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पहले कुदरत की मार अब सिस्टम से लाचार

Tue, 16 Feb 2016 12:52 AM IST
अमर उजाला, उन्नाव
अमर उजाला, उन्नाव Updated Tue, 16 Feb 2016 12:52 AM IST
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The system now helpless before nature Bash

जिले के किसानों की हालत भी बुंदेलखंड के किसानों से कम बदहाल नहीं हैं। हाल यह है कि कई ब्लाकों में कल का किसान आज मजदूर बन गया है। खाद, बीज की किल्लत झेल चुके किसान सिंचाई के लिए हलाकान है। नहरें, माइनरें सूखी पड़ी हैं। ज्यादातर सरकारी नलकूप बंद पड़े हैं। फिलवक्त गेहूं किसान ज्यादा परेशान है। सिंचाई के अभाव में सैकड़ों बीघे गेहूं की फसल सूख रही है। साथ ही लाही, चना, मटर, जौ, अरहर का उत्पादन भी घटने का अंदेशा है। निजी ट्यूबवेल से सिंचाई करना भी सबके बूते में नहीं है। कुछेक बड़े काश्तकारों को छोड़कर छोटे किसान इतना पैसा भी खर्च नहीं कर सकता है।

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इस बार जनपद सूखे की चपेट में रहा है। रबी फसलों के शुरुआती सीजन में नहरों में पानी आ गया था। उस समय किसानों को पलेवा आदि करने के लिए पानी मिल गया था। इसके बाद मौसम प्रतिकूल हुआ। पर्याप्त ठंड न पड़ने के कारण गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है । अभी फरवरी माह ही चल रहा है, लेकिन तापमान बढ़ने के साथ ही गेहूं में सिंचाई की जरूरत पड़ने लगी है। मौजूदा समय में हरदोई ब्रांच से पानी न छोड़े जाने के कारण नहरें, माइनर सूखी पड़ी हुई हैं। सरकारी नलकूप भी विद्युत और यांत्रिक दोष के कारण बंद हैं। किसानों के पास सिंचाई करने के लिए निजी सिंचाई के साधनों का विकल्प बचा है। किसानों ने बताया कि निजी साधनों से सिंचाई करना किसानों के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है। कई किसान अभी भी नहरों में पानी आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इससे रबी की प्रमुख फसल गेहूं के अलावा अन्य फसलों लाही, चना, मटर, जौ, अरहर का उत्पादन कम होने की आशंका बढ़ गई है।
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गेहूं तैयार होने में छह सिंचाई की होती जरूरत
जनपद की मुख्य नहर शारदा कैनाल है। नहर में हरदोई ब्रांच से पानी आता है। वहीं दूसरी ओर 74 माइनर हैं। कृषि विभाग के जानकारों के मुताबिक गेहूं की फसल तैयार करने के लिए छह सिंचाई की जरूरत पड़ती है। बेहतर उत्पादन के लिए करीब 20 से 25 दिन तक कड़ाके की ठंड पड़नी चाहिए, लेकिन इस बार ठंड कम पड़ी। यदि गर्मी समय से पहले पड़ने लगती है तो सिंचाई और बढ़ जाती है। इस समय ऐसा ही मौसम होने से सिंचाई की संख्या बढ़ गई है।
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180 सरकारी नलकूपों में 70 फीसदी बंद
जिले में सरकारी नलकूपों की कुल संख्या 180 है। मौजूदा समय इनमें से लगभग 70 फीसदी बंद हैं। कुछ यांत्रिक दोष तो कुछ बिजली समस्या से ठप हैं। किसानों का कहना है कि नलकूप बंद होने से सिंचाई ठप है। एक ट्यूबवेल की क्यूसेक क्षमता 50 हेक्टेयर लगभग (दो सौ बीघा) खेत सींचने की होती है। औरास ब्लाक क्षेत्र में सात नलकूपों में चार बंद है। सीमऊ गांव के पास से निकली शारदा कैनाल खंड दो में पानी नहीं है। असोहा क्षेत्र में कांथा नहर सूखी पड़ी हुई है। जोरावरगंज में आठ वर्षों से चंदनखेड़ा में जंगल के बीच बना नलकूप अरसे से बंद है। मौरावां के हिलौली विकासखंड में कुल 17 नलकूपों में से 7 खराब पड़े हुए हैं। पुरवा तहसील क्षेत्र से निकली शारदा नहर व फतेहगंज, मिर्जापुर सुम्हारी माइनर सूखी पड़ी हुई हैं।




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240246 हेक्टेअर में बोया गया गेहूं
जिले में इस बार 240246 हेक्टेअर क्षेत्रफल में गेहूं बोया गया है। कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक 768 मीट्रिक टन गेहूं के उत्पादन का लक्ष्य है। जिला कृषि अधिकारी यतींद्र सिंह ने बताया कि अभी से तापमान बढ़ने से गेहूं का उत्पादन गिर सकता है।

 

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