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खांदी कटने से कहीं राहत तो कहीं मुसीबत
अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sat, 12 Dec 2015 01:20 AM IST
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आसीवन ब्रांच की न्योतनी
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माइनर की सफाई नहीं होने, ज्यादा पानी छोड़े जाने व नहर की पटरी कम चौड़ी
होने से न्योतनी रजबहा में मौलबीखेड़ा के पास 24 घंटे में दो बार खांदी कट
गई। इससे खेतों में पानी भर गया और सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल जलमग्न हो
गई।
इससे सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद होने की आशंका जताई जाने लगी है। गांव के धीरेंद्र यादव, सुरेश, श्रीराम, बीरू, तेज बहादुर आदि ने तहसील प्रशासन के साथ नहर विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद जेई अब्दुल अमीन ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी की मदद से कटी खांदी को बंधवाने में सफलता पाई।
इससे पहले गुुरुवार रात भी खांदी कटने से सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई थी। उधर, सफीपुर में भी जमल्दीपुर के पास नहर की कटान तेज होने से जलभराव की आशंका बढ़ गई है। बताया जाता है कि यदि समय रहते उसे दुरुस्त नहीं किया गया तो खेतों में पानी भर सकता है और फसलें बर्बाद हो सकती हैं।
विकासखंड में खांदी कटने से खेतों में भरा पानी शुक्रवार को कुछ कम हुआ तो किसानों ने राहत की सांस ली। पानी कम होने से तीन दिन बाद डूबी फसलें दिखाई दी। मालूम हो कि मंगलवार रात को शारदा नहर की पुरवा ब्रांच से निकले तौरा-मिर्री रजबहे में हसनगंज तहसील क्षेत्र के तहत मरोई-इब्राहिमपुर के मध्य खांदी कट गई थी।
इससे आसपास के गांवों की लगभग 300 बीघा फसल जलमग्न हो गई थी। नहर विभाग की लापरवाही की हद तो तब हो गई जब मंगलवार को कटी खांदी को शुक्रवार की शाम को बंद किया गया। क्षेत्र में नहर में पानी कम होने से दिनभर किसान खेतों से पानी निकालने में व्यस्त रहे।
तीन दिनों से क्षेत्र में चारो तरफ दिखने वाला पानी शुक्रवार को कम पड़ा। तब जाकर जलमग्न फसल दिखने लगी। क्षेत्र के दीपू यादव, राम, गुरुचरण, पप्पू, संतू, छेदी, लल्ला, राम किशोर, शेखर, जागेश्वर ने नहर विभाग के लापरवाही पर रोष व्यक्त किया है। उधर, बिछिया क्षेत्र में भी पानी कम पड़ने से खेत की फसलें नजर आई।
इससे सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद होने की आशंका जताई जाने लगी है। गांव के धीरेंद्र यादव, सुरेश, श्रीराम, बीरू, तेज बहादुर आदि ने तहसील प्रशासन के साथ नहर विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद जेई अब्दुल अमीन ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी की मदद से कटी खांदी को बंधवाने में सफलता पाई।
इससे पहले गुुरुवार रात भी खांदी कटने से सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई थी। उधर, सफीपुर में भी जमल्दीपुर के पास नहर की कटान तेज होने से जलभराव की आशंका बढ़ गई है। बताया जाता है कि यदि समय रहते उसे दुरुस्त नहीं किया गया तो खेतों में पानी भर सकता है और फसलें बर्बाद हो सकती हैं।
विकासखंड में खांदी कटने से खेतों में भरा पानी शुक्रवार को कुछ कम हुआ तो किसानों ने राहत की सांस ली। पानी कम होने से तीन दिन बाद डूबी फसलें दिखाई दी। मालूम हो कि मंगलवार रात को शारदा नहर की पुरवा ब्रांच से निकले तौरा-मिर्री रजबहे में हसनगंज तहसील क्षेत्र के तहत मरोई-इब्राहिमपुर के मध्य खांदी कट गई थी।
इससे आसपास के गांवों की लगभग 300 बीघा फसल जलमग्न हो गई थी। नहर विभाग की लापरवाही की हद तो तब हो गई जब मंगलवार को कटी खांदी को शुक्रवार की शाम को बंद किया गया। क्षेत्र में नहर में पानी कम होने से दिनभर किसान खेतों से पानी निकालने में व्यस्त रहे।
तीन दिनों से क्षेत्र में चारो तरफ दिखने वाला पानी शुक्रवार को कम पड़ा। तब जाकर जलमग्न फसल दिखने लगी। क्षेत्र के दीपू यादव, राम, गुरुचरण, पप्पू, संतू, छेदी, लल्ला, राम किशोर, शेखर, जागेश्वर ने नहर विभाग के लापरवाही पर रोष व्यक्त किया है। उधर, बिछिया क्षेत्र में भी पानी कम पड़ने से खेत की फसलें नजर आई।