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देवा हो देवा गणपति देवा..

Thu, 17 Sep 2015 11:50 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला उन्नाव
ब्यूरो, अमर उजाला उन्नाव Updated Thu, 17 Sep 2015 11:50 PM IST
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Ganapati Deva Deva Deva Ho .

गणपति बप्पा मोराया.....जयकारों के उद्घोष, उड़ते अबीर गुलाल और ढोल नगाड़ों के बीच गणपति जी का आगमन हुआ। दस दिन के गणेश महोत्सव की शुरुआत बप्पा के स्वागत से हुई।

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चारों ओर भगवान गणेश की भक्ति की धूम रही। शहर के कई स्थानों पर भक्तों ने विघ्नहर्ता की मूर्तियों को स्थापित कर पूजन अर्चन किया।

सुबह से शुरू हुआ पूजापाठ का दौर देरशाम तक चलता रहा।  लाउड स्पीकरों पर भजते भजनों से शहर का वातावरण गजाननमय हो गया।  

गणेश चतुर्थी के दिन से शहर में गणेश महोत्सव की शुरुआत हो गई। पूरे दिन भगवान गजानन का गुणगान होता रहा। शहर के शाहगंज, एबीनगर, पीडीनगर, दरोगाबाग, सिविल लाइन सहित अन्य क्षेत्रों में भक्तों ने भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना की।
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गुरुवार को इन स्थानों पर पूजन अर्चन के साथ आरती व प्रसाद वितरण किया गया। शाहगंज में भक्तों ने भगवान गणेश की वंदना की। मंत्रोच्चार के साथ आचार्यों ने भक्तों से पूजन कराया। देरशाम को गणेश पंडाल में आसपास के भक्तगण भारी संख्या में पहुंच गए।
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यहां पर एकत्र हुई महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया। इसके बाद भगवान गजानन की आरती उतारी गई और फिर प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर क्षेत्र के सैकड़ों भक्त मौजूद रहे।

 इसी प्रकार एबीनगर में भी गणेश भक्तों ने पूजन-अर्चन किया। यहां पर पुरुषों के साथ महिलाओं व बच्चों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।

यहां पर भी गणेश पांडाल की भव्य सजावट की गई।  ऐसा ही नजारा पीडीनगर, दरोगाबाग, सिविल लाइन आदि स्थानों पर मनाए जा रहे गणेश महोत्सव का भी रहा।

श्रृद्धालुओं ने चतुर्थी के पावन अवसर पर गणेश पूजन कर पुण्य लाभ कमाया। पंडालों में पूरे दिन भजन-कीर्तन होते रहे।

लोग अपने आराध्य देव भगवान गजानन के ध्यान में खोए रहे। शाम को सभी स्थानों पर भक्तों ने गणेश पूजन कर आरती की और प्रसाद वितरण किया।

इसके बाद भक्तों ने मंडली के रुप में बैठकर लाउडस्पीकरों में बज रहे पार्वनी-नंदन के गीतों 'देवा हो देवा गणपति देवा, तुमसे बढ़कर कौन और 'एकदंत दयावंत चार भुजाधारी, माथे सिंदूर सोहे मूस की सवारी... आदि की धुन पर झूमकर नृत्य किया।



सभी गजानन की भक्ति में लीन रहे। भक्तों ने पंडालों में कीर्तनों के साथ प्रभु का गुणगान किया और मनोकामना पूर्ति का वरदान मांगा।

वहीं बड़ी संख्या में भक्तों ने अपने घरों में गजानन की मूर्तियों की स्थापना की और उनकी पूजा-अर्चना की। किसी ने एक दिन तो किसी ने तीन दिन तो किसी ने दस दिन तक के लिए भगवान गजानन की स्थापना की।

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