुर के मजरा दुर्गापुरवा गांव निवासी विनोद निषाद ने गांव निवासी रीता से प्रेम विवाह किया था। रीता के पिता प्रयाग नारायण उर्फ परागी को इसकी जानकारी हुई तो उसने इसका विरोध किया। इस मामले में बहला फुसलाकर ले जाने का मुकदमा भी चला था।
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इसमें विनोद और रीता के बालिग होने की पुष्टि होने पर न्यायालय ने 18 सितंबर 2012 को दोनों को दोषमुक्त करार दिया। इसके बाद विनोद रीता के साथ अपने घर में रहने लगा। 17 मार्च 2014 को रीता, सास कृष्णा और ननद सीमा के साथ चचिया ससुर राकेश के घर से होली खेलकर लौट रही थी। इसी दौरान उसके पिता और अन्य ने धारदार हथियारों से हमला कर रीता और उसके पति विनोद और सास कृष्णा को मरणासन्न कर दिया। इलाज के दौरान तीनों की मौत हो गई थी।
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विनोद के पिता बाबूलाल ने परागी समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे की सुनवाई जिला सत्र न्यायाधीश सप्तम जगदीश प्रसाद कर रहे थे। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र ने पैरवी की। लेकिन तीन लोगों को संदेह का लाभ मिला और न्यायाधीश ने उन्हें बरी कर दिया। जबकि परागी और गांव के ही परमू को दस-दस साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।