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कोरोना से बीमार बाजार को मिली संजीवनी
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दिवाली मेले में लगी दुकानों पर खरीदारी करतीं महिलाएं।
- फोटो : UNNAO
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उन्नाव। कोरोना के चलते फीकी रही पिछली होली और दिवाली के बाद इस बार दिवाली के बाजार में रौनक है। खास बात यह है कि देशी उत्पादों से बजार पटा है। लोगों में स्वदेशी उत्पादों के प्रति आकर्षण है। बिजली की चायनीज झालरों के बजाय देशी झालर और गुलदस्ते लोगों को लुभा रहे हैं। मिट्टी के डिजाइनर दीये भी लोगों की पसंद बने हैं।
पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार बाजारों में चहल-पहल ज्यादा है। लोगों ने दिवाली की खरीददारी शुरू कर दी है। इससे बाजारों में रौनक है। घर की सजावट हो या पूजन सामग्री सभी की जगह-जगह दुकानें लगी हैं। लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, सजावटी सामान, चूरा-गट्टा, मिट्टी के दीये, मोमबत्ती की खूब खरीदारी हो रही है। मोती नगर में बिजली की सजावट के लिए झालर व रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरते अन्य सामान बेचने वालों ने बताया कि इस बार अच्छी दुकानदारी हो रही है। छोटे एलईडी बल्बों की झालर 100 से 150 रुपये में है। स्टार लाइट 150 रुपये, मटकी कमल 100 रुपये में है। करन ने बताया कि इस बार लोग चाइना निर्मित उत्पाद नहीं खरीद रहे हैं। मिट्टी के साधारण और डिजाइनर दीये (दियाली) भी लोगों को भा रहे हैं। 100 से 150 रुपये सैकड़ा में हैं। कुछ ऐसा ही मूर्तियों की खरीदारी में भी है। लोग प्लास्टर ऑफ पेरिस के बजाय कुम्हारों द्वारा तैयार की गईं गणेश, लक्ष्मी, कुबेर व अन्य मूर्तियां खरीद रहे हैं। मूर्तियों की कीमत 50 से 300 रुपये तक है।
प्रशासन की ओर से शहर के रामलीला मैदान में आयोजित दिवाली मेले में भी छोटे कारीगरों, कुम्हारों और हस्तशिल्पियों के उत्पाद बिक रहे हैं। यहां सजावट, पूजन, प्रसाद, परिधान से लेकर मनोरंजन तक सब देशी उत्पाद हैं। हस्तशिल्पी सम्मान योजना के लाभार्थी मिट्टी के दीये, मोमबत्ती, चप्पल-जूते, रुई बत्ती, लकड़ी के बर्तन व सजावटी सामान जैसे उत्पादों के स्टाल लगाए गए हैं। जरी-जरदोजी व अन्य परिधान, बिजली की झालरें समेत अन्य देशी उत्पाद तैयार करने वाले एमएसएमई के लाभार्थियों को प्रशासन ने स्टाल के लिए स्थान उपलब्ध कराया है। स्वयं सहायता समूह, अचार, अगरबत्ती, हवन सामग्री, पापड़ बेच रहे हैं।
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पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार बाजारों में चहल-पहल ज्यादा है। लोगों ने दिवाली की खरीददारी शुरू कर दी है। इससे बाजारों में रौनक है। घर की सजावट हो या पूजन सामग्री सभी की जगह-जगह दुकानें लगी हैं। लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, सजावटी सामान, चूरा-गट्टा, मिट्टी के दीये, मोमबत्ती की खूब खरीदारी हो रही है। मोती नगर में बिजली की सजावट के लिए झालर व रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरते अन्य सामान बेचने वालों ने बताया कि इस बार अच्छी दुकानदारी हो रही है। छोटे एलईडी बल्बों की झालर 100 से 150 रुपये में है। स्टार लाइट 150 रुपये, मटकी कमल 100 रुपये में है। करन ने बताया कि इस बार लोग चाइना निर्मित उत्पाद नहीं खरीद रहे हैं। मिट्टी के साधारण और डिजाइनर दीये (दियाली) भी लोगों को भा रहे हैं। 100 से 150 रुपये सैकड़ा में हैं। कुछ ऐसा ही मूर्तियों की खरीदारी में भी है। लोग प्लास्टर ऑफ पेरिस के बजाय कुम्हारों द्वारा तैयार की गईं गणेश, लक्ष्मी, कुबेर व अन्य मूर्तियां खरीद रहे हैं। मूर्तियों की कीमत 50 से 300 रुपये तक है।
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प्रशासन की ओर से शहर के रामलीला मैदान में आयोजित दिवाली मेले में भी छोटे कारीगरों, कुम्हारों और हस्तशिल्पियों के उत्पाद बिक रहे हैं। यहां सजावट, पूजन, प्रसाद, परिधान से लेकर मनोरंजन तक सब देशी उत्पाद हैं। हस्तशिल्पी सम्मान योजना के लाभार्थी मिट्टी के दीये, मोमबत्ती, चप्पल-जूते, रुई बत्ती, लकड़ी के बर्तन व सजावटी सामान जैसे उत्पादों के स्टाल लगाए गए हैं। जरी-जरदोजी व अन्य परिधान, बिजली की झालरें समेत अन्य देशी उत्पाद तैयार करने वाले एमएसएमई के लाभार्थियों को प्रशासन ने स्टाल के लिए स्थान उपलब्ध कराया है। स्वयं सहायता समूह, अचार, अगरबत्ती, हवन सामग्री, पापड़ बेच रहे हैं।
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