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14 कोसी परिक्रमा में पहुंचे हजारों श्रृद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Wed, 08 Mar 2017 12:18 AM IST
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जानकी कुड़ परियर में परिक्रमा करते भक्त।
- फोटो : अमर उजाला
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फागुन माह की एकादशी को बाल्मीकि आश्रम जानकी कुंड से कानपुर के पौराणिक स्थल बिठूर की 14 कोसी पैदल परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं के जत्था पहुंचने लगा है। इस तीन दिवसीय पैदल यात्रा का समापन बिठूर में होगा। इस मेले में महिलाओं की संख्या अधिक होती है। इस अवसर पर बाबा बलखंडेश्वर मंदिर में भक्तों ने स्टाल लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।
पौराणिक महर्षि बाल्मीकि आश्रम जानकी कुंड में कानपुर की ओर से श्रद्धालुओं के जत्था कीर्तन भजन करते हुए मंगलवार सुबह ही पहुंचना शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने यहां मां जानकी मंदिर में पूजा की फिर मान्यता के अनुसार हाथों में छड़ी लेकर जानकी कुंड की फेरी लगाकर 14 कोसी पैदल परिक्रमा शुरू की। मान्यता है कि मां सीता का अयोध्या के राजा श्रीराम ने परित्याग कर दिया गया था। तब इसी आश्रम में मां सीता को आश्रय मिला था। और यहीं पर लव व कुश का जन्म हुआ।
श्रद्धालु यहां से बांस की छड़ी लेकर यात्रा करते हैं। इसके बाद छड़ी को अपने घरों में पूजा के स्थान पर रखते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि ऐसा करने से वंश हमेशा चलता हैं। रास्ते में पड़ने वाले प्राचीन मंदिर बाबा बलखंडेश्वर के दर्शन कर मंगल कामना की। यात्रा के बीच में क्षेत्र के लल्लन लोध, दिलीप कश्यप, ऋषि नरायन, देवी प्रसाद ने मंदिर परिसर में स्टाल लगाकर श्रद्धालुओं को चाय वितरित किया। बुधवार को परियर की ओर से श्रद्धालु बिठूर तक पैदल परिक्रमा करेंगे और वहीं पर यात्रा का समापन होगा।
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संतोष नहीं तो कुबेर का खजाना भी बेकार-सतीश शास्त्री
बांगरमऊ (उन्नाव)। जगत का वैभव हमें सुखी नहीं कर सकता। संसार के सारे भौतिक पदार्थ कुछ समय तक सुख देने वाले होते हैं, लेकिन संतोष रूपी खजाना मिलने के बाद सब कुछ बेकार दिखाई देता है।
हयातनगर भौरा स्थित शिव मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन भागवताचार्य पंडित सतीश भाई शास्त्री ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। व्यास ने कहा कि मनुष्य को सोना-चांदी, हीरा-मोती सहित चाहे कुबेर का खजाना ही क्यों न मिल जाए, लेकिन उसे सुख शांति नहीं मिलती।
जबकि संतोष रूपी धन मिलते ही सारा धन धूल के समान हो जाता है। उन्होंने कहा भगवान कृष्ण के बचपन के मित्र सुदामा भगवान के भजन में लगे रहते थे। पत्नी की प्रेरणा से छोटी सी चावल की भेंट लेकर द्वारिकाधीश की शरण में गए और मात्र दो मुट्ठी चावल के बदले प्रभु ने दो लोक का वैभव प्रदान कर सुदामा को धन्य कर दिया। इसके बाद अनेक प्रसंग सुनाए। समिति के कार्यकर्ताओं ने आरती-पूजन, प्रसाद वितरण किया। कथा व्यवस्थापक ज्ञान सिंह, उमेश कुमार यादव व नन्हकू प्रजापति भी मौजूद रहे।
पौराणिक महर्षि बाल्मीकि आश्रम जानकी कुंड में कानपुर की ओर से श्रद्धालुओं के जत्था कीर्तन भजन करते हुए मंगलवार सुबह ही पहुंचना शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने यहां मां जानकी मंदिर में पूजा की फिर मान्यता के अनुसार हाथों में छड़ी लेकर जानकी कुंड की फेरी लगाकर 14 कोसी पैदल परिक्रमा शुरू की। मान्यता है कि मां सीता का अयोध्या के राजा श्रीराम ने परित्याग कर दिया गया था। तब इसी आश्रम में मां सीता को आश्रय मिला था। और यहीं पर लव व कुश का जन्म हुआ।
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श्रद्धालु यहां से बांस की छड़ी लेकर यात्रा करते हैं। इसके बाद छड़ी को अपने घरों में पूजा के स्थान पर रखते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि ऐसा करने से वंश हमेशा चलता हैं। रास्ते में पड़ने वाले प्राचीन मंदिर बाबा बलखंडेश्वर के दर्शन कर मंगल कामना की। यात्रा के बीच में क्षेत्र के लल्लन लोध, दिलीप कश्यप, ऋषि नरायन, देवी प्रसाद ने मंदिर परिसर में स्टाल लगाकर श्रद्धालुओं को चाय वितरित किया। बुधवार को परियर की ओर से श्रद्धालु बिठूर तक पैदल परिक्रमा करेंगे और वहीं पर यात्रा का समापन होगा।
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संतोष नहीं तो कुबेर का खजाना भी बेकार-सतीश शास्त्री
बांगरमऊ (उन्नाव)। जगत का वैभव हमें सुखी नहीं कर सकता। संसार के सारे भौतिक पदार्थ कुछ समय तक सुख देने वाले होते हैं, लेकिन संतोष रूपी खजाना मिलने के बाद सब कुछ बेकार दिखाई देता है।
हयातनगर भौरा स्थित शिव मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन भागवताचार्य पंडित सतीश भाई शास्त्री ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। व्यास ने कहा कि मनुष्य को सोना-चांदी, हीरा-मोती सहित चाहे कुबेर का खजाना ही क्यों न मिल जाए, लेकिन उसे सुख शांति नहीं मिलती।
जबकि संतोष रूपी धन मिलते ही सारा धन धूल के समान हो जाता है। उन्होंने कहा भगवान कृष्ण के बचपन के मित्र सुदामा भगवान के भजन में लगे रहते थे। पत्नी की प्रेरणा से छोटी सी चावल की भेंट लेकर द्वारिकाधीश की शरण में गए और मात्र दो मुट्ठी चावल के बदले प्रभु ने दो लोक का वैभव प्रदान कर सुदामा को धन्य कर दिया। इसके बाद अनेक प्रसंग सुनाए। समिति के कार्यकर्ताओं ने आरती-पूजन, प्रसाद वितरण किया। कथा व्यवस्थापक ज्ञान सिंह, उमेश कुमार यादव व नन्हकू प्रजापति भी मौजूद रहे।